Skip to main content

Posts

Showing posts with the label health

World diabetes day: 'मधुमेह पर नियंत्रण के बारे में बढ़ रही है जागरूकता'

नई दिल्ली:  पूरे विश्व में आज (14 नवंबर) को  विश्व मधुमेह दिवस  मनाया जा रहा है. भारत अपनी युवा आबादी की बदौलत आने वाले समय में दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की कोशिश में है, लेकिन इस युवा आबादी के एक बड़े भाग में लोगों की शिराओं में धीरे-धीरे मीठा जहर घुलने की आशंका विशेषज्ञों की नींद उड़ी हुई है, लेकिन, राहत की बात ये है कि मधुमेह पर नियन्त्रण के बारे में युवाओं की जागरूकता बढ़ रही है. डायग्नॉस्टिक कंपनी एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स द्वारा किए गए डायबिटीज ब्लड टेस्ट एचबीए1सी के परिणाम से पता चला है कि 16-30 आयुवर्ग में असामान्य ब्लड शुगर के रुझान कम हुए हैं. इससे साफ है कि ब्लड शुगर के नियन्त्रण के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है. एसआरएल के आंकड़े दशार्ते हैं कि 2012 से 2017 के बीच एचबीए1सी जांच के लिए आए नमूनों की औसत संख्या में सालाना 32 फीसदी की वृद्धि हुई है. इस दौरान लगभग 30 लाख नमूनों का विश्लेषण किया गया है. एचबीए1सी जांच को ग्लाइकोसायलेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहा जाता है. ए1सी जांच डायबिटीज एवं प्री-डायबिटीज के निदान का नया तरीका है. इस जांच में 2 से 3 महीनों के लिए...

ब्लड प्रेशर और हार्ट प्रॉब्लम को कंट्रोल करती है ब्लू लाइट: स्टडी

‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ प्रीवेन्टेटिव कॉर्डियोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के लिए प्रतिभागियों का पूरा शरीर 30 मिनट तक करीब 450 नैनोमीटर पर नीली रोशनी के संपर्क में रहा जो दिन में मिलने वाली सूरज की रोशनी के बराबर है. लंदन:  एक अध्ययन में पाया गया है कि नीली रोशनी के संपर्क में रहने से  रक्तचाप  कम होता है जिससे हृदय रोग का खतरा भी कम हो जाता है. ‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ प्रीवेन्टेटिव कॉर्डियोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के लिए प्रतिभागियों का पूरा शरीर 30 मिनट तक करीब 450 नैनोमीटर पर नीली रोशनी के संपर्क में रहा जो दिन में मिलने वाली सूरज की रोशनी के बराबर है. इस दौरान दोनों प्रकाश के विकिरण के प्रभाव का आकलन किया गया और प्रतिभागियों का रक्तचाप, धमनियों का कड़ापन, रक्त वाहिका का फैलाव और रक्त प्लाज्मा का स्तर मापा गया. पराबैगनी किरणों के विपरीत नीली किरणें कैंसरकारी नहीं हैं. ब्रिटेन के सरे विश्वविद्यालय और जर्मनी के हेनरिक हैनी विश्वविद्यालय डसेलडार्फ के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि पूरे शरीर के नीली रोशनी के संपर्क में रहने के चलते प्रतिभागियों के सिस्टोलिक (उच्च) रक्तचाप तकरीबन 8 एमएमएचजी कम हो गया...

अगर आप लंबे समय तक बैठकर करते हैं काम तो हो जाएं चौकन्ने!

ह्यूस्टन:  अगर आप लंबे समय तक बैठकर काम करते रहते हैं, कोई ब्रेक नहीं लेते तो इससे आपको स्वास्थ्य संबंधी बहुत सी दिक्कतें हो सकती हैं. वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है. लगातार बैठे रहने को कम करने के लिए सर्वाधिक प्रभावी और व्यावहारिक तरीका क्या हो सकता है, इस पर अभी और अध्ययन किए जाने की जरूरत है. अमेरिका में रियो ग्रांदे वैली में यूनिवर्सिटी आफ टेक्सास की लिंडा इयानेस ने यह जानकारी दी है. इयानेस ने बताया, ‘‘ लंबे समय तक बैठे रहने के खराब प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने में नर्सो की महत्वपूर्ण भूमिका है.’’ हालिया सालों में किए गए अध्ययनों में यह पाया गया है लंबे समय तक बैठकर काम करने और कई गंभीर बीमारियों के खतरे की आशंका के बीच सीधा संबंध है. कुछ लोगों का यह दावा रहता है कि वे लंबे समय तक बैठ कर काम करने के बाद कसरत करके इस नुकसान की भरपाई कर लेते हैं लेकिन अमेरिकन जर्नल आफ नर्सिंग के अनुसार किसी भी कसरत से लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले नुकसान को कम नही किया जा सकता है. लगातार लंबे समय तक बैठने से सेहत को भारी नुकसान, हो सकती है जानलेवा एक ही जगह पर अधिक समय तक बैठे रहना दिल...

रिसर्च: असफलता से निराश हैं तो दें उससे जुड़ी सलाह, सफल होने की बढ़ेगी संभावना

नई दिल्ली:  अगर आप किसी काम को पूरा करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसमें असफल हो रहे हैं तो आप उस काम के बारे में दूसरों को सलाह देना शुरू कर दें. इस तरह आपके खुद के सफल होने की संभावना 65% से ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसा एक शोध के बाद सामने आया है. हाल ही में 2 हजार से ज्यादा लोगों पर एक  शोध किया गया है जिसके बाद यह नतीजा सामने आया है . यह शोध अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो ने मिलकर किया है. इस शोध का मुख्य आधार मोटिवेशन से जुड़ा था. शोधकर्ताओं द्वाया यह शोध यह जानने के लिए किया गया था कि अगर कोई व्यक्ति बार बार मिल रही असफलता से निराश है तो उसे प्रेरित करने का सबसे अच्छा तरीका क्या होगा. इस सवाल का जवाब ढूंढते ढूंढते शोधकर्ताओं को अनोखा परिणाम मिला. शोध में पता चला, भले ही कोई व्यक्ति खुद असफल हो रहा हो, लेकिन जब वो  किसी और को सलाह देता है तो खुद-ब-खुद उसका आत्मविश्वास  बढ़ता है. साथ ही वह दूसरों को जो सलाह दे रहा है, वो उसके अवचेतन या अचेतन दिमाग तक पहुंचती है. इन बातों का असर उस सलाह देने वाले व्यक्ति के व्यवहार और आउटपुट में दिखने लगता है. इसी वजह से उसके...

5 घंटे से कम सोने वाले सावधान, बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा : रिपोर्ट

लंदन :  अगर आप रात में  कम नींद  लेते हैं तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है. 5 घंटे से कम समय के लिए सोने वाले  अधेड़ उम्र के पुरुषों में दिल का दौरा पड़ने या आघात होने का खतरा  दोगुना बढ़ जाता है. पहले के अध्ययन में इस बात के स्पष्ट सबूत नहीं थे कि क्या कम नींद लेने का संबंध भविष्य में दिल की बीमारी होने से जुड़ा है. इस बार 50 वर्ष की आयु वाले पुरुषों पर इस खतरे का अध्ययन किया गया है. बेहद व्‍यस्‍त रहने वाले नींद को फिजूल समझते हैं  स्वीडन में यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग के मोआ बेंगटसन ने कहा, 'बेहद व्यस्त रहने वाले लोगों के लिए सोना समय बर्बाद करने जैसा हो सकता है लेकिन हमारे अध्ययन के अनुसार कम नींद लेने से भविष्य में दिल की बीमारी होने का खतरा हो सकता है.' वर्ष 1993 में इस अध्ययन में भाग लेने के लिए 1943 में जन्मे और गोथेनबर्ग में रह रहे पुरुषों की 50% आबादी में से इन लोगों को रैंडम तौर पर चुना गया था. कम सोने से बढ़ जाता है बीपी, हो जाता है डायबिटीज अध्ययन में पाया गया कि रात में 5 घंटे या उससे कम समय तक सोने वाले पुरुषों में उच्च रक्त चाप, मधुमेह, मोटापा, कम शारीरिक गति...

घर के अंदर भी है सांस पर 'खतरा', हर साल जाती है 13 लाख जानें

नई दिल्ली:  घर के अंदर का  वायु प्रदूषण  दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है, जो भारत में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है. यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है. भारत जैसे देश में, जहां घर के अंदर खाना पकाने से लेकर हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण मकान के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में 10 गुना अधिक नुकसान कर सकती है. खराब वेंटिलेशन से फेफड़ों के कामकाज में कठिनाई सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. स्थिति इस नाते और खराब हो रही है, क्योंकि भारत में घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर कोई पुख्ता नीति नहीं है, जिस कारण इसके वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, 'लोग अपने जीवन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मकानों के अंदर बिताते हैं. 50 प्रतिशत से अधिक कामकाजी वयस्क कार्यालयों या समान गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं. यह बड़े पैमाने पर  प्रदूषण के कारण  इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है'. उन्होंने कहा कि कुछ अन्य कारकों में विषैले रस...

लंबी उम्र चाहते हैं तो संतुलित मात्रा लें कार्बोहाइड्रेट: शोध

नई दिल्ली:  अगर आप  लंबी आयु  चाहते हैं तो अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सीमित कर दीजिए, क्योंकि भोजन में जरूरत से कम या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लेने वालों को मौत का खतरा बना रहता है. यह बात हालिया एक शोध में सामने आई है. शोध में पाया गया है कि  कार्बोहाइड्रेट  में 40 फीसदी से कम या 70 फीसदी से ज्यादा ऊर्जा के सेवन से मौत का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन कार्बोहाइड्रेट के रूप में 50-55 फीसदी ऊर्जा ग्रहण करने वालों को मौत का खतरा कम रहता है. शोध के सह-लेखक व बोस्टन स्थित हार्वर्ड टी. एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर वाल्टर विलेट ने कहा, 'इन नतीजों में एक साथ कई पहलू हैं, जो विवादास्पद रहे हैं. बहुत ज्यादा और बहुत कम कार्बोहाइड्रेट नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन सबसे जो गौर करने वाली बात है वह वसा,  प्रोटीन  और कार्बोहाइड्रेट का प्रकार है'. लांसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध के तहत 45 से 64 साल की आयु वर्ग के 15,428 वयस्कों को शामिल किया गया. प्रतिभागियों में पुरुष 600-420 किलो कैलोरी ऊर्जा रोज ग्रहण करते थे. जबकि महिलाएं 500-3600 किलो कैलोरी ऊर्जा रोज ग...

आयोडीन की कमी बन सकती है बांझपन का कारण

नई दिल्ली:  महिलाओं में आयोडीन की कमी का अगर समय रहते उपचार न कराया जाए तो गर्भधारण करने में समस्या आना,  बांझपन , नवजात शिशु में तंत्रिका तंत्र से संबंधिक गड़बड़ियां होने का खतरा बढ़ जाता है. मानव शरीर में आयोडीन एक महत्वपूर्ण माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स है. जो थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है. आयोडीन डिफेशियंसी, आयोडीन तत्व की कमी है, यह हमारी डाइट का एक आवश्यक पोषण तत्व है. आयोडीन की कमी से हाइपो थायरॉइडिज्म हो जाता है. इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल के आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अरविन्द वैद बताते हैं, 'महिलाओं के शरीर में आयोडीन की कमी का उनके प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली से सीधा संबंध है. हाइपोथायरॉइडिज्म  बांझपन  और गर्भपात का सबसे प्रमुख कारण है. जब थायरॉइड ग्लैंड की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाती है, तो वह पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है. जिससे अंडाशयों से अंडों को रिलीज करने में बाधा आती है. जो बांझपन का कारण बन जाती है'. डॉ. अरविन्द के मुताबिक जो महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज्म का शिकार होती हैं. उनमें सेक्स में अरुचि, मासिक चक्र से संबंधित गड़बड़ियां और  गर्भधारण क...

टीबी के इलाज को बेहतर बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों का स्वागत

नई दिल्लीः  अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी चिकित्सा संगठन ‘डाक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ ने क्षय रोग के इलाज को बेहतर बनाने को लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई सिफारिशों का आज स्वागत किया. इन सिफारिशों के तहत इंजेक्शन के माध्यम से दी जानी वाली दवाओं के उपयोग को कम कर और सीधे ली जाने वाली दवाओं के इस्तेमाल को प्राथमिकता देना शामिल हैं. इन नई सिफारिशों पर अमल से इलाज दर में सुधार, मृत्यु दर में कमी और दुष्प्रभावों में कमी संभव है. इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए और क्षय रोग (डीआर-टीबी) के रोगियों के इलाज के लिए डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स या मेडिसन सेन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) ने अमेरिकी फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन से लोगों के लिए सस्ती दवाएं बनाने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया.

भारत में हुआ अफगानी मरीज के दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज

नई दिल्ली:  दुर्लभ पैरासिटिक संक्रमण से पीड़ित एक अफगान मरीज भारत के नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल से अपना सफल इलाज कराने के बाद स्वस्थ होकर अपने देश लौट रहा है. जेपी हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अनुसार यह बहुत  दुर्लभ बीमारी  है. हॉस्पिटल के एक बयान में बताया गया है कि मरीज के शरीर में संक्रमण का असर मरीज के स्पाइन (रीढ़) और गर्दन पर हुआ था. जिसके कारण उनके शरीर के बायां हिस्सा अपंग हो गया था. इसके बाद न्यूरोसर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रोहन सिन्हा ने जेपी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जनों की टीम के साथ मिलकर सफलतापूर्वक जटिल 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं रीस्टोरेशन' सर्जरी पूरी की. अफगानिस्तान के 50 वर्षीय नागरिक आरिफ रेजाया को गर्दन में बहुत तेज दर्द था. उन्हें लगातार उल्टियां हो रही थीं. वे अपने दोनों हाथों में कमजोरी और चलने में परेशानी महसूस कर रहे थे. वे अफगानिस्तान और नई दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज के लिए गए लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. इसके बाद मई 2017 में वे नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल आए. जांच करने पर पता चला कि वे टेपवर्म (जीनस एकाइनोकोकस) के पैरासिटिक इन्फेक्श...

एक गोली और मिलेगा स्तन कैंसर से छुटकारा, नहीं लेनी होगी कीमोथेरेपी

नई दिल्ली:  भारत में  स्तन कैंसर  के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच एक नए अध्ययन ने स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के बीच नई उम्मीद जगाई है. स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं को देश में अब तक कीमोथेरेपी देने की सिफारिश की जाती थी. लेकिन हाल ही में इजाद की गई हार्मोनल थेरेपी में दी जाने वाली एक गोली 'कैमॉक्सगन' स्तन कैंसर को जड़ से खत्म कर सकती है. दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सर्जीकल ऑन्कोलोजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रमेश सरीन के मुताबिक 'देश में धीरे-धीरे बढ़ने वाले स्तन कैंसर के 70 फीसदी मामले में से 35 फीसदी शुरुआती चरण में आते हैं. जबकि विदेशों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत है. इन 35 फीसदी महिलाओं के लिए एक नया परीक्षण शुरू किया गया है. अगर वे यह टेस्ट कराएं तो उन्हें कीमोथेरेपी की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी'. डॉ. रमेश सरीन ने कहा, 'इस नए टेस्ट को हार्मोनल थेरेपी कहते हैं. जिसमें पॉजिटिव पाए जाने पर 'कैमॉक्सगन' नाम की एक गोली दी जाती है. जिससे 90 से 95 फीसदी लोग बिल्कुल ठीक हो जाते हैं. लेकिन यह टेस्ट करने के बाद पता लगता है कि यह  टयूमर  हार्मोन के संपर्क में आएग...

न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से 'बीमार' हो रहा देश, 75 प्रतिशत आबादी इसकी गिरफ्त में

नई दिल्ली:  देश में बहुत बड़ी आबादी न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम सिंड्रोम कीटाणु या संक्रमण द्वारा होने वाली  बीमारी  नहीं बल्कि जीवनशैली व आहार संबंधी आदतों के कारण होने वाली बीमारियों का एक संयोजन है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित लोग मोटापा, उच्च रक्तचाप,  मधुमेह , दिल संबंधी रोग आदि गैर-संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित होते हैं. हैदराबाद के सनशाइन अस्पताल के बरिएट्रिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वेणुगोपाल पारीक ने कहा कि न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम पारंपरिक आहार और जीवनशैली में आए बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम के लिए पश्चिमी भोजन खासतौर पर जिम्मेदार है. ये सभी खाद्य पदार्थ वसा, नमक, चीनी, कार्बोहाइड्रेट और परिष्कृत स्टार्च मानव शरीर में जमा हो जाते हैं और मोटापे का कारण बनते हैं. मोटापे के कारण ही मधुमेह मेलिटस, उच्च रक्तचाप, कार्डियोवैस्कुलर रोग, स्तन कैंसर और डिस्प्लिडेमिया आदि बीमारियां होती हैं. भारत में करीब 70 फीसदी शहरी आबादी मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आती है.विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 20 फीसद...

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के 30 प्रतिशत बच्चे मोटापे की गिरफ्त में : सर्वेक्षण

नई दिल्ली:  दिल्ली के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 30 प्रतिशत बच्चे  मोटापे से ग्रस्त  हैं. 10 से 18 आयु वर्ग के लगभग 10 प्रतिशत बच्चों डायबिटीज जैसी बीमारी से पीड़ित हैं. एक सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है. सर्वेक्षण के मुताबिक जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं उनमें से कई प्री-डायाबेटिक और हाइपरटेंसिव या अतिसंवेदनशील स्थितियों से पीड़ित हैं. सर्वेक्षण के मुताबिक, 'शहर की कई स्कूल कैंटीनों में अस्वास्थ्यकर भोजन जैसे डीप फ्राई किए हुए स्नैक्स और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ सर्व किए जाते हैं. उनमें से ज्यादातर अपने छात्रों की खाने-पीने की आदतों से भी अनजान हैं'. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, 'बचपन का  मोटापा  आज की एक वास्तविकता है जिसमें दो सबसे प्रमुख कारक हैं- असंतुलित आहार और बैठे रहने वाली जीवनशैली. बच्चों समेत समाज के 30 प्रतिशत से अधिक लोगों में पेट का मोटापा है. अधिकांश बच्चे सप्ताह में कम से कम एक या दो बार बाहर खाते हैं. साथ ही भोजन करने के दौरान हाथ में एक न एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पकड़े रहते हैं'. डॉ. अग्रवाल ने कहा, '...

स्पाइना बिफिडा विकार के भारत में कई मामले, पोलियो जैसी अभियान की जरूरत

नई दिल्ली:  भारत में स्पाइना बिफिडा विकार का नाम शायद ही सुनने को मिलता हो, लेकिन इस विकार के मामले में भारत दुनिया के देशों से काफी आगे है. ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है. ऐसा कहना है विशेषज्ञों का. विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइना बिफिडा एक जन्मजात विकार है, जो बच्चों में गर्भवती महिलाओं में फॉलिक एसिड की कमी के कारण होता है. इस विकार पर काबू पाने के लिए समाज के साथ ही सरकार को भी ध्यान देने की जरूरत है. स्पाइना बिफिडा फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसबी (स्पाइना बिफिडा) ने जन्मजात समस्याओं की रोकथाम, जन्म से पूर्व एवं उसके बाद उपचार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर शनिवार को यहां 28वां अंतर्राष्ट्रीय सलाना कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्धाटन मुख्य अतिथि मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने किया. सम्मेलन में संस्था के संस्थापक, न्यासी डॉ. संतोष करमाकर, संस्था से संबद्ध चिकित्सक मार्गो व्हाइटफर्ड, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के उपायुक्त डॉ. अजय खेड़ा, टाबायोटिक्स लिमिटेड-गो फॉलिक अभियान के न...

भारत में 89% लोग तनाव का शिकार, वैश्विक औसत 86 फीसद

नई दिल्‍ली:  'इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है.' शहरयार ने करीब 40 बरस पहले महानगरीय जीवन की भागदौड़ पर यह सवाल पूछा था, लेकिन आज आलम यह है कि बात शहर से बढ़कर देश तक पहुंच गई है. एक हालिया सर्वे की मानें तो भारत में 89 प्रतिशत लोग तनाव का शिकार हैं, जबकि वैश्विक औसत 86 प्रतिशत है. सर्वे में शामिल लोगों में से हर आठ तनावग्रस्त लोगों में से एक व्यक्ति को इन परेशानियों से निकलने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. लोग कई कारणों से अपनी इस समस्या का इलाज नहीं करा पाते. इनमें सबसे बड़ी समस्या इसके इलाज पर आने वाले खर्च की है. यह सर्वे अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित 23 देशों में किया गया और इसके नतीजे भारत के लिए चिंता की बात हो सकते हैं क्योंकि दुनिया के इन तमाम देशों के मुकाबले भारत के लोग कहीं ज्यादा तनाव का सामना कर रहे हैं. सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस ने अपने सिग्ना '360 डिग्री वेल-बीइंग सर्वेक्षण-फ्यूचर एश्योर्ड' की एक रिपोर्ट जारी की है. विकसित और कई उभरते देशों की तुलना में भारत में तनाव का स्तर बड़े रूप में है. इस ...

अगर आपके बॉस हमेशा Email से जुड़े रहने की सलाह देते हैं तो हो जाएं चौकन्ने

न्यूयॉर्क:  क्या आपके बॉस आपको हमेशा  ई-मेल  से जुड़े रहने और बिना सीमा के कार्य करने की हिदायत देते हैं? अगर हां, तो यह आपके स्वास्थ्य व सेहत को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आपके परिवारिक रिश्तों में टकराव पैदा कर सकता है. एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है. गैर-कामकाजी घंटों के दौरान मालिकों द्वारा काम की अपेक्षा पर जोर देने के कारण पारिवारिक संबंधों में तनाव पैदा होता है, क्योंकि कर्मचारी घर से काम के इतर भूमिकाएं पूरा करने में असमर्थ होते हैं. अमेरिका के पेंसिलवेनिया स्थित लेहघ विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर लिउबा बेल्किन ने कहा, "ऐसी अपेक्षाएं घातक तनाव पैदा करती हैं, जो न केवल कर्मचारियों की चिंता को बढ़ाने, उनके रिश्ते में संतुष्टि को कम करने और कर्मचारी स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने का काम करती हैं, बल्कि यह उनके साथी के स्वास्थ्य और वैवाहिक संतुष्टि धारणाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं. कर्मचारियों को हानिकारक प्रभावों का अनुभव करने के लिए अपने आराम के घंटों में काम पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है. यह निष्कर्ष शिकागो में एकेडमी ऑफ मैनेजमैंट की वार्षिक...

हड्डियों के लिए नासूर बन सकती है स्मोकिंग, इस लत को छोड़ने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

नई दिल्ली:  सिगरेट पीने वालों को हड्डी का इलाज कराना पड़े तो मुश्किल आती है , क्योंकि उनकी हड्डी ठीक होने में लंबा समय लग सकता है. ऐसा एक नए अध्ययन में सामने आया है. यह समस्या बुजुर्गो और महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है. आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू का लंबे समय तक उपयोग करने के कारण हर सप्ताह 13,000 से अधिक भारतीय पुरुष और 4,000 महिलाओं की मौत हो जाती है. धूम्रपान स्पष्ट रूप से एक जन-स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है. ऐसे में युवकों और युवतियों को इस लत से बचाने के उपायों पर एक बार फिर से विचार करने की जरूरत है. खासकर वे युवा, जो धूम्रपान के दुष्प्रभावों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील हैं. धूम्रपान छोड़ने से ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना भी कम हो जाती है एचसीएफआई के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "इस लत को किसी भी समय छोड़ देने से दिल की बीमारी और फेफड़ों के कैंसर से मरने का भय कम हो जाता है. धूम्रपान छोड़ने से ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना भी कम हो जाती है. धूम्रपान छोड़ने से व्यक्ति के चेहरे पर रौनक लौटने लगती है और पुरुषों एवं महिलाओं दोनों के लुक्स में सुधार होता है." उन्ह...

रोज सुबह एक मुट्ठी अंकुरित चने खाने के फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप

अंकुरित चने के फायदों के बारे में तो आपने कई मर्तबा सुना होगा. लेकिन इसके क्या-क्या फायदे होते हैं, ये शायद आप नहीं जानते होंगे.   नई दिल्ली :  अंकुरित चने के फायदों के बारे में तो आपने कई मर्तबा सुना होगा. लेकिन इसके क्या-क्या फायदे होते हैं, ये शायद आप नहीं जानते होंगे. इम्यून सिस्टम कमजोर हो या फिर आप जल्दी-जल्दी बीमार हो जाते हैं तो अंकुरित या भीगे हुए चने का सेवन आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा. इससे शरीर की इम्यूनिटी तो बढ़ेगी ही साथ आपका मौसमी बीमारी जैसे सर्दी-जुकाम, वायरल आदि से भी बचाव होगा. अंकुरित चने में प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, मिनरल और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. ये सभी शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. अंकुरित चनों को खाने से होने वाले फायदों के बारे में आगे पढ़िए. हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाए रोज सुबह खाली पेट एक मुट्ठी अंकुरित चने खाने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाएगी, क्योंकि इसमें आयरन और फॉस्फोरस पाया जाता है, जो हीमोग्लोबीन लेवल को बढ़ाता है. इसे हर रोज खाने से शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है. कब्ज से राहत भीगे चने में फ...

ज्यादा नींद लेना भी खतरनाक, इस रोग से हो सकते हैं पीड़ित

सियोल:  अगर आप यह सोचते हैं कि  कम सोने से आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है  तो आप गलत हैं. हर दिन 10 घंटे से ज्यादा सोना भी आपके मेटाबोलिक (उपापचयी) सिंड्रोम से जुड़ा हुआ है. इससे दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है. रोजाना 10 घंटे से अधिक समय तक सोने वालों के कमर का घेरा बढ़ जाना, उच्च ट्राइग्लिसराइड के स्तर को मेटाबोलिक सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है और यह दिल संबंधी बीमारियों के बढ़े जोखिम से जुड़ा होता है. ट्राइग्लिसराइड में एक प्रकार का वसा, अच्छे कोलेस्ट्रॉल का कम स्तर, उच्च रक्तचाप का खतरा शामिल है. पुरुषों व महिलाओं दोनों में ज्यादा समय तक सोने से ट्राइग्लिसराड का स्तर ज्यादा बढ़ जाता है.  महिलाओं में इसकी वजह से कमर में मोटापा बढ़ जाता है, साथ ही रक्त शर्करा व अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर गिर जाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके विपरीत, छह घंटे से भी कम की नींद पुरुषों में उपापचयी सिंड्रोम के उच्च जोखिम से जुड़ी हुई है और पुरुषों व महिलाओं में कमर के घेरे के बढ़ने से जुड़ी है. दक्षिण कोरिया में सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के मुख्य लेखक क्लेयर ई किम ने कहा, "यह...

अकेलापन इन मरीजों के लिए है बेहद खतरनाक, मौत के खतरे को कर देता है दोगुना

लंदन:  यूं तो  अकेलापन सभी के लिए खराब होता है  लेकिन दिल के मरीजों के लिए यह बेहद घातक है और उनमें मौत के खतरे को दोगुना करता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हृदय की बीमारी से जूझ रहे महिला और पुरूष दोनों में अकेले रहने की बजाए अकेलेपन का अहसास अधिक घातक होता है. डेनमार्क के कॉपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में पीएचडी की छात्र एनी विनगार्ड क्रिस्टेन्सन कहती हैं कि आज के वक्त में तन्हाई का अहसास बहुम आम है जितना पहले कभी नहीं था और काफी लोग अकेले रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले के शोध यह दिखाते हैं कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव हृदय की बीमारी और हृदयाघात से जुड़े हैं, लेकिन विभिन्न हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों के बीच इसकी जांच नहीं की गई थी. इस अध्ययन के लिए डेनमार्क के पांच अस्पताल से अप्रैल 2013 से अप्रैल 2014 के बीच छुट्टी पाए मरीजों को चुना गया.  उनसे एक प्रश्नावली भरने को कहा गया जिसमें शारीरिक, मानसिक, लाइफस्टाइल से जुड़े प्रश्न थे. अवसाद समय से पहले आपके दिमाग को बना देगा कमजोर!  एक अध्ययन में दावा किया गया है कि अवसाद समय से पहले मस्तिष्क को उम्रदराज बना देत...