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BHAI DOOJ 2018: भाई दूज आज, सिर्फ 2 घंटे 17 मिनट का ही है शुभ मुहूर्त, जानें क्या है समय

    नई दिल्ली:  दिवाली के पांच दिनी त्योहार का आखिरी दिन भाई दूज आज (9 नवंबर) बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. गोवर्धन के अगले दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. भ्रातृ द्वितीया (भाई दूज) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है, जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं. इस दिन बहनें अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और उनके लंबे जीवन और उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं. इसके बाद भाई भी अपनी बहन को भेंट स्वरूप कुछ उपहार देते हैं. क्या है कथा कथा भगवान सूर्यदेव की पत्नी छाया हैं जिनकी दो संतान हुई यमराज तथा यमुना. यमुना अपने भाई यमराज से अत्यधिक प्रेम करती थी. वह उनसे सदा यह निवेदन करती थी वे उनके घर आकर भोजन करें, लेकिन यमराज अपने काम में इतना व्यस्त कि उन्हें समय ही नहीं मिलता था और जिस कारण वह यमुना की बात को टाल जाते थे. एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन करने के लिए बुलाया तो यमराज मना न कर सके और बहन के घर चल पड़े. रास्ते में यमराज ने नरक में रहने वाले जीवों को मुक्त कर दिया. भाई को देखते ही यमुना बहुत हर्षित हु...

भाई दूज के दिन मनाई जाती है यमद्वितिया, जाने क्यों होती भगवान चित्रगुप्त की पूजा

    नई दिल्ली:  दिवाली पांच दिन का त्योहार धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज के दिन खत्म होता है. पांच दिन के त्योहार पर भाईदूज आखिरी दिन मनाया जाता है. आज (09 नवम्बर) देशभर में ये त्योहार मनाया जा रहा है. इस तिथि से यमराज और द्वितीया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. कैसे मनाते हैं त्योहार इस दिन भाई अपनी बहनों के घर में जाते है. बहनें अपने भाईयों के माथे पर तिलक कर उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं. माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है. भाई दूज के दिन ही यमराज के सचिव चित्रगुप्त की भी पूजा होती है. क्यों होती है चित्रगुप्त की पूजा चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था. इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है. मुख्य रूप से इनकी पूजा भाई दूज के दिन होती है. कहा जाता है कि इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है. कैसे करें ब्रह्मा के चित्त की उपासना प्रातः काल पूर्व दिशा में चौक बनाएं. इस पर चित्रगुप्त भगवान के विग्रह की स्थापना करें. उनके समक्ष घी ...

अहोई अष्टमी 2018: बच्चों के लिए कल मां रखेंगी व्रत, जानें पूजन का क्या है शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली:   दिवाली  से आठ दिन पहले और  करवा चौथ  के चार दिन बाद मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी का त्योहार महिलाओं के लिए खास होता है, जिस तरह करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है, उसी तरह अहोई अष्टमी के व्रत रखकर वो अपनी संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं. अहोई अष्टमी का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन मनाया जाता है. इस दिन शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा करने से संतान का जीवन खुशियों से भर जाता है. उत्तर भारत में अहोई अष्‍टमी के व्रत का विशेष महत्‍व है. इसे 'अहोई आठे' भी कहा जाता है क्‍योंकि यह व्रत अष्टमी के दिन पड़ता है. अहोई यानी के 'अनहोनी से बचाना'. किसी भी अमंगल या अनिष्‍ट से अपने बच्‍चों की रक्षा करने के लिए महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं. यही नहीं संतान की कामना के लिए भी यह व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं कठोर व्रत रखती हैं और पूरे दिन पानी की बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं. दिन भर के व्रत के बाद शाम को तारों को अर्घ्‍य दिया जाता है. हालांकि चंद्रमा के दर्शन करके भी यह व्रत पूरा किया जा सकता है, लेकिन इस दौरान चंद्रो...