मुंबई: अर्बन नक्सल मामले में महाराष्ट्र पुलिस ये पहले ही बता चुकी है कि नक्सलियों में आपसी कम्युनिकेशन के लिए कंप्यूटर पर टाइप की गई चिट्ठियों को पासवर्ड प्रोटेक्टेड पेन ड्राइव में सेव कर उसे कूरियर से भेजा जाता था. हालांकि अब पुलिस सूत्रों ने ताज़ा खुलासा ये किया है कि इस मोडस ऑपरेंडी (कार्यप्रणाली) के अलावा कुछ कॉन्फिडेंटिअल अर्जेंट बातों के लिए माओइस्ट कुरियर के बजाय ईमेल का भी इस्तेमाल करते थे. ये ईमेल ट्रेस न हो सके और जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके और इसलिए इसलिए वे इंटरनेट के बजाय डार्कनेट का इस्तेमाल करते थे. पुलिस सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार कई आरोपियों ने ईमेल भेजने के लिए डार्कनेट की एक वेबसाइट "rise.in" का इस्तेमाल किया. इस ईमेल के ज़रिये आरोपियों ने अपनी साजिश, टारगेट, और फंडिंग से जुड़े कई अहम् कम्युनिकेशन किया. दरअसल डार्कनेट कंप्यूटर जगत का एक गोपनीय हिस्सा है जहां पहचान छिपाकर गैरकानूनी मंसूबों को अंजाम दिया जा सकता है. इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले शख्स को उसके कंप्यूटर के आईपी अड्रेस की मदद से ट्रेस किया जा सकता है लेकिन डार्कनेट इस्तेमाल करनेवा...
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