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देश में 'ब्लैक आउट' का खतरा: बिहार, बंगाल, यूपी, दिल्ली की बत्ती हो सकती है गुल

नई दिल्ली:  देश के बड़े हिस्से को ब्लैक आउट का सामना करना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से में भयंकर बिजली संकट पैदा हो सकता है. बताया जा रहा है कि इन इलाकों में बिजली सप्लाई करने वाले  एनटीपीसी  के प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है. एनटीपीसी के संयंत्रों से इन इलाकों में 4200 मेगावॉट बिजली पैदा होती है. हालांकि ऐसे किसी भी हालात को टालने के लिए केंद्र सरकार जुटी हुई है. अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में एनटीपीसी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'झारखंड के राजमहल माइन्स से कोल इंडिया करीब 55,000 टन कोल सप्लाई करती थी. अब यह घटकर 40,000 टन हो गया है. बारिश के दिनों में तो यह घटकर 20,00 टन पर आ जाता है. इस वजह से एनटीपीसी के संयंत्रों के पास कोयले का स्टॉक कम हो गया है. अखबार का कहना है कि एनटीपीसी के फरक्का संयंत्र में कोयले का स्टॉक घटकर 4000 टन पर आ गया है, जबकि दो महीने पहले यहां 2.5 लाख टन कोयला रिजर्स में था. बिहार के कहलगांव थर्मल पावर स्टेशन में कोयले के स्टॉक में कमी हो गई है. यहां अब 45,0...

कोयले पर खाना पकाने से बढ़ सकता है हृदय संबंधी बीमारियों से मौत का खतरा : अध्ययन

लंदन:  भोजन पकाने के लिए लंबे समय तक कोयला, लकड़ी या चारकोल के इस्तेमाल के कारण  हृदय संबंधी बीमारियों  से मौत का खतरा बढ़ सकता है. एक नए अध्ययन में इस बात का पता चला है. ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डेरिक बेनेट ने कहा, ‘‘हमारे अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि जो लोग खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें जल्द से जल्द बिजली या गैस का इस्तेमाल करना चाहिए.’’ हृदय या  रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां  पूरी दुनिया में लोगों की मौत का एक प्रमुख कारण है. ठोस ईंधन बन सकते हैं असमय मौत का कारण  इसमें यह सुझाव दिया गया कि ठोस ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी या चारकोल से खाना बनाने से वायु प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही इससे हृदय रोग से असमय मृत्यु भी हो सकती है. हालांकि इसके सीमित साक्ष्य हैं. हालिया अध्ययन में खाना पकाने में इस्तेमाल किए जाने वाले ठोस ईंधन एवं हृदय रोग के बीच संबंध बताया गया है. साथ ही ठोस ईंधन से स्वच्छ ईंधन की ओर से रुख करने के संभावित प्रभाव भी बताये गए हैं. इसमें वर्ष 2004 से 2008 के बीच चीन के 10 इलाकों से 30 से 79 उम्र के 3,41,730 व्यक्तियों को शामिल कि...