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दिल्ली समेत उत्तर के मैदानी इलाकों में ठंडक, प्रदूषण में होगा इजाफा

पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण अगले 24 घंटों के दौरान सर्दी बढ़ने की संभावना है. नई दिल्ली:  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर के मैदानी इलाकों में उत्तर पश्चिमी हवाओं की गति में इजाफा होने और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण अगले 24 घंटों के दौरान सर्दी बढ़ने की संभावना है. मौसम विभाग में दिल्ली क्षेत्र की पूर्वानुमान इकाई के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि तापमान में गिरावट के साथ ही हवा की गति में कमी आने के अनुमान को देखते हुये दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में इस सप्ताहांत सर्दी बढ़ने के साथ प्रदूषण का स्तर भी बढ़ सकता है. उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिनों में उत्तर पश्चिमी हवाओं की गति बढ़ने के कारण दिल्ली सहित आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार दर्ज किया गया है. शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक पर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 315 दर्ज किया गया. प्रदूषण मानकों के मुताबिक यह बहुत खराब श्रेणी में आता है. दिल्ली NCR क्षेत्र का न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया डा. श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र का न्यूनतम तापमान ...

जहरीली हवा के डायरेक्ट इफेक्ट, दिल्ली-NCR में प्रदूषण से पड़ सकते हैं अस्थमा के दौरे

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत 1.5 से 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जबकि कुछ अध्ययनों ने यह संख्या 3 करोड़ तक आंकी है. नोएडा/दिल्ली :  मेट्रो रेस्पिरेटरी सेंटर के डायरेक्टर एवं चेयरमैनदेश एवं पल्मोनोलॉजिस्ट, डॉ. दीपक तलवार, ने दिल्ली एनसीआर में खतरनाक प्रदूषण स्तर के मद्देनजर सभी अस्थमा रोगियों को अस्थमा के दौरों के बारे में आगाह किया है. उन्होंने रोगियों से घर के अंदर रहने और धूल कणों व प्रदूषक तत्वों से बचने की सलाह दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत 1.5 से 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जबकि कुछ अध्ययनों ने यह संख्या 3 करोड़ तक आंकी है. इनमें से लगभग 5 से 10 प्रतिशत रोगियों में मुश्किल किस्म का अस्थमा है, क्योंकि उन्हें इसके तीव्र दौरे पड़ते रहते हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता खराब है। साथ ही भरपूर उपचार के बावजूद वे शारीरिक रूप से अक्षम हैं. डॉ. तलवार ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी पेश करने के अवसर पर बोल रहे थे, जो कि मुश्किल अस्थमा का प्रबंधन करने के लिए एक नयी, अत्यधिक उन्नत और अभिनव थेरेपी है. दिल्ली से उड़ान भरने वालों को देना होगा 86 फीसदी ज्यादा किराया,...

'दिल्ली में सांस लेना 15 से 20 सिगरेट पीने के बराबर'

मेडिकल रिसर्च में पाया गया कि यहां हर शख्स के सेहत को एक दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंच रहा है. नई दिल्ली:  राष्ट्रीय राजधानी के डॉक्टरों ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में खराब  वायु प्रदूषण  का सेहत पर असर एक दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर है. वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को प्रदर्शित करने के लिए, शनिवार को शहर के एक अस्पताल में मानव फेफड़ों के प्रतिरूप को रखा है. लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक न्यासी, सर गंगा राम अस्पताल में सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार ने कहा, ‘‘ मैंने बीते 30 साल में लोगों के फेफड़ों के रंग को बदलते हुए देखा है. पहले, सिगरेट पीने वालों के फेफड़ों पर काली रंग की परत होती थी जबकि अन्य के फेफड़ों का रंग गुलाबी होता था. उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन आजकल, मुझे सिर्फ काले फेफड़े ही दिखाई देते हैं. यहां तक कि किशोरों के फेफड़ों तक पर काले निशान होते हैं. यह डरावना है. इस अनूठे प्रतिरूप से हमें उम्मीद है हम लोगों को यह दिखा सकते हैं कि उनके फेफड़ों में क्या हो रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ लोगों की सेहत पर खराब हवा के प्रभाव की तुलना एक दिन म...

प्रदूषण का प्रकोप, नोएडा में स्‍कूलों में बच्‍चों की आउटडोर एक्‍ट‍िव‍िटी पर लगी रोक

    नई दिल्ली :  दिल्ली और नोएडा समेत पूरे एनसीआर में प्रदूषण का प्रकोप जस का तस बना हुआ है. हवा की गुणवत्ता रविवार को बहुत खराब और गंभीर श्रेणियों के बीच रही, क्योंकि पटाखा फोड़ने से निकलने वाले प्रदूषक तत्व धीमी सतही हवाओं के चलते वातावरण में फंसे रहे. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के डेटा के अनुसार समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 397 दर्ज किया गया जो कि बहुत खराब श्रेणी में पड़ता है. नोएडा प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए सभी स्कूलों में एसेंबली एवं आउटडोर एक्टिविटी पर आगामी आदेशों तक जिलाधिकारी बीएन सिंह के द्वारा रोक लगा दी गई है. इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा जनपद के समस्त स्कूल कॉलेजों के प्रधानाचार्य एवं संचालकों के लिए पत्र प्रेषित किया गया है. दिल्ली में वायु गुणवत्ता बहुत खराब और गंभीर श्रेणी के बीच रही : प्राधिकारी केंद्र संचालित सिस्टम आफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग (एसएएफएआर) ने एक्यूआई 419 दर्ज किया जो कि गंभीर श्रेणी में पड़ता है. सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को पीएम2.5 (हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम के व्यास के प्रदूषक कण) का स्त...

देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित है UP के ये 8 शहर, लिस्ट में कानपुर टॉप पर

कानपुर:  सर्दियों की दस्तक के बीच उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों की ‘प्राणवायु’ अब जहरीली होना शुरू हो गई है. राज्य के अधिकतर प्रमुख नगरों में आज हवा की गुणवत्ता सेहत के लिये ‘बहुत खराब’ आंकी गई है. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कानपुर, गाजियाबाद, लखनऊ, आगरा और बागपत समेत कई शहरों में प्रमुख प्रदूषणकारी तत्व पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की खतरनाक स्तर तक मौजूदगी रही. इनमें से कानपुर की स्थिति तो बेहद खराब रही. देश के टॉप-10 सबसे प्रदूषित शहरों में 8 उत्तर प्रदेश के हैं. सूचकांक के मुताबिक, उद्योग नगरी कानपुर में प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी का रहा. यहां शाम पांच बजे पीएम 2.5 की मौजूदगी 400 से अधिक रही. गाजियाबाद भी ज्यादा पीछे नहीं रहा. यहां भी पीएम 2.5 का संघनन लगभग 400 ही रहा. बागपत की हवा भी ‘बहुत खराब‘ श्रेणी की रही. यहां पीएम 2.5 का संघनन औसतन 380 के आसपास रहा. इसके अलावा नोएडा में शाम पांच बजे तक पीएम 2.5 का संघनन 379, हापुड़ में 371, बुलंदशहर में 360, मुजफ्फरनगर में 352, ग्रेटर नोएडा में 340, आगरा में 323, लखनऊ के ल...

प्रदूषण से केवल हेल्‍थ नहीं बल्कि आपकी मैथ्‍स भी हो सकती है कमजोर!

बीजिंग:  लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से संज्ञानात्‍मक संबंधी कौशल पर असर पड़ता है जिससे मौखिक और गणित परीक्षा के अंकों में कमी आ सकती है. चीन में किए गए एक शोध में आगाह किया गया है कि सामाजिक कल्याण पर प्रदूषण का अप्रत्यक्ष तौर पर असर सोच से कहीं ज्यादा हो सकता है. यह शोध पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित हुआ है. अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान में वरिष्ठ शोधार्थी शिओबो झांग ने कहा, ‘‘चीन के शहरों के मुकाबले भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति ज्यादा गंभीर है इसलिए मुझे आशंका है कि भारत में इसका असर बेहद बुरा होगा.’’ झांग ने कहा, ‘‘लंबे समय तक प्रदूषित वायु में सांस लेने से मौखिक और गणित परीक्षाओं में ज्ञानात्मक प्रदर्शन में बाधा उत्पन्न होती है.’’ चीन में पेकिंग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर झांग ने कहा, ‘‘वायु प्रदूषण से संज्ञानात्मक कौशल को होने वाले नुकसान से मानवीय क्षमता के विकास में भी बाधा पैदा होने की आशंका होती है.’’