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ब्लड प्रेशर और हार्ट प्रॉब्लम को कंट्रोल करती है ब्लू लाइट: स्टडी

‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ प्रीवेन्टेटिव कॉर्डियोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के लिए प्रतिभागियों का पूरा शरीर 30 मिनट तक करीब 450 नैनोमीटर पर नीली रोशनी के संपर्क में रहा जो दिन में मिलने वाली सूरज की रोशनी के बराबर है. लंदन:  एक अध्ययन में पाया गया है कि नीली रोशनी के संपर्क में रहने से  रक्तचाप  कम होता है जिससे हृदय रोग का खतरा भी कम हो जाता है. ‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ प्रीवेन्टेटिव कॉर्डियोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के लिए प्रतिभागियों का पूरा शरीर 30 मिनट तक करीब 450 नैनोमीटर पर नीली रोशनी के संपर्क में रहा जो दिन में मिलने वाली सूरज की रोशनी के बराबर है. इस दौरान दोनों प्रकाश के विकिरण के प्रभाव का आकलन किया गया और प्रतिभागियों का रक्तचाप, धमनियों का कड़ापन, रक्त वाहिका का फैलाव और रक्त प्लाज्मा का स्तर मापा गया. पराबैगनी किरणों के विपरीत नीली किरणें कैंसरकारी नहीं हैं. ब्रिटेन के सरे विश्वविद्यालय और जर्मनी के हेनरिक हैनी विश्वविद्यालय डसेलडार्फ के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि पूरे शरीर के नीली रोशनी के संपर्क में रहने के चलते प्रतिभागियों के सिस्टोलिक (उच्च) रक्तचाप तकरीबन 8 एमएमएचजी कम हो गया...

रिसर्च: असफलता से निराश हैं तो दें उससे जुड़ी सलाह, सफल होने की बढ़ेगी संभावना

नई दिल्ली:  अगर आप किसी काम को पूरा करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसमें असफल हो रहे हैं तो आप उस काम के बारे में दूसरों को सलाह देना शुरू कर दें. इस तरह आपके खुद के सफल होने की संभावना 65% से ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसा एक शोध के बाद सामने आया है. हाल ही में 2 हजार से ज्यादा लोगों पर एक  शोध किया गया है जिसके बाद यह नतीजा सामने आया है . यह शोध अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो ने मिलकर किया है. इस शोध का मुख्य आधार मोटिवेशन से जुड़ा था. शोधकर्ताओं द्वाया यह शोध यह जानने के लिए किया गया था कि अगर कोई व्यक्ति बार बार मिल रही असफलता से निराश है तो उसे प्रेरित करने का सबसे अच्छा तरीका क्या होगा. इस सवाल का जवाब ढूंढते ढूंढते शोधकर्ताओं को अनोखा परिणाम मिला. शोध में पता चला, भले ही कोई व्यक्ति खुद असफल हो रहा हो, लेकिन जब वो  किसी और को सलाह देता है तो खुद-ब-खुद उसका आत्मविश्वास  बढ़ता है. साथ ही वह दूसरों को जो सलाह दे रहा है, वो उसके अवचेतन या अचेतन दिमाग तक पहुंचती है. इन बातों का असर उस सलाह देने वाले व्यक्ति के व्यवहार और आउटपुट में दिखने लगता है. इसी वजह से उसके...

5 घंटे से कम सोने वाले सावधान, बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा : रिपोर्ट

लंदन :  अगर आप रात में  कम नींद  लेते हैं तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है. 5 घंटे से कम समय के लिए सोने वाले  अधेड़ उम्र के पुरुषों में दिल का दौरा पड़ने या आघात होने का खतरा  दोगुना बढ़ जाता है. पहले के अध्ययन में इस बात के स्पष्ट सबूत नहीं थे कि क्या कम नींद लेने का संबंध भविष्य में दिल की बीमारी होने से जुड़ा है. इस बार 50 वर्ष की आयु वाले पुरुषों पर इस खतरे का अध्ययन किया गया है. बेहद व्‍यस्‍त रहने वाले नींद को फिजूल समझते हैं  स्वीडन में यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग के मोआ बेंगटसन ने कहा, 'बेहद व्यस्त रहने वाले लोगों के लिए सोना समय बर्बाद करने जैसा हो सकता है लेकिन हमारे अध्ययन के अनुसार कम नींद लेने से भविष्य में दिल की बीमारी होने का खतरा हो सकता है.' वर्ष 1993 में इस अध्ययन में भाग लेने के लिए 1943 में जन्मे और गोथेनबर्ग में रह रहे पुरुषों की 50% आबादी में से इन लोगों को रैंडम तौर पर चुना गया था. कम सोने से बढ़ जाता है बीपी, हो जाता है डायबिटीज अध्ययन में पाया गया कि रात में 5 घंटे या उससे कम समय तक सोने वाले पुरुषों में उच्च रक्त चाप, मधुमेह, मोटापा, कम शारीरिक गति...

घर के अंदर भी है सांस पर 'खतरा', हर साल जाती है 13 लाख जानें

नई दिल्ली:  घर के अंदर का  वायु प्रदूषण  दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है, जो भारत में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है. यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है. भारत जैसे देश में, जहां घर के अंदर खाना पकाने से लेकर हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण मकान के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में 10 गुना अधिक नुकसान कर सकती है. खराब वेंटिलेशन से फेफड़ों के कामकाज में कठिनाई सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. स्थिति इस नाते और खराब हो रही है, क्योंकि भारत में घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर कोई पुख्ता नीति नहीं है, जिस कारण इसके वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, 'लोग अपने जीवन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मकानों के अंदर बिताते हैं. 50 प्रतिशत से अधिक कामकाजी वयस्क कार्यालयों या समान गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं. यह बड़े पैमाने पर  प्रदूषण के कारण  इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है'. उन्होंने कहा कि कुछ अन्य कारकों में विषैले रस...

क्‍यों होता है तेज पेट दर्द? वैज्ञानिकों ने खोजा पहचान का तरीका

ह्यूस्टन :  भारतीय-अमेरिकी मूल के एक वैज्ञानिक ने 50 ऐसे प्रोटीन बायोमार्कर की पहचान की है, जिससे आसानी से  तेज पेट दर्द या इंफ्लेमेट्री बाउल डिजीज (IBD)  का पता लगाया जा सकता है. आईबीडी के कारण डायरिया, पेट में मरोड़ और वजन में कमी की समस्या हो सकती है. अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चंदर मोहन को अमेरिका के क्रॉन्स एंड कोलाइटिस फाउंडेशन से 3,47,490 अमेरिकी डॉलर का अनुदान मिला है. इस बीमारी में होता है पाचन तंत्र में दर्द आईबीडी विशेषज्ञ शुभ्रा कुगातासन के साथ मिलकर मोहन, मल में मौजूद ऐसे प्रोटीन बायोमार्कर की जांच कर रहे हैं, जिससे बीमारी का पता चल सके. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और आंत की कोशिकाओं के बीच संतुलन नहीं बन पाने के कारण आईबीडी की समस्या पैदा होती है. दोनों ही बीमारियों में पाचन तंत्र में दर्द होता है. पेट दर्द में मदद करता है पीपल इससे पहले एक अध्‍ययन में बताया गया था कि पीपल का पेड़ जितना धार्मिक मान्यताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है उतना ही औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं होती है. इसलिए आज हम आपको पीपल क...

लंबी उम्र चाहते हैं तो संतुलित मात्रा लें कार्बोहाइड्रेट: शोध

नई दिल्ली:  अगर आप  लंबी आयु  चाहते हैं तो अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सीमित कर दीजिए, क्योंकि भोजन में जरूरत से कम या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लेने वालों को मौत का खतरा बना रहता है. यह बात हालिया एक शोध में सामने आई है. शोध में पाया गया है कि  कार्बोहाइड्रेट  में 40 फीसदी से कम या 70 फीसदी से ज्यादा ऊर्जा के सेवन से मौत का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन कार्बोहाइड्रेट के रूप में 50-55 फीसदी ऊर्जा ग्रहण करने वालों को मौत का खतरा कम रहता है. शोध के सह-लेखक व बोस्टन स्थित हार्वर्ड टी. एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर वाल्टर विलेट ने कहा, 'इन नतीजों में एक साथ कई पहलू हैं, जो विवादास्पद रहे हैं. बहुत ज्यादा और बहुत कम कार्बोहाइड्रेट नुकसानदेह हो सकता है. लेकिन सबसे जो गौर करने वाली बात है वह वसा,  प्रोटीन  और कार्बोहाइड्रेट का प्रकार है'. लांसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध के तहत 45 से 64 साल की आयु वर्ग के 15,428 वयस्कों को शामिल किया गया. प्रतिभागियों में पुरुष 600-420 किलो कैलोरी ऊर्जा रोज ग्रहण करते थे. जबकि महिलाएं 500-3600 किलो कैलोरी ऊर्जा रोज ग...

आयोडीन की कमी बन सकती है बांझपन का कारण

नई दिल्ली:  महिलाओं में आयोडीन की कमी का अगर समय रहते उपचार न कराया जाए तो गर्भधारण करने में समस्या आना,  बांझपन , नवजात शिशु में तंत्रिका तंत्र से संबंधिक गड़बड़ियां होने का खतरा बढ़ जाता है. मानव शरीर में आयोडीन एक महत्वपूर्ण माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स है. जो थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है. आयोडीन डिफेशियंसी, आयोडीन तत्व की कमी है, यह हमारी डाइट का एक आवश्यक पोषण तत्व है. आयोडीन की कमी से हाइपो थायरॉइडिज्म हो जाता है. इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल के आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अरविन्द वैद बताते हैं, 'महिलाओं के शरीर में आयोडीन की कमी का उनके प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली से सीधा संबंध है. हाइपोथायरॉइडिज्म  बांझपन  और गर्भपात का सबसे प्रमुख कारण है. जब थायरॉइड ग्लैंड की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाती है, तो वह पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है. जिससे अंडाशयों से अंडों को रिलीज करने में बाधा आती है. जो बांझपन का कारण बन जाती है'. डॉ. अरविन्द के मुताबिक जो महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज्म का शिकार होती हैं. उनमें सेक्स में अरुचि, मासिक चक्र से संबंधित गड़बड़ियां और  गर्भधारण क...

भारत में हुआ अफगानी मरीज के दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज

नई दिल्ली:  दुर्लभ पैरासिटिक संक्रमण से पीड़ित एक अफगान मरीज भारत के नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल से अपना सफल इलाज कराने के बाद स्वस्थ होकर अपने देश लौट रहा है. जेपी हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अनुसार यह बहुत  दुर्लभ बीमारी  है. हॉस्पिटल के एक बयान में बताया गया है कि मरीज के शरीर में संक्रमण का असर मरीज के स्पाइन (रीढ़) और गर्दन पर हुआ था. जिसके कारण उनके शरीर के बायां हिस्सा अपंग हो गया था. इसके बाद न्यूरोसर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रोहन सिन्हा ने जेपी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जनों की टीम के साथ मिलकर सफलतापूर्वक जटिल 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं रीस्टोरेशन' सर्जरी पूरी की. अफगानिस्तान के 50 वर्षीय नागरिक आरिफ रेजाया को गर्दन में बहुत तेज दर्द था. उन्हें लगातार उल्टियां हो रही थीं. वे अपने दोनों हाथों में कमजोरी और चलने में परेशानी महसूस कर रहे थे. वे अफगानिस्तान और नई दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज के लिए गए लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. इसके बाद मई 2017 में वे नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल आए. जांच करने पर पता चला कि वे टेपवर्म (जीनस एकाइनोकोकस) के पैरासिटिक इन्फेक्श...

एक गोली और मिलेगा स्तन कैंसर से छुटकारा, नहीं लेनी होगी कीमोथेरेपी

नई दिल्ली:  भारत में  स्तन कैंसर  के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच एक नए अध्ययन ने स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं के बीच नई उम्मीद जगाई है. स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं को देश में अब तक कीमोथेरेपी देने की सिफारिश की जाती थी. लेकिन हाल ही में इजाद की गई हार्मोनल थेरेपी में दी जाने वाली एक गोली 'कैमॉक्सगन' स्तन कैंसर को जड़ से खत्म कर सकती है. दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सर्जीकल ऑन्कोलोजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रमेश सरीन के मुताबिक 'देश में धीरे-धीरे बढ़ने वाले स्तन कैंसर के 70 फीसदी मामले में से 35 फीसदी शुरुआती चरण में आते हैं. जबकि विदेशों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत है. इन 35 फीसदी महिलाओं के लिए एक नया परीक्षण शुरू किया गया है. अगर वे यह टेस्ट कराएं तो उन्हें कीमोथेरेपी की कतई जरूरत नहीं पड़ेगी'. डॉ. रमेश सरीन ने कहा, 'इस नए टेस्ट को हार्मोनल थेरेपी कहते हैं. जिसमें पॉजिटिव पाए जाने पर 'कैमॉक्सगन' नाम की एक गोली दी जाती है. जिससे 90 से 95 फीसदी लोग बिल्कुल ठीक हो जाते हैं. लेकिन यह टेस्ट करने के बाद पता लगता है कि यह  टयूमर  हार्मोन के संपर्क में आएग...

न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से 'बीमार' हो रहा देश, 75 प्रतिशत आबादी इसकी गिरफ्त में

नई दिल्ली:  देश में बहुत बड़ी आबादी न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम सिंड्रोम कीटाणु या संक्रमण द्वारा होने वाली  बीमारी  नहीं बल्कि जीवनशैली व आहार संबंधी आदतों के कारण होने वाली बीमारियों का एक संयोजन है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम से प्रभावित लोग मोटापा, उच्च रक्तचाप,  मधुमेह , दिल संबंधी रोग आदि गैर-संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित होते हैं. हैदराबाद के सनशाइन अस्पताल के बरिएट्रिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वेणुगोपाल पारीक ने कहा कि न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम पारंपरिक आहार और जीवनशैली में आए बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है. न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम के लिए पश्चिमी भोजन खासतौर पर जिम्मेदार है. ये सभी खाद्य पदार्थ वसा, नमक, चीनी, कार्बोहाइड्रेट और परिष्कृत स्टार्च मानव शरीर में जमा हो जाते हैं और मोटापे का कारण बनते हैं. मोटापे के कारण ही मधुमेह मेलिटस, उच्च रक्तचाप, कार्डियोवैस्कुलर रोग, स्तन कैंसर और डिस्प्लिडेमिया आदि बीमारियां होती हैं. भारत में करीब 70 फीसदी शहरी आबादी मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आती है.विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 20 फीसद...

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के 30 प्रतिशत बच्चे मोटापे की गिरफ्त में : सर्वेक्षण

नई दिल्ली:  दिल्ली के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 30 प्रतिशत बच्चे  मोटापे से ग्रस्त  हैं. 10 से 18 आयु वर्ग के लगभग 10 प्रतिशत बच्चों डायबिटीज जैसी बीमारी से पीड़ित हैं. एक सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है. सर्वेक्षण के मुताबिक जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं उनमें से कई प्री-डायाबेटिक और हाइपरटेंसिव या अतिसंवेदनशील स्थितियों से पीड़ित हैं. सर्वेक्षण के मुताबिक, 'शहर की कई स्कूल कैंटीनों में अस्वास्थ्यकर भोजन जैसे डीप फ्राई किए हुए स्नैक्स और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ सर्व किए जाते हैं. उनमें से ज्यादातर अपने छात्रों की खाने-पीने की आदतों से भी अनजान हैं'. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, 'बचपन का  मोटापा  आज की एक वास्तविकता है जिसमें दो सबसे प्रमुख कारक हैं- असंतुलित आहार और बैठे रहने वाली जीवनशैली. बच्चों समेत समाज के 30 प्रतिशत से अधिक लोगों में पेट का मोटापा है. अधिकांश बच्चे सप्ताह में कम से कम एक या दो बार बाहर खाते हैं. साथ ही भोजन करने के दौरान हाथ में एक न एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पकड़े रहते हैं'. डॉ. अग्रवाल ने कहा, '...

भारत की महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की गिरफ्त में, जानें बचाव के तरीके

नई दिल्ली:   पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम  (पीसीओएस) वाली महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म होने की अधिक संभावना हो सकती है. एक अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है. अध्ययन के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक महिला पीसीओएस से प्रभावित होती है. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा, 'लड़कियों और महिलाओं के बीच पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है. जिसके लिए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन, समय पर हस्तक्षेप और उचित उपचार की आवश्यकता होती है. सही समय पर निदान न होने पर पीसीओएस महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, चिंता और अवसाद, स्लीप एप्निया,  दिल का दौरा , मधुमेह और एंडोमेट्रियल, डिम्बग्रंथि व स्तन कैंसर के लिए कमजोर बना सकता है'. डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, 'आजकल, इस स्थिति के लिए एक अस्वास्थ्यकर आहार पैटर्न और बैठे रहने वाला जीवन प्रमुख जोखिम कारक बन गए हैं.  पीसीओएस  में इंसुलिन का स्तर भी सामान्य से अधिक स्तर तक बढ़ता है. जो वजन बढ़ने और अन्य मुद्दों का कारण बन सकता है'. डॉ. अ...

स्पाइना बिफिडा विकार के भारत में कई मामले, पोलियो जैसी अभियान की जरूरत

नई दिल्ली:  भारत में स्पाइना बिफिडा विकार का नाम शायद ही सुनने को मिलता हो, लेकिन इस विकार के मामले में भारत दुनिया के देशों से काफी आगे है. ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है. ऐसा कहना है विशेषज्ञों का. विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइना बिफिडा एक जन्मजात विकार है, जो बच्चों में गर्भवती महिलाओं में फॉलिक एसिड की कमी के कारण होता है. इस विकार पर काबू पाने के लिए समाज के साथ ही सरकार को भी ध्यान देने की जरूरत है. स्पाइना बिफिडा फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसबी (स्पाइना बिफिडा) ने जन्मजात समस्याओं की रोकथाम, जन्म से पूर्व एवं उसके बाद उपचार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर शनिवार को यहां 28वां अंतर्राष्ट्रीय सलाना कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्धाटन मुख्य अतिथि मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने किया. सम्मेलन में संस्था के संस्थापक, न्यासी डॉ. संतोष करमाकर, संस्था से संबद्ध चिकित्सक मार्गो व्हाइटफर्ड, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के उपायुक्त डॉ. अजय खेड़ा, टाबायोटिक्स लिमिटेड-गो फॉलिक अभियान के न...

हल्दी से हो सकता है आंखों की इस बीमारी का इलाज, शोध में हुआ खुलासा

नई दिल्ली:  भारतीय परिवारों में आम तौर पर मसाले के तौर पर इस्तेमाल होने वाली  हल्दी  का उपयोग आंख की ऑप्टिक नर्व को होने वाले नुकसान के इलाज में मददगार हो सकती है. इस नर्व के नुकसान से दृष्टि को नुकसान पहुंचने का खतरा होता है. इस शोध का प्रकाशन 'जर्नल साइंसटिफिक रिपोर्ट्स' में किया गया है. कुरकुमिन (हल्दी का बॉयोएक्टिव घटक) का इस्तेमाल आई ड्रॉप के तौर पर करने रेटिना कोशिकाओं के नुकसान को कम करता है. रेटिना की कोशिकाओं का नुकसान ग्लूकोमा का शुरुआती लक्षण है. ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के फ्रांसेस्का कॉडेरो ने कहा, 'कुरक्युमिन एक उत्तेजक यौगिक है जो कई तरह के आंख व दिमाग की स्थितियों में न्यूरोडिजेनेरशन की पहचान व इसके इलाज में मददगार है. इसमें ग्लूकोमा व अल्जाइमर रोग भी है. इसलिए इसके प्रबंधन से  आइड्रॉप  के तौर लाखों लोगों को मदद मिल सकती है'. चूंकि कुरक्यूमिन कम घुलनशील है और यह आसानी से घुल नहीं सकता, बल्कि रक्त में अवशोषित हो जाता है, इसलिए इसे मुंह से लिया जाना मुश्किल है. शोधकर्ताओं ने एक नैनोकैरियर विकसित किया है, जिसमें कुरक्युमिन होता है, जो मानव के इस्ते...