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विशेषज्ञ का दावा- देश में 3 लाख से अधिक किडनी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित

धर्मशाला:  रोग विशेषज्ञ और गुर्दा प्रत्यारोपण फिजीशियन राका कौशल ने रविवार को यहां कहा कि देशभर में तीन लाख से ज्यादा लोग किडनी से संबंधित बीमारियों सें पीड़ित हैं और इसके बावजूद मात्र 10,000 प्रत्यारोपण हो रहे हैं.  उन्होंने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण में सबसे बड़ी समस्या मरीज के परिवार में स्वस्थ और उपयुक्त किडनी दाता की उपलब्धता को लेकर है. किडनी विफलता के लगभग 30-40 फीसदी मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण सिर्फ इसलिए नहीं हो पाता है, क्योंकि परिवार में समान रक्त समूह का दाता नहीं मिल पाता. राका यहां 'कंटीन्यूड मेडिकल एजुकेशन' (सीएमई) में किडनी प्रत्यारोपण पर बोल रही थीं. इसका आयोजन आईवी हॉस्पिटल ने मोहाली में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), धर्मशाला के सहयोग से किया था. कौशल ने कहा कि एक समय था जब ऐसे किडनी प्रत्यारोपण को उच्च अस्वीकार्यता के कारण असंभव और उच्च जोखिम भरा माना जाता था, जिसके कारण प्रत्यारोपित अंग एंडीबॉडी द्वारा अस्वीकृत करने के बाद निष्क्रिय हो जाता है. किडनी प्रत्यारोपण सर्जन अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि 'एबीओ (ए, बी, एबी, ओ रक्त समूह) बेमेल किडनी प्रत्यारोपण...

समय पर दवा लेने की याद दिलाने वाली मोबाइल एप्प कारगर: अध्ययन

मेलबर्न:  स्मार्टफोन की एप्लिकेशन (एप्प) दिल के मरीजों के लिये जीवनदायी बन सकती है. एक नये अध्ययन में यह पता चला है कि मेडिकेशन रिमाइंडर एप्प मरीजों को समय पर दवा लेना याद दिला सकते हैं. अध्ययन ‘हार्ट’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें यह पता चलता है कि उच्च-गुणवत्ता वाले आधुनिक मेडिकेशन रिमाइंडर एप्प दिल से संबंधित बीमारियों के मरीजों में दवा समय पर लेने की प्रवृत्ति बढ़ाते हैं. मेडिकेशन एप्प यूं तो लंबे समय से ऑनलाइन उपलब्ध रहे हैं लेकिन यह पहली बार है जब अनुसंधानकर्ताओं ने दिल के मरीजों पर पड़ने वाले इनके प्रभाव का पता लगाया है, साथ ही यह भी जानने की कोशिश की है कि ये एप्प स्वास्थ्य और मानव व्यवहार के संदर्भ में काम करते हैं या नहीं. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि दिल के मरीजों में धमनी से संबंधित रोग वैश्विक तौर पर मौत का प्रमुख कारण होते हैं और करीब 40 प्रतिशत मरीज समय पर दवा लेने के आदी नहीं होते हैं इसलिए उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है.ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर जूली रेडफर्न ने बताया, ‘‘धमनी से संबंधित हृदय रोग के मरीज अधिक मात्रा में दवाएं...

कैंसर रोगियों के लिए खुशखबरी, वैज्ञानिकों ने इलाज के लिए निकाला ये तरीका

वॉशिंगटन:  वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृत्रिम मेधा तंत्र(एएल) विकसित किया है जो सीटी स्कैन में फेफड़े के कैंसर के धब्बों को सटीकता से पहचान लेते हैं जिन्हें कई बार रेडियोलॉजिस्टों को पहचानने में कठिनाई आती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एएल तंत्र 95 प्रतिशत तक सटीक है वहीं इंसान की आंखे 65 प्रतिशत तक ही इन मामलों में सटीक आकलन कर पाती हैं. अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ सेन्ट्रल फ्लोरिडा में कार्यरत रोडने लालोंडे ने कहा, ‘‘हमने अपना तंत्र विकसित करने के लिए मस्तिष्क को मॉडल के तौर पर इस्तेमाल किया’’ यह प्रक्रिया उस अल्गोरिदम के ही समान है जिसका इस्तेमाल चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर करता है. यह एक खास पैटर्न का मैच मिलाने के लिए हजारों चेहरों को स्कैन करता है. शोधकर्ताओं ने ट्यूमर की पहचान करने के लिए बनाए गए कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर को एक हजार से ज्यादा सीटी स्कैन दिखाए. कम्प्यूटर को दक्ष बनाने के लिए उन्होंने उसे सीटी स्कैन में नजर आने वाले ऊतकों, तंत्रिकाओं, तथा अन्य संरचनाओं को नजरअंदाज कर फेफड़े के ऊतकों का अध्ययन करना सिखाया.