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छत्तीसगढ़ः नक्सलियों ने लगाए चुनाव बहिष्कार के बैनर, लिखा 'भाजपा फासीवाद' का नारा

रायपुरः  छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार के बैनर लगाए हैं. बैनर के जरिए माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के वर्तमान  मुख्यमंत्री को रमन सिंह  और भाजपा को फासीवाद सरकार बताया है. वहीं इन बैनर्स के जरिए नक्सलियों ने आगामी विधानसभा चुनावों को फर्जी बताते हुए ग्रामीणों को भी चुनाव बहिष्कार की बात कही है. नक्सलियों ने बैनर लिखा है 'फर्जी  छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों का  बहिष्कार करो. वोट मांगने वाले नेताओं को कटघरे में करक जवाब मांगो. क्रांतिकारी जनता न तो सरकार का निर्माण करो और न ही उसे मजबूत करे. किसान विरोधी, कर्मचारी विरोधी भाजपा को मार भगाओ. गली-गली में शोर है रमन सिंह चोर है, नरेंद्र मोदी चोर है. पूर्व बस्तर डिविजन कमेटी भा.क.पा. (माओवादी).' दंतेवाड़ाः नक्सली हमले में बाल-बाल बचे पत्रकार धीरज, बोले- यह मेरा दूसरा जन्म है कोंडागांव के मटवाल की घटना बता दें छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में आए दिन  माओवादी ग्रामीणों पर  चुनाव बहिष्कार का दबाव बनाते रहते हैं और कई बार बात ना मानने पर ग्रामीणों के साथ मारपीट और उनकी हत्याओं की वारदात भी सामना आ चुकी है. बता दें हालिया ...

MP चुनाव 2018: 44 साल से गोविंदपुरा के किंग रहे हैं बीजेपी के बाबूलाल गौर

भोपाल:  मध्य प्रदेश की राजनीति में गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर हमेशा से लोगों का ध्यान रहा है. दरअसल, इस सीट की खासियत यह है कि यहां के मतदाता पिछले 44 साल से एक ही नेता बाबूलाल गौर को चुनकर विधानसभा में भेजते आ रहे हैं. यह सीट मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का गढ़ माना जाता है. हालांकि माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार उन्हें यहां से टिकट नहीं देगी. यानी उनका सक्रिय राजनीति से संन्यास हो जाएगा. गोविंदपुरा सीट पर 50 फीसदी से ज्यादा वोटर पिछड़ी जाति से हैं. मध्य प्रदेश की राजनीति में माना जाता है कि पिछड़ी जाति के लोग बीजेपी के पारंपरिक वोटर हैं. दिलचस्प बात यह है कि बाबूलाल गौर की उम्र के साथ ही इस सीट पर उनके जीत का अंतर बढ़ता चला गया. 2013 के चुनाव में बाबूलाल गौर ने कांग्रेस के गोविंद गोयल को 70 हजार वोटों के अंतर से हराया था. इससे पहले 2008 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की उम्मीदवार विभा पटेल को 33 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी. गोविंदपुरा की जनता भले ही बाबूलाल गौर पर हमेशा भरोसा करती रही है, लेकिन इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने उस हिसाब से यहां विकास नही...

MP: भाजपा मंत्री की CM शिवराज को लिखी चिट्ठी वायरल, कहा- 'मैं नहीं लड़ना चाहता चुनाव'

भोपालः  मध्य प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री सूर्य प्रकाश मीणा की टिकट वितरण से पहले सीएम  शिवराज को लिखी चिट्ठी  इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल, सूर्य प्रकाश मीणा की सीएम शिवराज को लिखी इस चिट्ठी में उन्होंने मुख्यमंत्री से चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की है. वहीं मीणा की लिखी यह चिट्ठी वायरल होते ही मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है. मुख्यमंत्री के नाम लिखे पत्र में सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते क्योंकि वह पार्टी में सामान्य तौर पर एक्टिव रहकर पार्टी संगठन को मजबूत करना चाहते हैं. MP चुनाव 2018: 44 साल से गोविंदपुरा के किंग रहे हैं बीजेपी के बाबूलाल गौर  टिकट कटने का अंदेशा बता दें  आगामी विधानसभा चुनाव से  पहले ही अंदेशा लगाया जा रहा था कि इस बार मीणा की टिकट कट सकती है. ऐसे में उनका खुद ही चुनाव लड़ने से मना करना रहस्य बना हुआ है. 2013 के  विधानसभा चुनाव में मीणा  मात्र 3 हजार वोटों के अंतर से जीते थे. पत्र में सूर्यप्रकाश मीणा ने पार्टी का धन्यवाद करते हुए कहा कि पार्टी ने मुझे दो बार मौका दिया. मैं विधायक बना, मंत्री बना और जिलाध्यक्ष भी बन...

MP: कंप्यूटर बाबा का संत समागम बना नोट समागम कार्यक्रम, खुलेआम बाटे गए लाखों रुपये

करण मिश्रा, इंदौरः  मध्य प्रदेश में राजनीति का मंच अब सिर्फ राजनेताओं तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि अब राजनीति में संत भी दखल देना शुरू कर चुके हैं.  मध्यप्रदेश में राज्यमंत्री  का दर्जा प्राप्त करने के बाद पद को त्यागने वाले कंप्यूटर बाबा ने  ग्वालियर के कोटेश्वर मंदिर  के पास एक वाटिका में ग्वालियर चंबल संभाग के सभी संतो के साथ संत समागम का कार्यक्रम आयोजित किया था, लेकिन यह कार्यक्रम अब चर्चाओं का विषय बन चुका है. क्योंकि इस कार्यक्रम में जहां दिन में संतों ने शिवराज सरकार पर लगातार बार करते हुए नर्मदा से लेकर अवैध खनन तक सभी मुद्दों को उजागर किया, वहीं देर रात होते ही यह पूरा समागम नोटों के समागम में तब्दील हो गया. मध्य प्रदेशः कम्प्यूटर बाबा के BJP विरोधी अभियान पर विनय सहस्त्रबुद्धे ने टिप्पणी से किया इंकार लिफाफे में बाटे गए रुपये जैसे-जैसे शाम ढलने लगी वैसे-वैसे लगातार संत जो कि संत समागम कार्यक्रम में सम्मिलित होने दूर दूर से आए थे सभी लोग सभी संतों को हाथ में एक लिफाफा देने लगे. इस सिलसिले में सभी संतो को कहीं 500, कहीं 1000 तो कहीं 2000 का लिफाफा दिया जाने लगा. कार्यक्रम में...

मध्य प्रदेश आज मना रहा अपना 63वां स्थापना दिवस, पीएम मोदी ने दिया खास संदेश

भोपालः  आज मध्य प्रदेश का 63 वां स्थापना दिवस है. 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया मध्य प्रदेश कभी मध्य भारत में आता था, लेकिन 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद देश की सभी रियासतों को  स्वतंत्र भारत में मिलाकर एकीकृत  किया गया. जिसके बाद 1 नवंबर 1956 को मध्य भारत पूरे देश में मध्य प्रदेश के तौर पर जाना जाने लगा. बता दें मध्य प्रदेश के गठन के बाद प्रदेश की राजधानी को लेकर देश के तमाम नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जबाहर लाल नेहरू को इंदौर, जबलपुर और  ग्वालियर के नाम  सुझाए, लेकिन इन सब के बीच नेहरू को भोपाल काफी पसंद था. जिसके चलते मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल चुना गया. पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं वहीं मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर पीएम मोदी सहित मध्य प्रदेश की  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल  और सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेशवासियों को मध्य प्रदेश की स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी हैं. पीएम मोदी ने प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए कहा कि 'भारत की हृदयस्थली यानि  मध्य प्रदेश ने हमेशा मातृभूमि के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है. पिछले 15 वर्षों में राज्य की उन्नति अभूतपूर्व रही ह...

व्यापमं घोटाले के आरोपी ने थामा कांग्रेस का दामन, फजीहत होने पर पार्टी ने किया किनारा

इंदौर:  28 नवंबर को होने जा रहे  विधानसभा चुनावों  से ऐन पहले एक बड़े सियासी पालाबदल के तहत मंगलवार को किरार समुदाय के वरिष्‍ठ नेता गुलाब सिंह किरार, बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी समेत कमलनाथ और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की उपस्थिति में किरार कांग्रेस में शामिल हुए. लेकिन इसके साथ ही सूबे के प्रमुख विपक्षी दल के लिये बेहद असहज स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि किरार व्यापमं घोटाले के आरोपियों में शामिल हैं. इस घोटाले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ बीजेपी पर तीखे हमले कर रहे हैं. लिहाजा बढ़ते विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने इन खबरों को खारिज किया है कि राहुल की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामने वाले बीजेपी नेताओं में किरार भी शामिल थे. ओझा ने कहा, "किरार को फिलहाल कांग्रेस में शामिल नहीं किया गया है." हालांकि प्रदेश कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल (आईएनसीएमपी) पर मंगलवार को बाकायदा फोटो के साथ ट्वीट करते हुए किरार के पार्टी में शामिल होने की जानका...

रायपुरः आपस में भिड़ीं स्कूल और सिटी बस, दो छात्राओं सहित तीन की मौत

रायपुरः  छत्तीसगढ़ के अटल नगर इलाके में  स्कूल की एक बस  और सिटी बस के बीच हुई आमने सामने की टक्कर में दो छात्राओं समेत तीन लोगों की मौत हो गई है.  रायपुर जिले के  पुलिस अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया कि अटल नगर के कयाबांधा चौक के करीब सिटी बस और केंद्रीय विद्यालय की बस के बीच हुई आमने सामने की टक्कर में पांचवी कक्षा की छात्रा रजनी कुर्रे और तीसरी कक्षा की छात्रा दुर्गेश्वरी धुर्वा तथा बस का परिचालक नरसिंह सोनी की मृत्यु हो गई है. MP: चित्रकूट रोड पर बस पलटने से हुआ हादसा, 2 की मौत, 15 लोग घायल अटल नगर के कायाबांध चौक की घटना पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अटल नगर के राखी गांव में स्थित केंद्रीय विद्यालय की बस छात्रों को लेकर माना गांव के लिए निकली थी. वहीं सिटी बस मंत्रालय से  रायपुर के लिए रवाना  हुई थी. दोनों बसें तेज गति से जा रही थीं. अधिकारियों ने बताया कि जब बसें कयाबांधा चौक के करीब पहुंचीं तब सिटी बस ने स्कूल की बस को टक्कर मार दी. इस घटना में स्कूल बस में सवार दो छात्राओं और बस कंडक्टर की मृत्यु हो गई है. हादसे में लगभग आठ छात्रों को चोट पहुंची है. आमने-सामने से भिड़ी...

Opinion: क्या खबरें पत्रकारों के खून से लिखी जाएंगी

नई दिल्लीः  अभी-अभी वह मर्मस्पर्षी वीडिया देखा जिसे दूरदर्शन के कैमरामैन मोर मुकुट शर्मा ने शूट किया. एक मिनट के वीडियो में गोलियां दागे जाने की आवाज आ रही है और मृत्यु को सामने देखकर वह कह रहे हैं- अब बचना मुश्किल है. उन्होंने यह वीडियो अपने अंतिम संदेश की तरह अपनी मां के लिए बनाया था. लेकिन ईश्वर का शुक्र है कि बुरी तरह घायल होने के बावजूद उनके प्राण बच गए. हालांकि उनके साथी अच्युतानंदन साहू की मौत हो गई. वे दंतेवाड़ा में नक्सली हमले का शिकार बने. वह रिपोर्टिंग पर गए थे. इससे पहले इसी महीने दूरदर्शन के एक अन्य रिपोर्टर राजेश राज भी जब चुनाव कवरेज पर गए थे, तब उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया. राजेश को गंभीर चोटें आई थीं. वह अस्पताल से तो छुट्टी पा गए हैं, लेकिन उनके सिर में लगी गंभीर चोटों से उबरने में उन्हें वक्त लगेगा. इन घटनाओं के राजनैतिक और पत्रकारीय पहलू पर चर्चा करनी ही होगी, लेकिन उसके पहले मानवीय पहलू पर बात करनी जरूरी है. जब कोई पत्रकार इस तरह के हादसे का शिकार होता है तो दूरदर्शन के साथी पत्रकार पहला सवाल यह करते हैं कि उनमें से ज्यादातर का बीमा नहीं है. एक पत्रकार ने तो यहा...