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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर बनेगी बायोपिक, विद्या बालन निभाएंगी किरदार

नई दिल्लीः  बॉलीवुड में आजकल बायोपिक का दौर चल रहा है. अब तक बॉलीवुड में बयोपिक फिल्म दर्शकों को देखने को मिल रहीं थी लेकिन ऑडियंस के बीच इंटरनेट के पॉपुलर होने के बाद अब बायोपिक की भी वेब सीरीज बनाया जा रहा है. हाल ही में सनी लियोन की बायोपिक वेब सीरीज 'करनजीत कौर द अनटोल्ड स्टोरी' रिलीज हुई है. अब इस कड़ी में जल्द ही दूसरा नाम भारत की आयरन लेडी इंदिरा गांधी का जुड़ने वाला है. फिल्मफेयर की एक खबर के मुताबिक, पत्रकार-लेखक सागरिका घोष की इंदिरा गांधीपर लिखी गई किताब 'इंदिरा: इंडियाज मोस्‍ट पॉवरफुल प्राइम मिनिस्‍टर' पर बायोपिक बनने जा रही है. इंदिरा गांधी की यह बायोपिक एक वेब सीरीज के तौर पर दर्शकों को परोसी जाएगी, जिसमें विद्या बालन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की किरदार निभाते हुए नजर आएंगी हालांकि कुछ महीने पहले भी इस फिल्म को लेकर खबरें आईं थी. लेकिन उस वक्त यह कंफर्म नहीं था कि इंदिरा गांधी की यह बायोपिक फिल्म होगी या वेब सीरीज. MediaCard--mediaForward cards-multimedia customisable-border" dir="ltr" data-scribe="c...

ऑपरेशन ब्लूस्टार: तारीख-दर-तारीख जानिए रणनीति को कैसे दिया गया अंजाम

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 34वीं बरसी 6 जून को थीं. इसके मद्देनजर स्वर्ण मंदिर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. ऑपरेशन ब्लू स्टार अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से अलगाववादियों को खाली कराने का अभियान था, जो बीते 3 वर्षों से वहां डेरा जमाए बैठै थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर सेना का यह ऑपरेशन मुख्य तौर पर 3 से 8 जून 1984 तक चला. हालांकि, इस अभियान की रणनीति पर काफी पहले से काम शुरू हो चुका था. तारीख-दर-तारीख जानिए ऑपरेशन ब्लू स्टार 1981: अमृतसर में सिखों के सबसे पवित्र गुरुद्वारे स्वर्ण मंदिर के पास अपने हथियारबंद साथियों के घेरे में भिंडरावाले छिपा बैठा था. 1981: पंजाब और असम में आतंकवादियों का मुकाबला करने की गुप्त गतिविधियों के लिए स्पेशल ग्रुप या एसजी नाम से एक और यूनिट तैयार की गई. 1982: डायरेक्टरेट जनरल सिक्योरिटी ने प्रोजेक्ट सनरे शुरू किया. उसने सेना की 10वीं पैरा/स्पेशल फोर्सेज के एक कर्नल को 50 अधिकारियों और सैनिकों की एक टुकड़ी गठित करने का काम सौंपा, जिसमें सभी भारतीय थे. इस तरह कमांडो कंपनी 55, 56 और 57 तैयार हुई. इस यूनिट को स्पेशल ग्रुप नाम दिया गया और यह ...

विरोध की हर आवाज दबाकर बोली थीं इंदिरा- एक कुत्ता तक नहीं भौंका

आज से 43 साल पहले 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव लड़ने पर 6 साल की रोक लगा दी गई. उन्हें संसदीय कार्यवाही से दूर रहने का आदेश दिया गया. जिसके बाद इंदिरा पर इस्तीफा देने का दबाव बना. लेकिन इससे उलट उन्होंने 25-26 जून की रात तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर से देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई. इंदिरा गांधी के उस फैसले के साथ ही विरोध के स्वर दबाए जाने लगे. फैसले की मुखालफत करने वाले नेताओं को जेल में डाला जाने लगा. यहां तक कि मीडिया को भी खामोश कर दिया गया. आपातकाल लागू होने के साथ ही इंदिरा गांधी को असीमित अधिकार मिल गए. उन्हें लोकसभा या विधानसभा के लिए चुनाव की जरूरत नहीं थी. सरकार कोई भी कानून पास करा सकती थी. यानी सबकुछ इंदिरा गांधी के इशारे पर तय होने लगा. दमन और लोकतंत्र पर आघात का यह सिलसिला 21 महीने तक चला. दमनकारी कानून मीसा और डीआईआर के तहत देश में एक लाख से ज्यादा लोगों को जेल में डाल दिया गया. सभी बड़े विरोधी नेताओं को भी जेल की हवा खानी पड़ी. एक तरफ इंदिरा गांधी ने राजनीतिक वि...