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देश में 35 साल तक इमरजेंसी लागू रखना चाहते थे संजय गांधी, इंदिरा ने करा दिए चुनाव

25 जून 1975 की आधी रात को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की तो चारों तरफ हड़कंप मच गया. आपातकाल के फैसले को भारतीय राजनीति के इतिहास का सबसे काला दिन बताया गया, ये करीब 2 साल तक रहा. हालांकि, उस दौरान संजय गांधी की चलती तो करीब 35 साल तक देश में इमरजेंसी ही रहती. कहा जाता है कि इमरजेंसी लागू करने के फैसले में संजय गांधी का बड़ा प्रभाव था, उस दौरान भी जिस तरह से देश में फैसले लागू किए जा रहे थे वह पूरी तरह से संजय के ही नियंत्रण में थे. वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर के मुताबिक, इमरजेंसी के बाद जब उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई तो उन्होंने इसपर उनसे बात की. तभी संजय गांधी ने उन्हें बताया था कि वह देश में कम से कम 35 साल तक आपातकाल को लागू रखना चाहते थे, लेकिन मां ने चुनाव करवा दिए. इसे भी पढ़ें... आपातकाल का सबसे दमनकारी फैसला, 60 लाख लोगों की करा दी गई नसबंदी इंदिरा ने भंग की थी लोकसभा आपातकाल लागू करने के लगभग 2 साल बाद विरोध की लहर तेज़ होती देख प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा भंग कर चुनाव कराने की सिफारिश कर दी थी. चुनाव में आपातकाल लागू करने ...

कांग्रेस की सबसे 'कमजोर नस' को आज दबाएगी बीजेपी, देशभर में करेगी विरोध-प्रदर्शन

नई दिल्ली:  मौजूदा वक्त में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी बड़े नेता बीजेपी की मौजूदा सरकार पर प्रेस पर पाबंदी आजादी लगाने का आरोप लगा रहे हैं. अगले साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है. वहीं इस मोर्चे पर कांग्रेस को चित करने के लिए बीजेपी सोमवार (25 जून) को देशभर इंदिरा गांधी के दौर में देश पर लगे सबसे बड़े घाव इमरजेंसी को कुरेदेगी. दरअसल, साल 1975 की 25-26 जून की रात को  आपातकाल  लगाया गया था. 43 साल बाद बीजेपी पूरे देश में आपातकाल विरोधी दिवस मना रही है. मीसा कानून के प्रभावितों को अभिनंदन करेंगे शाह बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी की गुजरात इकाई के दो दिवसीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. वे यहीं लोगों को आपातकाल के दिनों की याद दिलाएंगे. पार्टी ने यहां एक बयान जारी कर बताया कि वह एक कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे जहां आपातकाल में मीसा कानून से प्रभावित हुए लोगों का अभिनंदन किया जाएगा. आपातकाल के दौरान इस कुख्यात कानून का राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ...