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पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा जलाई गई पराली : EPCA प्रमुख

ईपीसीए के प्रमुख भूरे लाल ने  इस बात पर भी जोर दिया कि लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है ताकि वे पराली जलाने के चलन के विकल्प तलाश करें. नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त ईपीसीए के प्रमुख भूरे लाल ने शुक्रवार को कहा कि सख्ती के बावजूद इस साल पड़ोसी राज्यों में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाए जाने की ज्यादा घटनाएं दर्ज की गईं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है ताकि वे पराली जलाने के चलन के विकल्प तलाश करें. पीएचडी चैंबर द्वारा ‘आर्थिक एवं पर्यावरणीय स्थिरता के लिए फसल अवशेषों के थोक उपयोग’ पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि धान की पुआल उर्वरकों का एक बहुत अच्छा स्रोत हो सकती है. इसका सबसे अच्छा उपयोग इसे मिट्टी के साथ मिला देना है. दिल्ली में पिछले बृहस्पतिवार वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो गई थी दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार बड़े कारणों में से एक पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना है. राष्ट्रीय राजधानी में पिछले बृहस्पतिवार वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो गई थी जब पटाखों के कारण शहर में धुंध की मोटी चादर छा ग...

'दिल्ली में सांस लेना 15 से 20 सिगरेट पीने के बराबर'

मेडिकल रिसर्च में पाया गया कि यहां हर शख्स के सेहत को एक दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंच रहा है. नई दिल्ली:  राष्ट्रीय राजधानी के डॉक्टरों ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में खराब  वायु प्रदूषण  का सेहत पर असर एक दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर है. वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को प्रदर्शित करने के लिए, शनिवार को शहर के एक अस्पताल में मानव फेफड़ों के प्रतिरूप को रखा है. लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक न्यासी, सर गंगा राम अस्पताल में सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार ने कहा, ‘‘ मैंने बीते 30 साल में लोगों के फेफड़ों के रंग को बदलते हुए देखा है. पहले, सिगरेट पीने वालों के फेफड़ों पर काली रंग की परत होती थी जबकि अन्य के फेफड़ों का रंग गुलाबी होता था. उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन आजकल, मुझे सिर्फ काले फेफड़े ही दिखाई देते हैं. यहां तक कि किशोरों के फेफड़ों तक पर काले निशान होते हैं. यह डरावना है. इस अनूठे प्रतिरूप से हमें उम्मीद है हम लोगों को यह दिखा सकते हैं कि उनके फेफड़ों में क्या हो रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ लोगों की सेहत पर खराब हवा के प्रभाव की तुलना एक दिन म...

प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा और कैंसर का खतरा, जहरीली हवा से बचने के उपाय

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. ऐसे में आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. यदि आप इस समय जहरीली हवा से बचें तो अस्थमा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को अपने शरीर में प्रवेश करने से रोक सकते हैं. नई दिल्ली :  दिल्ली में बढ़ते  वायु प्रदूषण  से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. ऐसे में आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. यदि आप इस समय  जहरीली हवा  से बचें तो अस्थमा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को अपने शरीर में प्रवेश करने से रोक सकते हैं. दिल्ली-एनसीआर की हवा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड से अस्थमा और चेस्ट इंफेक्शन के मरीजों को अपनी चपेट लेने के साथ ही स्वस्थ लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है. चिकित्सकों के पास ऐसे लोगों की संख्या बढ रही है जिन्हें  प्रदूषण  से पहले कोई शिकायत नहीं थी. इन लोगों को पिछले कुछ समय से बलगम की शिकायत के साथ ही बुखार अपनी चपेट में ले रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि  हवा में प्रदूषण  का स्तर बढ़ने से एनओ-टू पार्लिटकल्स खाने की नली के रास्ते शरीर में प्रवेश कर जात...

दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो गई कि सांस लेना हुआ मुश्किल

CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को पीएम 2.5 का स्तर 299 रहा.     नई दिल्ली:  मौसम की प्रतिकूल स्थितियों और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के कारण दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘‘बेहद गंभीर’’ श्रेणी में बनी हुई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 423 दर्ज किया गया. शनिवार की सुबह दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘‘बहुत खराब’’ दर्ज की गई थी, लेकिन शाम को यह फिर से ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में चली गई थी. सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक , रविवार को पीएम 2.5 (हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम के व्यास के प्रदूषक कण) का स्तर 299 जबकि पीएम10 (हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर से कम के व्यास के प्रदूषक कण) का स्तर 477 दर्ज किया गया. दिल्ली में 28 इलाके ‘‘बेहद गंभीर’’ श्रेणी में रहे जबकि सात इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘‘बहुत खराब’’ दर्ज की गई. वायु गुणवत्ता सूचकांक पर शून्य से 50 अंक तक हवा की गुणवत्ता को अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक सामान्य, 201 से 300 के स्तर को खराब, 301 से 400 के स्...

प्रदूषण से केवल हेल्‍थ नहीं बल्कि आपकी मैथ्‍स भी हो सकती है कमजोर!

बीजिंग:  लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से संज्ञानात्‍मक संबंधी कौशल पर असर पड़ता है जिससे मौखिक और गणित परीक्षा के अंकों में कमी आ सकती है. चीन में किए गए एक शोध में आगाह किया गया है कि सामाजिक कल्याण पर प्रदूषण का अप्रत्यक्ष तौर पर असर सोच से कहीं ज्यादा हो सकता है. यह शोध पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित हुआ है. अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान में वरिष्ठ शोधार्थी शिओबो झांग ने कहा, ‘‘चीन के शहरों के मुकाबले भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति ज्यादा गंभीर है इसलिए मुझे आशंका है कि भारत में इसका असर बेहद बुरा होगा.’’ झांग ने कहा, ‘‘लंबे समय तक प्रदूषित वायु में सांस लेने से मौखिक और गणित परीक्षाओं में ज्ञानात्मक प्रदर्शन में बाधा उत्पन्न होती है.’’ चीन में पेकिंग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर झांग ने कहा, ‘‘वायु प्रदूषण से संज्ञानात्मक कौशल को होने वाले नुकसान से मानवीय क्षमता के विकास में भी बाधा पैदा होने की आशंका होती है.’’

घर के अंदर भी है सांस पर 'खतरा', हर साल जाती है 13 लाख जानें

नई दिल्ली:  घर के अंदर का  वायु प्रदूषण  दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है, जो भारत में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है. यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है. भारत जैसे देश में, जहां घर के अंदर खाना पकाने से लेकर हानिकारक रसायनों और अन्य सामग्रियों के कारण मकान के अंदर की हवा की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. यह बाहरी वायु प्रदूषण की तुलना में 10 गुना अधिक नुकसान कर सकती है. खराब वेंटिलेशन से फेफड़ों के कामकाज में कठिनाई सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. स्थिति इस नाते और खराब हो रही है, क्योंकि भारत में घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर कोई पुख्ता नीति नहीं है, जिस कारण इसके वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहते हैं, 'लोग अपने जीवन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मकानों के अंदर बिताते हैं. 50 प्रतिशत से अधिक कामकाजी वयस्क कार्यालयों या समान गैर-औद्योगिक वातावरण में काम करते हैं. यह बड़े पैमाने पर  प्रदूषण के कारण  इमारत से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है'. उन्होंने कहा कि कुछ अन्य कारकों में विषैले रस...