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जिंदगी : ऐसा एक दोस्‍त तो होना ही चाहिए…

दोस्‍त की पहचान कैसे होती है. जिंदगी की दौड़ को हम इतनी तंग गली में ले आए हैं कि अक्‍सर हमें लगता है कि एक साथ दो लोग इस गली में चल ही नहीं सकते, जबकि ऐसा नहीं है. अगर आप भीतर से उदार, विश्‍वासी हैं तो किसी भी संकरी गली से कितने ही लोगों के साथ निकल सकते हैं. दोस्‍ती पर इतने किस्‍से, अफ़साने हैं कि किसी एक को अपनी बात के लिए चुनना मुश्किल है, लेकिन कुछ दिन पहले मुझे श्री रावी का बेहतरीन लघुकथा संग्रह मिला. इसमें एक से बढ़कर एक लघुकथाएं हैं. इन्‍हीं में से एक लघुकथा आपसे साझा कर रहा हूं. मैं यहां पूरी लघुकथा जोकि असल में एक छोटी क‍हानी जितनी लंबी है, उसका सारांश पेश कर रहा हूं. एक गुरुकुल से तीन ग्रेजुएट निकले, जिसमें एक युवती और दो युवक थे. तीनों में गहरी मित्रता थी. कथा उस समय की है, जब लड़के और लड़कियों की मित्रता समाज में स्‍वीकार नहीं थी. तीनों में कमाल की बात यह रही है कि सभी ने विवाह नहीं करने का फैसला किया. एक युवक शिक्षक बन गया, दूसरा व्‍यापारी और युवती ने कला की राह चुनी. सबकुछ ठीक चल रहा था, तभी नगर में अफवाह उड़ी की युवती को किसी से प्रेम हो गया है. उन दिनों इसे किसी अपराध...