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कुछ ही मिनट में पता चल जाएगा कि दवाई असली है या नकली, वैज्ञानिकों ने खोजा ये तरीका

वॉशिंगटन:  वैज्ञानिकों ने एंटीबायोटिक दवाओं की प्रमाणिकता की जांच के लिए पेपर पर आधारित एक ऐसी जांच प्रणाली विकसित की है जिससे कुछ ही मिनट में पता चल जाएगा कि दवाई असली है या नकली . दवाई नकली होने पर यह कागज खास तरह के लाल रंग में तब्दील हो जाता है. विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर घटिया दवाओं का उत्पादक और वितरण होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनियाभर में लगभग 10 फीसदी दवाइयां फर्जी हो सकती हैं और उनमें से 50 फीसदी एंटीबायोटिक के रूप में होती हैं. नकली एंटीबायोटिक दवाइयों से न केवल मरीज की जान को खतरा पैदा होता है बल्कि दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध की बड़े पैमाने पर समस्या भी पैदा होती है. अनुसंधानकर्ताओं ने कागज आधारित जांच का विकास किया है जो तेजी से इस बात का पता चल सकता है कि दवाई असली है या नहीं या क्या उसमें बेकिंग सोडा जैसी चीजें मिलाई गई हैं. एंटीबायोटिक्स क्या है? एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टिरियल भी कहा जाता है. बैक्टेरियल इंफैक्शन्स से लड़ने के लिए यह बहुत ही शक्तिशाली दवा है. यह अगर उचित तरीके लिया जाय को आपके जीवन को बचा सकता है. लेकि...

विश्व रक्तदान दिवस: आपका खून किसी की सांसों को थमने से रोक सकता है

ई दिल्ली:  आकाश पाताल सब नाप चुका इनसान आज तक खून का एक कतरा नहीं बना पाया. इनसान को खून की जरूरत हो तो उसे दूसरा इनसान ही दे सकता है और किसी दूसरे की जान बचाने के लिए अपना खून देने वाले को ईश्वर के बराबर दाता का दर्जा दिया जाता है.  रक्तदान   तब होता है, जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रक्त देता है, जिसे जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे व्यक्ति को दिया जा सकता है या उसे दवाएं बनाने के काम में लाया जाता है.  विकसित देशों में जहां अधिकांश रक्तदाता स्वैच्छिक होते हैं भारत सहित विभिन्न विकासशील देशों में लोग धन लेकर भी रक्तदान करते हैं. वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली  कुछ लोग भविष्य में अपने या अपने परिवार के लिए किसी तरह की जरूरत पड़ने को ध्यान में रखते हुए रक्तदान करते हैं. वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली और विश्व के सभी देशों में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया.  लोगों को रक्तदान की मुहिम में शामिल करने के लिए वर्ष 2004 से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस के तौर पर मनाने क...