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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुतारेस ने श्रीलंका की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई

उन्होंने श्रीलंका में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने और कानून के अनुसार विवाद हल करने के महत्व पर जोर दिया. संयुक्त राष्ट्र :   संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस  ने  श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना  द्वारा देश की संसद भंग करने के फैसले पर चिंता जताई है. उन्होंने श्रीलंका में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने और कानून के अनुसार विवाद हल करने के महत्व पर जोर दिया. श्रीलंका का राजनीतिक संकट शुक्रवार को उस वक्त और बढ़ गया जब राष्ट्रपति सिरिसेना ने संसद को भंग कर दिया और पांच जनवरी को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी क्योंकि यह लगने लगा था कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलेगा. महासचिव गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने शनिवार को यहां जारी एक बयान में बताया कि महासचिव ने सिरिसेना के श्रीलंका की संसद को भंग करने और समय से पहले ही संसदीय चुनाव कराने के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की है. गुतारेस ने श्रीलंका में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं एवं संस्थानों का सम्मान करने और कानून के मुताबिक समस्याओं को हल करने के महत्व को रेखांकित क...

तमाम यातनाएं सहकर बनीं संयुक्त राष्ट्र की नई मानवाधिकार प्रमुख

सेंटियागो:  चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैशेलेट जब 23 साल की थीं तो उन्हें और उनके परिवार को यातनाओं का सामना करना पड़ा और निर्वासन में भी रहना पड़ा. अब चार दशक से अधिक समय बाद वह संयुक्त राष्ट्र की नयी मानवाधिकार प्रमुख के तौर पर कामकाज संभालेंगी. 66 वर्षीय बैशेलेट को अक्सर उनके भाषणों के दौरान मुस्कराते, आसानी से बातचीत करते या हल्की फुल्की मजाकिया टिप्पणी करते हुए देखा जा सकता है. लेकिन उनके इस अच्छे हास्यबोध के पीछे उस क्रूर तानाशाह शासन की हृदय विदारक यादें हैं, जिसने उनके परिवार को अलग-थलग कर दिया. बैशेलेट के पिता जनरल अलबर्टो बैशेलेट वायु सेना अधिकारी थे. 1974 में जेल में कुछ महीने तक यातनाएं झेलने के बाद उन्होंने जान गंवा दी. जनरल अगस्तो पिनोशेट की सेना ने उन्हें 1973 के सैन्य तख्तापलट का विरोध करने के लिए देशद्रोही करार दिया था. उस तख्तापलट में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंडे को पद छोड़ना पड़ा था. बैशेलेट को भी 1975 में उनकी मां के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था. वह सोशलिस्ट पार्टी की युवा सदस्य थीं और गुप्त जेल में उन्होंने जो वक्त काटा है, वो ऐसी अग्निपरीक्षा की तरह गुजरा कि वह उ...

सुरक्षा परिषद सुधार प्रक्रिया में नई जान डालने पर होगा जोर : UNGA अध्यक्ष

नई दिल्ली:  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों को एक ‘‘बड़ी चुनौती’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (यू एन जी ए) की नवनिर्वाचित अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा गार्सेस ने आज कहा कि वह अपने कार्यकाल के दौरान ‘‘विभाजक’’ मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाने के लिए वार्ता पर जोर देंगी और प्रक्रिया में नयी जान डालेंगी. गार्सेस ने कहा कि पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात के दौरान जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और विकासशील देशों के बीच सहयोग जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा चर्चा के लिए आया. यहां इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स में आयोजित एक कार्यक्रम में गार्सेस ने सुरक्षा परिषद सुधार की प्रक्रिया के काफी समय से लंबित होने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह एक लंबित मामला है-बहुत ही विवादास्पद, बहुत ही विभाजक. मेरी भूमिका सदस्य देशों को ध्यान से सुनने की होने जा रही है .  सुरक्षा परिषद सुधार बहुत ही जटिल प्रक्रिया है, और मैं सवर्सम्मति बनाने तथा इसमें नयी जान डालने के लिए पूरा प्रयास...