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श्री हनुमान जी की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्री हनुमानजी की आरती आरति कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपै । रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।। अंजनी पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रेम सदा सहाई ।। दे बीरा रघुनाथ पठाये । लंका जारि सिया सुधि लाये ।। लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई।। लंका जारि असुर संहारे। सिया रामजी के काज संवारे ।। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे । आनि सजीवन प्रान उबारे ।। पैठि पताल तोरि ज...

रोज नहीं कर सकते हनुमान बाहुक का पाठ तो सिर्फ मंगलवार को करें, मिल सकते हैं 4 फायदे

हनुमान बाहुक का पाठ करने से किसी की भी इच्छा पूरी हो सकती है और उस पर हनुमानजी की कृपा भी हमेशा बनी रहती है। रिलिजन डेस्क।  हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों, स्तुतियों और आरती आदि की रचना की गई है। उन्हीं में से एक है हनुमान बाहुक। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, हनुमान बाहुक का पाठ रोज विधि-विधान से किया जाए तो किसी की भी इच्छा पूरी हो सकती है और उस पर हनुमानजी की कृपा भी हमेशा बनी रहती है। जानिए कैसे करें हनुमान बाहुक का पाठ और उससे आपको क्या लाभ हो सकते हैं... इस विधि से करें हनुमान बाहुक का पाठ... 1.  रोज सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनकर एक लाल कपड़े पर हनुमान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 2.  हनुमानजी को अबीर, गुलाल आदि चढ़ाएं और लाल फूल अर्पित करें। गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं तो पाठ के अंत तक जलता रहे। 3.  घर में बने शुद्ध घी के चूरमे का भोग लगाएं। अगर संभव न हो तो गुड़-चने का भोग भी लगा सकते हैं। 4.  इसके बाद हनुमान बाहुक का पाठ करना शुरू करें। पाठ समाप्त होने पर हनुमानजी के कष्टों का निवारण करने के लिए प्रार्थना करें। 5.  अगर रोज पा...