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हाशिमपुरा नरसंहार पर दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनाएगा अहम फैसला

नई दिल्ली:  दिल्ली उच्च न्यायालय 1987 के हाशिमपुरा मामले में 16 पुलिसकर्मियों को हत्या और अन्य अपराधों के आरोपों से बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार (31 अक्टूबर) को फैसला सुनाएगा. घटना में 42 लोगों की मौत हो गई थी. उत्तर प्रदेश राज्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और नरसंहार में बचे जुल्फिकार नासिर सहित कुछ निजी पक्षों की अपीलों पर उच्च न्यायालय ने छह सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री पी चिदंबरम की कथित भूमिका का पता लगाने के लिए आगे जांच की मांग को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी की याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. अदालत ने 17 फरवरी 2016 को स्वामी की याचिका को मामले में अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया था. निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए मेरठ में 42 लोगों की हत्या के आरोपी 16 प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी कर्मियों को बरी कर दिया था. आपको बता दें कि 21 मार्च 2015 को निचली अदालत ने संदेश का लाभ देते हुए प्रोविजनल आ‌र्म्ड कांस्टेबलरी (पीएसी) के 16 पुलिसकर्मियों को 42 लोगों की हत्या के मामले ...

एक ही कलम के उपयोग संबंधी चुनाव नियम को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

नई दिल्ली :   दिल्ली उच्च न्यायालय  में एक याचिका दायर कर उन चुनाव नियमों को चुनौती दी गई है, जिसके तहत चुनाव आयोग द्वारा दिए गए एक उपकरण (कलम) का इस्तेमाल मतदान के क्रम में मतपत्रों को चिह्नित करने के लिए किया जाता है. याचिका में दलील दी गई है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा सकता है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आज (मंगलवार) इस याचिका के आने की संभावना है. वरिष्‍ठ वकील अमित साहनी द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग मतपत्रों को चिह्नित करने के लिए मतदाताओं को एक आम उपकरण (कलम) प्रदान करता है, जिसे आसानी से बदला जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि मतदान करने वाले व्यक्ति के इरादे पर जोर दिया जाना चाहिए, न कि कलम की स्याही पर, जिसे किसी भी उम्मीदवार के आदेश पर बदला जा सकता है.

मिर्चपुर दलित कांड में दिल्‍ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई

नई दिल्‍ली :  दिल्‍ली हाईकोर्ट  ने साल 2010 में हरियाणा में हुए मिर्चपुर में दलितों पर हुए हमले और दो दर्जन से ज़्यादा दलितों के घर को जलाने के आरोप में 3 लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. इसके अलावा हाइकोर्ट ने 30 अन्‍य को एससी/एसटी एक्ट, लूटपाट, दंगा फैलाने के आरोप में 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सज़ा सुनाई है. इससे पहले दिल्ली की निचली अदालत ने 3 लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 के मिर्चपुर मामले के दोषियों द्वारा उनकी सजा के खिलाफ की गयी अपील खारिज कर दी. उच्च न्यायालय ने कहा कि स्वतंत्रता के 71 साल बाद भी अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में कमी के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. ANI  ✔ @ANI 2010 Mirchpur (Haryana) case: Delhi High Court says, "Jaat community deliberately attacked the people of Valmiki community." Court also convicted people of Jaat community who were earlier acquitted by the trial court. Delhi High Court dismisses appeals of the accused. 10:55 AM - Aug 24, 2018 हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी मे...

केजरीवाल सरकार पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, पूछा-एलजी हाउस में किसकी मंजूरी से धरने पर बैठे?

नई दिल्ली :  दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. हाइकोर्ट ने इस मामले में अब मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल और उनकी सरकार से पूछा है कि वह बताएं कि उपराज्यपाल के घर पर वह किसकी इजाजत से धरने पर बैठे. अफसरों की कथित हड़ताल के मामले को लेकर अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री एलजी हाउस में पिछले 8 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं. इस मामले में दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक विजेंदर गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा, ये धरना किसकी अनुमति से हो रहा है. क्या इसकी मंजूरी कैबिनेट की बैठक में ली गई. अगर ये धरना है तो ये एलजी हाउस में नहीं हाेना चाहिए. इस मामले में अगली सुनवाई 22 जून को होगी. इससे पहले हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा, इसे आप धरना नहीं कह सकते . आप इस तरह से किसी के ऑफिस या घर में जाकर धरने पर नहीं बैठ सकते. इस मामले में दिल्ली सरकार के वकील ने कहा, आईएएस अफसर कल ये स्वीकार कर चुके हैं, कि वह...