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डियर जिंदगी : दीपावली की तीन कहानियां और बच्‍चे…

   बच्‍चे कैसे सीखते हैं. इसके बारे में हम अक्‍सर बातें करते रहते हैं. हमें लगता है कि वह न जाने किस ‘ग्रह’ से चीजें सीखकर आते हैं. कैसे, कहां से वह ऐसी बातें करने लगते हैं, जिनकी हम उनसे अपेक्षा, उम्‍मीद भी नहीं करते. यह दीपावली बच्‍चों की परवरिश के लिहाज से काफी कुछ सिखाने वाली रही. इस दिवाली हमने अपने ही अलग-अलग चेहरे देखे. हम एक को समझते, उससे पहले दूसरे में उतर गए, उसके बाद यह सिलसिला चलता रहा. हमने जीवन में धर्म, राजनीति का इतना अधिक घालमेल कर दिया कि अब यह हमारे लिए भष्‍मासुर की तरह हो गया है. हम बच्‍चों को वैज्ञानिक सोच, चिंतन देने की जगह रोबोटिक, जैसा कहा जा रहा है\जैसा बताया गया वैसा करने की तरफ धकेल रहे हैं. इस दिवाली से तीन कहानियां मिलीं... पहली कहानी: टीवी, अखबार सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लदे पड़े थे. बच्‍चे भी यह सब देख रहे थे कि कैसे बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रीन पटाखे की बात, पटाखों की पाबंदी की बात हो रही थी. ऐसे में इंदिरापुरम के शर्मा परिवार ने जब यह निर्णय लिया कि उन्‍हें पटाखों से दूर रहना है, तो उनने दस, पंद्रह बरस के बच्‍चों को प्‍यार से बात समझाने की कोशिश की. बच्‍...

डियर जिंदगी: जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे.

विनोद कुमार शुक्‍ल बहुत पसंद हैं. उनके यहां शब्‍द बारिश में धुले, जाड़ों की गुनगुनी धूप में सिके मिलते हैं. 'डियर जिंदगी' के लिए लाइब्रेरी में कुछ तलाशते हुए उनकी कविता मिल गई. 'जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे.' हम आपस में कितनी बातें करते हैं. हम उनके यहां नहीं जाएंगे. वह तो कभी हमारे घर आते नहीं. हम ही क्‍यों जाएं. हम नहीं जाएंगे, बार-बार. बचपन से लेकर बडे़ होने तक ऐसी बातों से हम गुजरते ही रहते हैं. अच्‍छे भले संबंध कई बार मोड़ से टकरा कर बिखर जाते हैं. जबकि उनमें कोई भंवर नहीं होते. वह तो ऐसे ही चलते रहते हैं. कोई आता रहता है, तो दूसरे को भूल ही जाता है कि उसके यहां भी चलें. उन शहरों में जहां फ्लैट नहीं होते थे, जहां गप्‍प के लिए हरे-भरे मैदान, खुला गलियारा होता था. वहां ऐसे संकट कहां होते थे. घुमावदार मोड़ तो तब आने शुरू हुए जब हम उन इमारतों की ओर चले गए, जहां रहने वालों को देखने के लिए गर्दन ऊंची करनी होती थी. जहां हर कोई अपने मकान नंबर को अपनी दुनिया समझने लगा. वहां से यह सब शुरू हुआ, जो हमारे घर नहीं आता, हम उसके घर नहीं जाएंगे.   इसे ऐसे भी समझना चाहिए कि हम सबसे अपन...