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समय पर दवा लेने की याद दिलाने वाली मोबाइल एप्प कारगर: अध्ययन

मेलबर्न:  स्मार्टफोन की एप्लिकेशन (एप्प) दिल के मरीजों के लिये जीवनदायी बन सकती है. एक नये अध्ययन में यह पता चला है कि मेडिकेशन रिमाइंडर एप्प मरीजों को समय पर दवा लेना याद दिला सकते हैं. अध्ययन ‘हार्ट’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें यह पता चलता है कि उच्च-गुणवत्ता वाले आधुनिक मेडिकेशन रिमाइंडर एप्प दिल से संबंधित बीमारियों के मरीजों में दवा समय पर लेने की प्रवृत्ति बढ़ाते हैं. मेडिकेशन एप्प यूं तो लंबे समय से ऑनलाइन उपलब्ध रहे हैं लेकिन यह पहली बार है जब अनुसंधानकर्ताओं ने दिल के मरीजों पर पड़ने वाले इनके प्रभाव का पता लगाया है, साथ ही यह भी जानने की कोशिश की है कि ये एप्प स्वास्थ्य और मानव व्यवहार के संदर्भ में काम करते हैं या नहीं. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि दिल के मरीजों में धमनी से संबंधित रोग वैश्विक तौर पर मौत का प्रमुख कारण होते हैं और करीब 40 प्रतिशत मरीज समय पर दवा लेने के आदी नहीं होते हैं इसलिए उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है.ऑस्ट्रेलिया में सिडनी यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर जूली रेडफर्न ने बताया, ‘‘धमनी से संबंधित हृदय रोग के मरीज अधिक मात्रा में दवाएं...

कुछ ही मिनट में पता चल जाएगा कि दवाई असली है या नकली, वैज्ञानिकों ने खोजा ये तरीका

वॉशिंगटन:  वैज्ञानिकों ने एंटीबायोटिक दवाओं की प्रमाणिकता की जांच के लिए पेपर पर आधारित एक ऐसी जांच प्रणाली विकसित की है जिससे कुछ ही मिनट में पता चल जाएगा कि दवाई असली है या नकली . दवाई नकली होने पर यह कागज खास तरह के लाल रंग में तब्दील हो जाता है. विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर घटिया दवाओं का उत्पादक और वितरण होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनियाभर में लगभग 10 फीसदी दवाइयां फर्जी हो सकती हैं और उनमें से 50 फीसदी एंटीबायोटिक के रूप में होती हैं. नकली एंटीबायोटिक दवाइयों से न केवल मरीज की जान को खतरा पैदा होता है बल्कि दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध की बड़े पैमाने पर समस्या भी पैदा होती है. अनुसंधानकर्ताओं ने कागज आधारित जांच का विकास किया है जो तेजी से इस बात का पता चल सकता है कि दवाई असली है या नहीं या क्या उसमें बेकिंग सोडा जैसी चीजें मिलाई गई हैं. एंटीबायोटिक्स क्या है? एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टिरियल भी कहा जाता है. बैक्टेरियल इंफैक्शन्स से लड़ने के लिए यह बहुत ही शक्तिशाली दवा है. यह अगर उचित तरीके लिया जाय को आपके जीवन को बचा सकता है. लेकि...

इन देशों में धड़ल्ले से बिक रही हैं नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाएं

वॉशिंगटन:  वैज्ञानिकों का कहना है कि मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी सहित दूसरी बीमारियों की नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाएं विकासशील देशों में धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही हैं. वैज्ञानिकों ने साथ ही कहा कि कम एवं मध्यम आय वाले देशों से नमूने के तौर पर ली गयी दवाओं में से 13 प्रतिशत दवाएं खराब गुणवत्ता की थीं. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पता चला कि अफ्रीका में इस्तेमाल में लायी जा रही 19 प्रतिशत जरूरी दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं. शोधकर्ताओं ने पाया कि कम और मध्यम आय वाले देशों में 19 प्रतिशत मलेरिया रोधी और 12 प्रतिशत एंटीबॉयोटिक दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं. यूएनसी में सहायक प्रोफेसर साचिको ओजावा ने कहा, ‘‘खराब गुणवत्ता वाली या नकली दवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है क्योंकि ये दवाएं अप्रभावी या नुकसानदेह हो सकती हैं और बीमारी को लंबे समय के लिए खींच सकती है, विषाक्तता को जन्म दे सकती है या शरीर पर खतरनाक नकारात्मक असर डाल सकती हैं. ’’ यूएनसी के प्रोफेसर जेम्स हेरिंगटन ने कहा, ‘‘हमें दवाओं की ...

एलोपैथिक डॉक्टर ने मरीज को अगर दी ये आर्युवेदिक दवाएं तो जाना पड़ेगा जेलः DMC

नई दिल्ली (सुमन अग्रवाल):  दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद एक्ट 1998 के तहत अगर कोई एलोपैथिक डॉक्टर पर्चे पर आयुर्वेदिक दवा लिखते हैं तो उन्हें जेल हो जाएगी. दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने एडवाइजरी जारी की है. इस नए आदेश के मुताबिक कोई भी एलोपैथिक डॉक्टर लिव 52, सिस्टोन, सेप्टिलाइन, M2 टोन, एम्लिक्योर डीएस, नीरि, एमिकोरिडियल प्रेसक्राइब नहीं कर पाएंगें. दरअसल, ये इसलिए किया गया है क्योंकि एलोपैथिक मेडिसिन प्रैक्टिस करने वाले कई डॉक्टर आर्युवेद की नॉलेज नहीं रखते और आर्युवेद काउंसिल में रजिस्टर भी नहीं हैं. ऐसे में अगर वे आयुर्वेदिक दवाइयां प्रेसक्राइब भी करते हैं तो उन्हें जेल हो सकती है. क्योंकि इससे पहले एलोपैथिक डॉक्टरों ने भी यही कहकर विरोध किया था कि होमियोपैथिक डॉक्टर कैसे एलोपैथिक दवाएं प्रेसक्राइब करते हैं.  दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार गिरिश त्यागी ने कहा, क्रॉसपैथी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी. भले ही कोई आर्युवेद का डॉक्टर एलोपैथिक दवाएं लिख देते हैं या कोई एलोपैथिक डॉक्टर होमियोपैथी दवाएं लिख देते हैं. ऐसा नहीं चलेगा और अगर अब ऐसा हुआ तो उस डॉक्टर सीधे जेल हो जाएगी....

पेट्रोल नहीं पर दवाएं जरूर हो जाएंगी सस्‍ती, मोदी सरकार ला रही कीमतें तय करने का फार्मूला

नई दिल्‍ली:  दवाओं की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए  मोदी सरकार  नई कीमत प्रणाली ला रही है. इसके तहत फार्मा उत्‍पादों के लिए नया प्राइस इंडेक्‍स बनेगा जो देश में दवा कीमतों पर नियंत्रण करेगा. इस प्राइस इंडेक्‍स में सभी दवाएं शामिल होंगी. फिलवक्‍त 850 दवाओं की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है. राष्‍ट्रीय फार्मास्‍युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) इन दवाओं की हर साल कीमत तय करती है. कीमतें तय करने का आधार  थोकमूल्‍य कीमत सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई)  है. जो इस नियंत्रण दायरे से बाहर हैं वे कंपनियां अन्‍य दवाओं की कीमतें साल में 10 फीसदी से ज्‍यादा नहीं बढ़ा सकती हैं. मोदी सरकार विकसित कर रही नया प्राइस इंडेक्‍स मोदी सरकार ने जिस प्रणाली का प्रस्‍ताव किया है, उसके मुताबिक सभी दवाओं को नए फार्मास्‍युटिकल इंडेक्‍स में लाया जाएगा. दवा निर्माताओं को इंडेक्‍स के आंकड़ों के आधार पर दवाई की कीमतें तय करने का अधिकार होगा.  टाइम्‍स ऑफ इंडिया  ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा कि प्रस्‍ताव अंतिम चरण में है और इसे जून के अंत तक नोटिफाई कर दिया जाएगा. यह इंडेक्‍स न सिर्फ डब्‍ल्‍यूपीआई के आधार पर दवा की क...