नई दिल्ली: यूपी के बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने छह दिसंबर को दलित अस्मिता के नारे के साथ बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. लंबे समय से बीजेपी में बागी तेवर अपनाने वाली सावित्री बाई ने बीजेपी के छोड़ने का ऐलान बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण ( पुण्यतिथि ) के दिन किया. उनकी घोषणा को इसके साथ ही यूपी की सियासत में एक नए दलित नेता के उभार के रूप में देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने इस्तीफे के साथ ही बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि संविधान को समाप्त करने की साजिश की जा रही है. दलित और पिछड़ा का आरक्षण बड़ी बारीकी से समाप्त किया जा रहा है. इससे साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में एससी/एसटी मुद्दों और आरक्षण पर उनकी मुखर आवाज सुनने को मिलेगी. उनकी इस घोषणा का बीजेपी पर क्या असर पड़ेगा ये तो आने वाला समय बताएगा लेकिन यह तय है कि दलित राजनीति के नाम पर वह सीधेतौर पर बसपा सुप्रीमो मायावती को चुनौती देंगी. पिछले लोकसभा चुनाव में वैसे भी बसपा का खाता नहीं खुला था. उसके बाद से ही यूपी की सियासत में नए दलित नेतृत्व की चर्चाएं बारंबार उभरती रही हैं. इस कड़ी में...
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