नई दिल्ली: दुर्लभ पैरासिटिक संक्रमण से पीड़ित एक अफगान मरीज भारत के नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल से अपना सफल इलाज कराने के बाद स्वस्थ होकर अपने देश लौट रहा है. जेपी हॉस्पिटल के डॉक्टरों के अनुसार यह बहुत दुर्लभ बीमारी है. हॉस्पिटल के एक बयान में बताया गया है कि मरीज के शरीर में संक्रमण का असर मरीज के स्पाइन (रीढ़) और गर्दन पर हुआ था. जिसके कारण उनके शरीर के बायां हिस्सा अपंग हो गया था.
इसके बाद न्यूरोसर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रोहन सिन्हा ने जेपी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जनों की टीम के साथ मिलकर सफलतापूर्वक जटिल 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं रीस्टोरेशन' सर्जरी पूरी की. अफगानिस्तान के 50 वर्षीय नागरिक आरिफ रेजाया को गर्दन में बहुत तेज दर्द था. उन्हें लगातार उल्टियां हो रही थीं. वे अपने दोनों हाथों में कमजोरी और चलने में परेशानी महसूस कर रहे थे. वे अफगानिस्तान और नई दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज के लिए गए लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था.
इसके बाद मई 2017 में वे नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल आए. जांच करने पर पता चला कि वे टेपवर्म (जीनस एकाइनोकोकस) के पैरासिटिक इन्फेक्शन, हायडेटिड से पीड़ित हैं. संक्रमण का असर उनकी रीढ़ और गर्दन पर पड़ा था. अच्छी तरह जांच करने के बाद उन्हें 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं फिक्सेशन सर्जरी' की सलाह दी गई.
सर्जरी के बाद आरिफ रेजाया ने कहा, 'जेपी हॉस्पिटल आने से पहले मेरे शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह से निष्क्रिय था. मेरे शरीर का आकार बिगड़ गया था. मुझे लगता था कि अब मैं कभी सामान्य जिंदगी नहीं जी सकूंगा. लेकिन जेपी हॉस्पिटल आने के बाद मैं अब चल सकता हूँ. अपने रोजमर्रा के सभी काम खुद कर सकता हूं'. उन्होंने इसके लिए डॉ. सिन्हा और उनकी टीम के प्रति आभार जताया.
इसके बाद न्यूरोसर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रोहन सिन्हा ने जेपी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जनों की टीम के साथ मिलकर सफलतापूर्वक जटिल 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं रीस्टोरेशन' सर्जरी पूरी की. अफगानिस्तान के 50 वर्षीय नागरिक आरिफ रेजाया को गर्दन में बहुत तेज दर्द था. उन्हें लगातार उल्टियां हो रही थीं. वे अपने दोनों हाथों में कमजोरी और चलने में परेशानी महसूस कर रहे थे. वे अफगानिस्तान और नई दिल्ली के कई अस्पतालों में इलाज के लिए गए लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था.
इसके बाद मई 2017 में वे नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल आए. जांच करने पर पता चला कि वे टेपवर्म (जीनस एकाइनोकोकस) के पैरासिटिक इन्फेक्शन, हायडेटिड से पीड़ित हैं. संक्रमण का असर उनकी रीढ़ और गर्दन पर पड़ा था. अच्छी तरह जांच करने के बाद उन्हें 'स्पाइनल कोर्ड डीकम्प्रेशन एवं फिक्सेशन सर्जरी' की सलाह दी गई.
डॉ. सिन्हा ने बताया, 'मरीज की सर्जरी मिनीमल इनवेसिव तकनीक से की गई. सबसे पहले गर्दन में जमे पस को निकाला गया. जून 2017 में मरीज की मेजर स्पाइन सर्जरी की गई. जिसमें संक्रमित हड्डी को निकाल दिया गया. इसकी जगह मरीज की अपनी पेल्विक बोन का ग्राफ्ट लगाया गया. ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग किया गया'.
सर्जरी के बाद आरिफ रेजाया ने कहा, 'जेपी हॉस्पिटल आने से पहले मेरे शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह से निष्क्रिय था. मेरे शरीर का आकार बिगड़ गया था. मुझे लगता था कि अब मैं कभी सामान्य जिंदगी नहीं जी सकूंगा. लेकिन जेपी हॉस्पिटल आने के बाद मैं अब चल सकता हूँ. अपने रोजमर्रा के सभी काम खुद कर सकता हूं'. उन्होंने इसके लिए डॉ. सिन्हा और उनकी टीम के प्रति आभार जताया.
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