जोधपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अपने सारे बड़े नेताओं को प्रचार में उतार दिया है. जोर-शोर से प्रचार करने के साथ ही दोनों खेमा जातिय समीकरण बिठाने की भी कोशिश में जुटे हैं. राजनीति के जानकार मानते हैं कि 200 सीटों वाले राजस्थान विधानसभा में सरकार बनाने के लिए राजपूत जाति के वोटों की काफी अहमियत होती है. दरअसल, राजस्थान की ऐतिहासिक पहचान भी काफी हद तक राजपूतों की वजह से ही है. यहां के राजनीतिक गलियारे में कहा जाता है कि राजपूत वोटर ही राजस्थान में सरकार बनाते और बिगाढ़ते हैं. 1990 के दशक के बाद से राजपूतों को झुकाव बीजेपी के प्रति देखा जाता रहा है. इस बार राजपूत समाज के लोग बीजेपी से थोड़े नाराज चल रहे हैं. इसका ट्रेलर वे इसी साल हुए उपचुनावों में दिखा चुके हैं.
अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को हार मिली थी. इस हार के पीछे राजपूतों वोटों की नाराजगी को भी एक वजह बताई गई थी. राजपूत समाज के लोग गैंगस्टर आनंदपाल पाल सिंह के एनकाउंटर से नाराज हैं. आनंदपाल राजपूत समाज के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय था. राजपूत समाज के लोग मानते हैं कि आनंदपाल ने उन्हें जाट माफिया से मुक्ति दिलाई थी. जून 2017 में आनंदपाल का एनकाउंटर होने से राजपूत समाज में भारी रोष है.
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राज्य में राजपूतों को बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए कई प्रकरणों का हवाला देकर राजपूत संगठनों ने बीजेपी खासकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. वैसे, बीजेपी का कहना है कि राजपूत समाज में कोई नाराजगी नहीं है और राजपूत पहले की तरह इस बार भी बीजेपी को वोट करेंगे. राज्य की कुल आबादी में करीब 12 फीसदी राजपूत हैं और वे करीब 30 सीटों पर जीत-हार तय करने की ताकत रखते हैं. वैसे राजपूत मतदाताओं की तकरीबन हर सीट पर ठीकठाक मौजूदगी है.

जोधपुर संभाग में राजपूत वोटर बिगाड़ सकते हैं समीकरण
जोधपुर संभाग की 33 सीटों में से कई सीटें हैं जहां राजपूतों की नाराजगी ने बीजेपी के लिए मुश्किल की स्थित पैदा की है. जोधपुर जिले की ओसिया सीट पर निर्दलीय राजपूत उम्मीदवार महेंद्र सिंह भाटी बीजेपी के पूरे जातिगत समीकरण को बिगाड़ते हुए नजर आ रहे हैं.
जोधपुर की ही फलौदी विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के लिए राजपूतों की नाराजगी भारी पड़ सकती है. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से बब्बा राम विश्नोई चुनावी मैदान में हैं, लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राजपूत उम्मीदवार कोम्भ सिंह पतावत यहां के नतीजे को प्रभावित करने की स्थिति में हैं.
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2016 से वसुंधरा से तल्ख हुए राजपूत वोटर
राजस्थान में राजपूत समाज पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी का कोर वोटर रहा है. लेकिन 2016 में वसुंधरा राजे और राजपूतों के बीच तल्खी बढ़ गई. हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजपूत नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह स्थिति और बिगड़ गई.
स्थानीय राजनीतिक जानकारों के मुताबिक वसुंधरा सरकार से राजपूत समाज की नाराजगी के पीछे कई कारण हैं. फिल्म पद्मावत विवाद, गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर और राजपूत नेता गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का वसुंधरा का कथित विरोध प्रमुख़ कारण बताए जाते हैं.
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फिल्म पद्मावत प्रकरण से भी है राजपूतों में नाराजगी
जोधपुर में एक बड़े हिंदी दैनिक से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार रमेश त्रिपाठी का कहना है, 'आनंद पाल एनकाउंटर मामले, पद्मावत प्रकरण और मानवेन्द्र सिंह के जाने से बीजेपी और राजपूतों के बीच दूरी बनी है. पिछले कुछ महीनों में बीजेपी ने मनाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन शायद वह इसको लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि राजपूत पहले के चुनाव की तरह इस बार भी उसके साथ डंटकर खड़े रहेंगे.' इस विधानसभा चुनाव में 'राजपूत करणी सेना' और 'श्री राजपूत सेना' जैसे संगठन बीजेपी का खुलकर विरोध कर रहे हैं जिसने सत्तारूढ़ पार्टी की मुश्किलों में इजाफे का काम किया है.

राजपूतों की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, 'कोई नाराजगी नहीं है. पूरा समाज हमारे साथ है.' उन्होंने कहा, 'सभी समाज का बीजेपी को समर्थन और सभी लोग मिलकर वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे.' वैसे, बीजेपी ने टिकट वितरण में भी राजपूतों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की और समाज के 26 लोगों को उम्मीदवार बनाया.
अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को हार मिली थी. इस हार के पीछे राजपूतों वोटों की नाराजगी को भी एक वजह बताई गई थी. राजपूत समाज के लोग गैंगस्टर आनंदपाल पाल सिंह के एनकाउंटर से नाराज हैं. आनंदपाल राजपूत समाज के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय था. राजपूत समाज के लोग मानते हैं कि आनंदपाल ने उन्हें जाट माफिया से मुक्ति दिलाई थी. जून 2017 में आनंदपाल का एनकाउंटर होने से राजपूत समाज में भारी रोष है.
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राज्य में राजपूतों को बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए कई प्रकरणों का हवाला देकर राजपूत संगठनों ने बीजेपी खासकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. वैसे, बीजेपी का कहना है कि राजपूत समाज में कोई नाराजगी नहीं है और राजपूत पहले की तरह इस बार भी बीजेपी को वोट करेंगे. राज्य की कुल आबादी में करीब 12 फीसदी राजपूत हैं और वे करीब 30 सीटों पर जीत-हार तय करने की ताकत रखते हैं. वैसे राजपूत मतदाताओं की तकरीबन हर सीट पर ठीकठाक मौजूदगी है.

जोधपुर संभाग में राजपूत वोटर बिगाड़ सकते हैं समीकरण
जोधपुर संभाग की 33 सीटों में से कई सीटें हैं जहां राजपूतों की नाराजगी ने बीजेपी के लिए मुश्किल की स्थित पैदा की है. जोधपुर जिले की ओसिया सीट पर निर्दलीय राजपूत उम्मीदवार महेंद्र सिंह भाटी बीजेपी के पूरे जातिगत समीकरण को बिगाड़ते हुए नजर आ रहे हैं.
जोधपुर की ही फलौदी विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के लिए राजपूतों की नाराजगी भारी पड़ सकती है. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से बब्बा राम विश्नोई चुनावी मैदान में हैं, लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राजपूत उम्मीदवार कोम्भ सिंह पतावत यहां के नतीजे को प्रभावित करने की स्थिति में हैं.
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2016 से वसुंधरा से तल्ख हुए राजपूत वोटर
राजस्थान में राजपूत समाज पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी का कोर वोटर रहा है. लेकिन 2016 में वसुंधरा राजे और राजपूतों के बीच तल्खी बढ़ गई. हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजपूत नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह के बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह स्थिति और बिगड़ गई.
स्थानीय राजनीतिक जानकारों के मुताबिक वसुंधरा सरकार से राजपूत समाज की नाराजगी के पीछे कई कारण हैं. फिल्म पद्मावत विवाद, गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर और राजपूत नेता गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का वसुंधरा का कथित विरोध प्रमुख़ कारण बताए जाते हैं.
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फिल्म पद्मावत प्रकरण से भी है राजपूतों में नाराजगी
जोधपुर में एक बड़े हिंदी दैनिक से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार रमेश त्रिपाठी का कहना है, 'आनंद पाल एनकाउंटर मामले, पद्मावत प्रकरण और मानवेन्द्र सिंह के जाने से बीजेपी और राजपूतों के बीच दूरी बनी है. पिछले कुछ महीनों में बीजेपी ने मनाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन शायद वह इसको लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि राजपूत पहले के चुनाव की तरह इस बार भी उसके साथ डंटकर खड़े रहेंगे.' इस विधानसभा चुनाव में 'राजपूत करणी सेना' और 'श्री राजपूत सेना' जैसे संगठन बीजेपी का खुलकर विरोध कर रहे हैं जिसने सत्तारूढ़ पार्टी की मुश्किलों में इजाफे का काम किया है.

राजपूतों की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, 'कोई नाराजगी नहीं है. पूरा समाज हमारे साथ है.' उन्होंने कहा, 'सभी समाज का बीजेपी को समर्थन और सभी लोग मिलकर वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे.' वैसे, बीजेपी ने टिकट वितरण में भी राजपूतों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की और समाज के 26 लोगों को उम्मीदवार बनाया.

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