नई दिल्ली: भारतीय रेलवे स्टेशन पर या ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए कैश के झंझट से मुक्ति दिलाने जा रहा है. आप डेबिट या क्रेडिट कार्ड से सीधे भुगतान कर सकेंगे. रेलवे वेंडरों को पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) हैंड हेल्ड मशीन देने की तैयारी कर रहा है. माना जा रहा है कि दिवाली से पहले यानी एक नवंबर से शताब्दी, दुरंतो और राजधानी जैसी ट्रेनों से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हो जाएगी.
दुरंतो, शताब्दी और राजधानी आदि ट्रेनों में यात्रियों से खानपान का चार्ज टिकट के साथ लिया जाता है. इसके अलावा भी ट्रेन में यात्री पानी की बोतल, चाय, नमकीन आदि सामान भी खरीदते हैं. इनका पैसा वेंडरों को कैश देना पड़ता है. इसमें वेंडरों द्वारा अधिक चार्ज करने की शिकायतें आती रहती हैं. इसको रोकने के लिए रेलवे वेंडरों को पीओएस मशीन देने की तैयारी कर चुका है जिसमें आप केवल खाने का वही दाम चुकाएंगे जो वास्तविकता में है.
रेलवे मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक फिलहाल ये सुविधा 185 ट्रेनों में लागू की गई है. इतना ही नहीं, इसको सख़्ती से लागू करने की मंत्रालय कर चुका है. अगर वेंडर ने बिल नहीं तो खाना फ़्री इसका प्रावधान भी किया है. इतना ही नहीं वेंडरों की पहचान करना भी रेलवे के लिए आसान हो जाएगा. अभी ट्रेनों में आईआरसीटीसी और पेंट्रीकार के साथ अवैध वेंडर भी सामान बेचते हैं. इनकी वजह से ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को महंगा खानपान मिलता है. पीओएस आने के बाद यात्री इन वेंडरों की पहचान कर सकेंगे और उन्हें उचित दर पर खानपान मिलेगा.
हालांकि रेलवे फूड आइटम्स पर ओवरचार्ज बिलिंग को रोकने के लिए जून 2018 में पहले ही एक ऐप मेन्यू ऑन रेल ला चुका है लेकिन उसे उतनी सफलता नहीं मिली. इस ऐप भी सभी आइटमों के रेट दिए गए हैं. रेलवे की कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई थी. देखना होगा कि अब पीओएस हैंड सेल मशीन से कितनी सफलता है.
स्टेशन पर भी लगेंगी पीओएस
मई 2018 में आईआरसीटीसी ने रेलवे जोन को स्टेशन पर कम से 10 पीओएस लगाने के लिए कहा था ताकि यात्रियों को फूड आइटम्स बिना कैश दिए मिल सकें. आईआरसीटीसी की यह पहल भी उतनी रंग नहीं ला पाई है जितनी अपेक्षा थी. चलती ट्रेन में पीओएस के इस्तेमाल के लिए रेलवे जीपीएस या वाईफाई का इस्तेमाल नहीं करेगा. रेलवे पीओएस में कनेक्टिविटी के लिए मोबाइल सिम का इस्तेमाल करेगा. इससे यात्रियों को खानपान का भुगतान करने में दिक्कतें नहीं आएंगी. यात्री पीओएस से सीधे रेलवे खाते में पैसा जमा कर सकेंगे. नवंबर महीने में इसकी शुरुआत हो सकती है. बहुत जल्द यह व्यवस्था पूरे भारतीय रेलवे में शुरू होगी
दुरंतो, शताब्दी और राजधानी आदि ट्रेनों में यात्रियों से खानपान का चार्ज टिकट के साथ लिया जाता है. इसके अलावा भी ट्रेन में यात्री पानी की बोतल, चाय, नमकीन आदि सामान भी खरीदते हैं. इनका पैसा वेंडरों को कैश देना पड़ता है. इसमें वेंडरों द्वारा अधिक चार्ज करने की शिकायतें आती रहती हैं. इसको रोकने के लिए रेलवे वेंडरों को पीओएस मशीन देने की तैयारी कर चुका है जिसमें आप केवल खाने का वही दाम चुकाएंगे जो वास्तविकता में है.
रेलवे मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक फिलहाल ये सुविधा 185 ट्रेनों में लागू की गई है. इतना ही नहीं, इसको सख़्ती से लागू करने की मंत्रालय कर चुका है. अगर वेंडर ने बिल नहीं तो खाना फ़्री इसका प्रावधान भी किया है. इतना ही नहीं वेंडरों की पहचान करना भी रेलवे के लिए आसान हो जाएगा. अभी ट्रेनों में आईआरसीटीसी और पेंट्रीकार के साथ अवैध वेंडर भी सामान बेचते हैं. इनकी वजह से ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को महंगा खानपान मिलता है. पीओएस आने के बाद यात्री इन वेंडरों की पहचान कर सकेंगे और उन्हें उचित दर पर खानपान मिलेगा.
हालांकि रेलवे फूड आइटम्स पर ओवरचार्ज बिलिंग को रोकने के लिए जून 2018 में पहले ही एक ऐप मेन्यू ऑन रेल ला चुका है लेकिन उसे उतनी सफलता नहीं मिली. इस ऐप भी सभी आइटमों के रेट दिए गए हैं. रेलवे की कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई थी. देखना होगा कि अब पीओएस हैंड सेल मशीन से कितनी सफलता है.
स्टेशन पर भी लगेंगी पीओएस
मई 2018 में आईआरसीटीसी ने रेलवे जोन को स्टेशन पर कम से 10 पीओएस लगाने के लिए कहा था ताकि यात्रियों को फूड आइटम्स बिना कैश दिए मिल सकें. आईआरसीटीसी की यह पहल भी उतनी रंग नहीं ला पाई है जितनी अपेक्षा थी. चलती ट्रेन में पीओएस के इस्तेमाल के लिए रेलवे जीपीएस या वाईफाई का इस्तेमाल नहीं करेगा. रेलवे पीओएस में कनेक्टिविटी के लिए मोबाइल सिम का इस्तेमाल करेगा. इससे यात्रियों को खानपान का भुगतान करने में दिक्कतें नहीं आएंगी. यात्री पीओएस से सीधे रेलवे खाते में पैसा जमा कर सकेंगे. नवंबर महीने में इसकी शुरुआत हो सकती है. बहुत जल्द यह व्यवस्था पूरे भारतीय रेलवे में शुरू होगी

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