पशुओं को शराब पीला कर मनोरंजन के लिए उन्हें खूनी लड़ाई लड़ाना क्रुरता से कम नहीं है. पशुओं को ऐसा करने के लिए मजबूर करना मानवता की कोटी में कतई नहीं आता है. लेकिन लोग ऐसी प्रथाओं से घिरे हैं कि उन्हें यह सारी चीजें नहीं दिखती. वह केवल अपने कुप्रथाओं को पूरा करने में लगे हैं.
प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी में मनोरंजन के लिए खेल आयोजित किया गया. यह खेल इंसानों के बीच नहीं बल्कि पशुओं को बीच होती है. सालों से चली आ रही गोवर्धन पूजा के दिन भैंसों को शराब पीला कर लड़वाया जाता है. इस खूनी खेलों को देखने के लिए सैकड़ों की भीड़ के साथ-साथ गणमान्य लोग भी पहुंचते हैं.
इस साल भी भैंसों की लड़ाई से पहले प्रतापगढ़ के छोटीसादडी के बाज़ार में जुलुस निकाला गया. जुलुस के दौरान यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी समेत कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे. हालांकि वह खेल देखने नहीं आए थे ऐसा कहा जा रहा है.
जुलुस के बाद भैंसों को गोमाना चौराहे के पास स्थित एक खेत में ले जाया गया. जहां दोनों भैंसों को पहले शराब पिलाई गई और फिर दोनों को लड़ाया गया. दोनों भैंसों में दो बार लड़ाई हुई. इसमें बादल नाम का भैंसा जीता. इसके बाद जीतने वाले परिवार ने जश्न भी मनाया. इस मौके पर न सिर्फ ग्रामीण, बल्कि प्रशासन के कई अधिकारी जैसे- उपखंड अधिकारी प्रकाश रेगर, तहसीलदार गणेशलाल पांचाल और DSP विजय पाल सिंह भी मौजूद रहे. इसके अलावा पुलिस के जवान और एक एम्बुलेंस भी खड़ी रही.
बहरहाल सवाल यह है कि क्या ऐसी कुप्रथा जिसमें पशु और इंसान दोनों ही घायल हो सकते हैं. ऐसे में पुलिस प्रशासन भी चुप है. उनके सामने ऐसे खेल खेले जा रहे हैं. लेकिन उन्हें इस खेल को रोकने की हिम्मत नहीं होती है.
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