16 नवंबर की शाम को जॉन एलेन चाऊ ने मछुआरों को एक 13-पेज का जर्नल सौंपा था. चाऊ की मां ने इस जर्नल को साझा किया.
नई दिल्ली: अमेरिकी नागरिक जॉन एलेन चाऊ की अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में सेंटेनलीज जनजाति के लोगों ने कथित तौर पर तीर मारकर हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक उनकी हत्या उस वक्त हुई
सेंटेनलीज आदिवासी समूह के इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे थे. अब उनका एक 13 पन्ने का जर्नल सामने आया है, जिसे उन्होंने आखिरी वक्त में लिखा था.
दरअसल 16 नवंबर की शाम वह मछुआरों के साथ नॉर्थ सेंटीनल आइलैंड के उस इलाके में पहुंचे जो संरक्षित सेंटेनलीज आदिवासी समूह का इलाका है. पकड़े गए मछुआरों के मुताबिक वहां घायल होने के बाद भी उन्होंने आइलैंड के भीतर जाने की जिद की. वहीं पर उन्होंने 13 पेज का ये जर्नल मछुआरों को सौंपा था. कहा जाता है कि तीर से घायल होने के कारण बाद में उस इलाके में उनकी मौत हो गई.
अब उस जर्नल को चाऊ की मां ने वाशिंगटन पोस्ट के साथ शेयर किया है. इसमें उनके आखिरी घंटों का विवरण दर्ज है. चाऊ ने उसमें बताया था कि जब वह सेंटेनलीज जनजाति के इलाके में पहुंचे तो उन्हें देखकर तकरीबन पांच फीट, पांच इंच के कद और मुंह पर पीले रंग का पेस्ट लगाए आदिवासी काफी नाराज हो गए. हालांकि उन्होंने उन लोगों से बातचीत की कोशिश की और धार्मिक गीत भी गाए.
जॉन ने लिखा है कि मैंने उनसे कहा, 'मेरा नाम जॉन है और मैं आपसे प्यार करता हूं और जीसस आपसे प्यार करते हैं.' उसी दौरान एक सेंटेनलीज ने उन पर तीर से हमला किया.
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उन्होंने लिखा है कि आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं पागल हूं, लेकिन मुझे लगता है कि इन लोगों को प्रभु यीशु के बारे में बताना बेहद जरूरी है. चाऊ ने इसके साथ ही लिखा है, 'भगवान मैं मरना नहीं चाहता. इस खूबसूरत जगह पर इतनी मौत क्यों होती हैं?' इसके साथ ही यह भी लिखा, 'मैं ये मानता हूं कि ये मेरा आखिरी संदेश नहीं है, बाकी ईश्वर की मर्जी'.
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जॉन एलेन चाऊ (27)
चाऊ इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव थे. इससे पहले वो चार बार अंडमान निकोबार आ चुके थे. साल 2015 में वो पहली बार यहां आए थे. दो नवंबर को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर उत्तर अंडमान में दिगलीपुर की यात्रा के बारे में लिखा था. उन्होंने एक ट्रॉपिकल झरने की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था कि ये लीच (जोंक) से भरा है. उनका एक ब्लॉग भी है, जिसका नाम ‘theruggedtrail’ है. इसमें उन्होंने अफ्रीका समेत अनेक साहसिक यात्राओं के बारे में लिखा था.
उनके लिंक्डइन खाते के मुताबिक, ओकलाहोमा के तुलसा में ओरल रॉबर्ट्स विश्वविद्यालय से स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा में डिग्री के साथ चाऊ ने दक्षिण अफ्रीका में काम किया था और उसके बाद उत्तरी इराक (कुर्दिस्तान) में एक शरणार्थी शिविर में काम किया था.
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