खबरो की मानें तो अब तक बीजेपी में अलवर ज़िले की थानागाजी, कठूमर और अलवर ग्रामीण सीट के साथ सवाईमाधोपुर के खण्डार क्षेत्र में भी टिकट को लेर धमासान शुरू हो चुका है. दरअसल इन क्षेत्रों के कार्यकर्ता अपने यहां से स्थानीय नेता को बीजेपी का टिकट दिलाना चाहते हैं. इनका कहना है कि यहां लम्बे समय से बाहरी प्रत्याशी जीतते आए हैं. इसलिए इस साल अब पार्टी को यहां के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को भी तरहीज देनी पड़ेगी.
इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों से ज्यादा बाहरी लोगों को तरजीह देने को लेकर इस बार यहां के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में खासी नाराजगी हैं. यहां तक की थानागाजी से आए लोगों ने तो साफ कह दिया कि अगर मन्त्री हेमसिंह भड़ाना को थानागाजी से इस बार भी टिकट दिया गया तो पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के परम्परागत ढर्रे के कारण हीबीजेपी की पैठ कई जगह कम हो रही है. अलवर ग्रामीण से आए सुनील चौधरी कहते हैं कि वर्तमान विधायक जयराम जाटव उनके क्षेत्र से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर रहते हैं. उनका कहना है कि अबकी बार कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी टीकाराम जूली भी बाहरी हैं. ऐसे में बीजेपी किसी स्थानीय नेता को प्रत्याशी बनाए तो पार्टी मजबूत हो सकती है.
पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी के सामने भी अपनी बात रखी. इस पर सैनी ने कही कि लोकतंत्र में मांग करना कार्यकर्ता का अधिकार है. उन्होनें कहा कि विधायक ही मन्त्री बनते हैं और हर विधायक किसी न किसी के टिकट बदलने पर ही जनप्रतिनिधि बना है. स्थानीय प्रत्याशी की मांग पर मदनलाल सैनी ने कि पार्टी को उपयुक्त स्थानीय कार्यकर्ता मिलने की सूरत में स्थानीय को ही तरजीह दी जाएगी.
हालांकि मदनलाल सैनी के आश्वासन के बाद अलग-अलग क्षेत्रों से आए कार्यकर्ता शांत हुए और क्षेत्रीय उम्मीदवार को टिक मिलने की उम्मीद लेकर लौट गए. लेकिन अगर क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं की मांग को पूरा नहीं किया बीजेपी को इन चुनावों में विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
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