के. 9 वज्र की प्रथम रेजीमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है. यह ऐसी पहली तोप है जिसे भारतीय निजी क्षेत्र ने बनाया है. इस तोप की अधिकतम रेंज 28 - 38 किमी है. यह 30 सेकेंड में तीन गोले दागने में सक्षम है और यह तीन मिनट में 15 गोले दाग सकती है.

थल सेना ‘145 एम 777 होवित्जर’ की सात रेजीमेंट भी बनाने जा रही है. प्रवक्ता ने बताया कि सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी. प्रथम रेजीमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी. इस तोप की रेंज 30 किमी तक है. इसे हेलीकॉप्टर या विमान के जरिए वांछित स्थान तक ले जाया जा सकता है.
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इसके अलावा, सेना कुल 145 एम777 होवित्जर तोपों की साथ रेजिमेंट भी बनाएगी. अगस्त 2019 की शुरुआत में पांच तोपें सेना को सौंप दी जाएंगी. जबकि यह प्रक्रिया पूरी होने में 24 महीनों का वक्त लगेगा. पहली रेजिमेंट अगले साल अक्टूबर में पूरी हो जाएगी. 30 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इस तोप को हेलीकॉप्टरों या विमान से एक से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.
इस समारोह के दौरान 130 एमएम और 155 एमएम की तोपों को ले जाने वाले कांपैक्ट गन ट्रैक्टर को भी तोपखाने में शामिल किया जा चुका है. तोप से जुड़ने के साथ इस वाहन की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटे और 50 किमी प्रति घंटे है.

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