देवउठनी एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है.
नई दिल्ली: साल की सबसे शुभ और फलदायी एकादशी आज है जिसे देवउठनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. आज भगवान विष्णु चार महीने की नींद के बाद जगेंगे. इस तिथि से ही सारे शुभ काम जैसे, विवाह, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य होने शुरू हो जाते हैं. देवउठनी एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है. आज ही के दिन शलिग्राम से तुलसी विवाह भी किया जाता है.
किया जाता है तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी के दिन से शादियों का शुभारंभ हो जाता है. सबसे पहले तुलसी मां की पूजा होती है. देवउठनी एकादशी के दिन धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन होता है. तुलसी जी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है, इसलिए देव जब उठते हैं तो हरिवल्लभा तुलसी की प्रार्थना ही सुनते हैं. देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से की जाती है. अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है. इस बार देवउठनी एकादशी 19 नवंबर सोमवार को है.
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पूजा में ध्यान रखने वाली बातें
विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन, छत या पूजास्थल के बीचोंबीच रखें. तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग करें. विवाह के रिवाज शुरू करने से पहले तुलसी के पौधे पर चुनरी जरूर चढ़ाएं. शालिग्राम में चावल की जगह तिल चढ़ाएं. तुलसी और शालिग्राम पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं. विवाह के दौरान 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें.
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नहीं शुरू होंगे अभी मांगलिक कार्य
देवउठनी एकादशी पर गुरु अस्त होने के कारण इस वर्ष 19 नवंबर को पड़ने वाली एकादशी पर विवाह की शहनाइयां नहीं बजेंगी. पंडित की मानें तो देवउठनी एकादशी को विवाह के लिए अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. इस बार देवउठनी एकादशी पर गुरु का तारा अस्त स्वरूप में रहेगा, जिसके कारण इस वर्ष देवउठनी एकादशी पर विवाह मुहूर्त नहीं बनेगा.
देवउठनी एकादशी 2018 शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि – 19 नवंबर 2018
पारण का समय – 06:52 से 08:58 बजे तक (20 नवंबर 2018)
एकादशी तिथि आरंभ – 13:34 बजे से (18 नवंबर 2018)
एकादशी तिथि समाप्त – 14:30 बजे (19 नवंबर 2018)
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