इस संबंध में बीबीसी ने एक पोल का आयोजन किया था. उसमें 43 देशों के 200 से अधिक समीक्षकों की राय के आधार पर इस सूची को तैयार किया गया है. इस पोल में 67 प्रसिद्ध निर्देशकों की 100 फिल्मों को शामिल किया गया था. ये फीचर फिल्में 24 देशों और 19 भाषाओं में थीं. बीबीसी के एक बयान के मुताबिक इनमें से 27 उत्कृष्ट श्रेणी की फिल्में फ्रेंच, 12 मंडारिन, 11-11 इटली और जापान भाषा में थीं.
पाथेर पंथाली
सत्यजीत रे ने इस फिल्म के जरिये निर्देशन में कदम रखा था. बिभूतिभूषण बंद्योपाद्याय के इसी नाम से प्रसिद्ध उपन्यास पर रे ने इस मास्टरपीस को बनाया. यह फिल्म एक सोशल ड्रामा है जिसमें एक गरीब परिवार के बच्चे अपू और उसकी रोजमर्रा जिंदगी को ग्रामीण भारत के एक गांव में दर्शाया गया है. जब इस फिल्म की आधी शूटिंग ही हो पाई थी तो फिल्ममेकर सत्यजीत रे के पास फंड खत्म हो गया था, सो उसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फिल्म के निर्माण में पैसा लगाया. पाथेर पंचाली सत्यजीत रे की 'द अपू ट्रिलोजी' में से पहली फिल्म है.
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