Skip to main content

सरदार' जिन्‍होंने भारत के सबसे सफल 'ऑपरेशन पोलो' का हुक्‍म दिया

वीपी मेनन ने अपनी किताब द स्‍टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन ऑफ इंडियन स्‍टेट्स में लिखा है कि देसी रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल ने किस तरह अग्रणी भूमिका निभाई.रदार वल्‍लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लेख में कहा है कि जब देश आजाद हुआ तो ब्‍यूरोक्रेट वीपी मेनन ने सरकारी सेवा से रिटायर होने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की. इस पर सरदार पटेल ने कहा कि ये समय रिटायर होने का नहीं है. उसके बाद मेनन को विदेश विभाग का सचिव बनाया गया. उन्‍होंने अपनी किताब द स्‍टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन ऑफ इंडियन स्‍टेट्स में लिखा है कि देसी रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल ने किस तरह अग्रणी भूमिका निभाई. उन्‍होंने अपनी पूरी टीम को परिश्रम से काम करने के लिए प्रेरित किया.हैदराबाद का किस्‍सा
कहा जाता है कि हैदराबाद रियासत के एकीकरण का काम सबसे दुष्‍कर था लेकिन सरदार पटेल के कुशल नेतृत्‍व में इसका एकीकरण हुआ. दरअसल भारत की आजादी के साथ ही कई समस्‍याएं विरासत में मिलीं. उनमें से तीन सबसे बड़ी थीं. जम्‍मू-कश्‍मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद. शुरुआती दो ने तो थोड़े ना-नुकुर के बाद भारत की अधीनता स्‍वीकार कर ली लेकिन हैदराबाद रियासत अड़ गई कि वह भारत से एक स्‍वतंत्र मुल्‍क रहेगा. दरअसल आजादी से पहले हिंदुस्‍तान की सभी रियासतें अंग्रेजों के साथ सहयोग संधि (सब्सिडियरी अलायंस) से बंधी थीं. इसके तहत अपनी सीमाओं के भीतर वे स्‍व-शासन के फॉर्मूले पर चलती थीं लेकिन बाहरी मामलों पर अंग्रेजों का अधिकार था.1947 के इंडियन इंडिपेंडेंस एक्‍ट के तहत अंग्रेजों ने इन सभी को छोड़ दिया. उसके बाद ये इस बात को तय करने के लिए स्‍वतंत्र हो गए कि वे भारत या पाकिस्‍तान में से किसी के साथ रहना चाहेंगे या आजाद मुल्‍क की तरह बर्ताव करेंगे. 1948 तक सभी रियासतों ने अपनी भौगौलिक स्थिति के आधार पर भारत या पाकिस्‍तान को अपना मुल्‍क मान लिया लेकिन सबसे शक्तिशाली और समृद्ध हैदराबाद रियासत ने इन सबसे इनकार कर दिया.पीएम नरेंद्र मोदी ने किया ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरणउस वक्‍त हैदराबाद के निजाम उस्‍मान अली खान (आसिफ जाह सप्‍तम) थे और रियासत की बहुसंख्‍यक आबादी हिंदू थी. रियाया तो भारत के साथ जाना चाहती थी लेकिन निजाम अपनी मुस्लिम कुलीनों से बनी फौज रजाकर के दम पर उन पर राज करना चाहते थे. रजाकर हैदराबार रियासत के भारत के साथ विलय के खिलाफ थे. उन्‍होंने निजाम के शासन का समर्थन किया और पाकिस्‍तान में विलय का प्रयास भी किया.नवंबर 1947 में हैदराबाद ने भारत के साथ यथास्थिति बनाए रखने संबंधी समझौता किया. लेकिन रजाकरों के हिंदू आबादी पर बढ़ते जुल्‍मो-सितम के कारण उपप्रधानमंत्री सरदार वल्‍लभभाई पटेल ने फैसला लेते हुए हैदराबाद रियासत में पुलिसिया कार्रवाई करने का आदेश दिया. इस एक्‍शन को ही कोडनेम ऑपरेशन पोलो के नाम से जाना जाता है और 13 सितंबर, 1948 को सुबह चार बजे ये एक्‍शन शुरू हुआ. निजाम की सेना यानी रजाकरों के शुरुआती प्रतिरोध के बाद 18 सितंबर तक पूरी रियासत पर भारत का नियंत्रण हो गया. निजाम ने सरेंडर करते हुए भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्‍ताक्षर कर दिए. इस तरह हैदराबाद का भारत में विलय हो गया.हैदराबाद रियासत (1724-1948)
मुगलों के दक्‍कन में गवर्नर मीर कमरुद्दीन खान ने 1724 में स्‍वतंत्र हैदराबाद रियासत की स्‍थापना की. उससे पहले 1713-21 तक वह दक्‍कन का गवर्नर था. वह निजाम-उल-मुल्‍क के टाइटल के साथ गद्दी पर बैठा और आसिफ जाही वंश की स्‍थापना की. इस वंश के सात निजाम ने 1948 तक हैदराबाद रियासत पर राज्‍य किया. उस्‍मान अली खान अंतिम निजाम था.भौगोलिक लिहाज से हैदराबाद रियासत देश के दक्षिण-मध्‍य क्षेत्र में स्थित थी. इसकी राजधानी हैदराबाद थी. मौजूदा तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्‍ट्र के कुछ हिस्‍सों से मिलकर यह रियासत बनी थी. अंग्रेजों के जमाने में उनसे सहयोग संधि स्‍थापित करने वाला हैदराबाद पहली रियासत थी.जब भारत में विलय हुआ उस वक्‍त बाकियों की तुलना में हैदराबाद सबसे बड़ी और संपन्‍न रियासत थी. इसका भौगोलिक दायरा तकरीबन 82 हजार वर्ग मील था. 1941 की जनगणना में इसकी आबादी 1.6 करोड़ थी. उसमें से 85 प्रतिशत आबादी हिंदू थी लेकिन रियासत के 40 प्रतिशत भू-भाग का मालिकाना हक निजाम और मुस्लिम कुलीन वर्ग के पास था.

Comments

Popular posts from this blog

भूषण स्टील के प्रोपराइटर को फिलहाल नहीं जाना होगा जेल, SC से अंतरिम जमानत बहाल

नई दिल्‍ली :  भूषण स्टील लिमिटेड के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज सिंघलको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को अपने आदेश में सिंघल को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत को बहाल रखा है. हालांकि हाईकोर्ट में मामले पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को अपने पास ट्रांसफर करने का भी आदेश दिया है. दरअसल, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) और केंद्र सरकार ने याचिका दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती थी जिसमें हाईकोर्ट ने सिंघल को जमानत दे दी थी. नीरज सिंघल पर आरोप है कि 80 अलग-अलग फर्मों का उपयोग करते हुए भूषण स्टील के बैंक ऋण से 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है. सिंघल को आठ अगस्त को कंपनी कानून के तहत केंद्र सरकार के मई 2016 के आदेश के तहत एसएफआईओ की भूषण स्टील लिमिटेड और भूषण स्टील एंड पावर लिमिटेड के कामकाज की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. हाईकोर्ट ने सिंघल को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और दो-दो लाख रुपये के दो जमानती देने का आदेश देते हुए अंतरिम राहत दी थी. नीरज सिंघल ऐसे पहले व्यक्ति...

आत्मघाती होगा राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना : लालू प्रसाद यादव

पटना :  लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफे पर अड़े हुए हैं. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने सीडब्ल्यू की मीटिंग में इस्तीफे की पेशकश की थी और गांधी-नेहरू परिवार से अलग किसी व्यक्ति को अध्यक्ष पद के लिए चुनने के लिए कहा था. राहुल गांधी के इस फैसले को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो और चारा घोटाला के विभिन्न मामलों में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव ने आत्मघाती करार दिया है. लालू यादव ने अपने ट्वीट में लिखा, 'राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश आत्मघाती है. विपक्ष का एकमात्र लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सत्ता से हटाना था, लेकिन हम इसे राष्ट्रीय धारणा बनाने में असफल रहे. एक चुनाव के परिणाम से देश की वास्तविक्ता नहीं बदल सकती है.'

पद्मश्री-अर्जुन अवॉर्ड से सम्‍मानित इस हॉकी खिलाड़ी का परिवार आज खाने को मोहताज, लौटाएगा सभी अवॉर्ड

वाराणसी:  भारतीय हॉकी टीम  को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाले पूर्व हॉकी कप्तान मोहम्मद शाहिद की पत्नी सरकारी मदद नहीं मिल पाने की वजह से पद्मश्री समेत तमाम अवॉर्डलौटाने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी की वजह से वो सभी अवॉर्डवापस करने को मजबूर हो गई हैं. मोहम्मद शाहिद को पद्मश्री के अलावा बेहतरीन खिलाड़ी के लिए अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया था. 1980 में रूस में आयोजित हुए ओलंपिक खेल में भारत को हॉकी में गोल्ड मेडल मिला था. पूरे टूर्नामेंट में मोहम्मद शाहिद का बहुत बड़ा योगदान रहा था. ओलंपिक गोल्ड मेडल जीताने के बाद उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 6 साल बाद 1986 में उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.   MediaCard--mediaForward customisable-border" dir="ltr" data-scribe="component:card"> ANI UP  ✔ @ANINewsUP Parvin Shahid, wife of deceased Indian hockey player Mohammed Shahid who was a member of the team that won gold medal at the 1980 Olympic Games, says she will go to Delhi on July 21 to return the aw...