नई दिल्ली : भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते पर बातचीत करने और तमाम मसलों को सुलझाने के लिए आज (बुधवार) से स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) की बैठक लाहौर में होने जा रही है. 29 और 30 अगस्त को होने वाली यह बैठक दोनों ही देशों के लिए काफी खास है. इस बैठक के दौरान दोनों पक्ष सिंधु जल समझौते के तहत विभिन्न मामलों पर बातचीत करेंगे.
मंगलवार (28 अगस्त) को पाकिस्तान आयुक्त सैयद मेहर अली शाह और अतिरिक्त जल आयुक्त शेराज जमील ने लाहौर पहुंचे भारतीय दल का जोरदार स्वागत किया. पाकिस्तान में नई सत्तासीन हुई इमरान खान की सरकार के आने के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल समझौते पर कोई बैठक हो रही है.
सूखे इलाके में पड़ता है पाकिस्तान-विदेश मंत्री
भारत-पाकिस्तान के बीच हो रही इस अहम वार्ता से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने स्थानीय मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच जल आयोग की बैठक काफी समय से नहीं हुई थी. यह दो देशों के बीच क्षेत्र का नहीं बल्कि पानी की समस्या का मामला है. पाकिस्तान सूखे इलाके में आता है, ऐसे में हम पर पानी की कमी का असर पड़ सकता है.
सिंधु जल संधि पर यूएन का रुख
संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने पिछले दिनों कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता दोनों देशों के विवादों के बीच भी बचा रहा और नदी जल बंटवारे को लेकर उपजे विवादों को सुलझाने की रूपरेखा तैयार करने में मददगार साबित हुआ.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में जल उपयोग एक ऐसा क्षेत्र रहा है जहां कुछ देशों के बीच सहयोग संभव रहा है. वहीं मध्य एशिया में अमेरिका अराल सागर को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ निकट सहयोग कर रहा है.’’
क्या रहा पिछली बातों का नतीजा
2018 के सिंतबर महीने में भी इस मुद्दे पर एक बैठक का आयोजन किया गया था. हालांकि यह बैठक पूरी तरह से बेनतीजा रही थी. इस बैठक में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका था. कयास लगाए जा रहे हैं कि आज से शुरू हो रही इस बैठक में दोनों देश किसी नतीजे पर पहुंचेंगे.
क्या है सिंधु जल समझौता
भारत, पाकिस्तान और पुननिर्माण एवं विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंक या विश्व बैंक के बीच 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल समझौता पर हस्ताक्षर हुआ था. इस पर हस्ताक्षर करने वालों में नेहरु के अलावा पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान और विश्व बैंक के डब्ल्यू ए बी इलिफ शामिल थे. वर्तमान में सिंधु नदी का जल दोनों ही देशों के जरूरी है. इससे पाकिस्तान और भारत में काफी प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं.
संधि की 6 नदियों के पानी का हुआ बंटवारा
बता दें कि सिंधु जल संधि के तहत भारत-पाकिस्तान के बीच 6 नदियों के पानी का बंटवारा हुआ है. 3 पूर्वी नदियां-रावी, व्यास और सतुलज के पानी पर भारत को पूर्ण हक दिया गया है. वहीं पश्चिमी नदियों- झेलम, चिनाब, सिंधु के पानी पर पाकिस्तान का हक तय है. हालांकि संधि में इस बात को भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
मंगलवार (28 अगस्त) को पाकिस्तान आयुक्त सैयद मेहर अली शाह और अतिरिक्त जल आयुक्त शेराज जमील ने लाहौर पहुंचे भारतीय दल का जोरदार स्वागत किया. पाकिस्तान में नई सत्तासीन हुई इमरान खान की सरकार के आने के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल समझौते पर कोई बैठक हो रही है.
सूखे इलाके में पड़ता है पाकिस्तान-विदेश मंत्री
भारत-पाकिस्तान के बीच हो रही इस अहम वार्ता से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने स्थानीय मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच जल आयोग की बैठक काफी समय से नहीं हुई थी. यह दो देशों के बीच क्षेत्र का नहीं बल्कि पानी की समस्या का मामला है. पाकिस्तान सूखे इलाके में आता है, ऐसे में हम पर पानी की कमी का असर पड़ सकता है.
सिंधु जल संधि पर यूएन का रुख
संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने पिछले दिनों कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता दोनों देशों के विवादों के बीच भी बचा रहा और नदी जल बंटवारे को लेकर उपजे विवादों को सुलझाने की रूपरेखा तैयार करने में मददगार साबित हुआ.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में जल उपयोग एक ऐसा क्षेत्र रहा है जहां कुछ देशों के बीच सहयोग संभव रहा है. वहीं मध्य एशिया में अमेरिका अराल सागर को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ निकट सहयोग कर रहा है.’’
क्या रहा पिछली बातों का नतीजा
2018 के सिंतबर महीने में भी इस मुद्दे पर एक बैठक का आयोजन किया गया था. हालांकि यह बैठक पूरी तरह से बेनतीजा रही थी. इस बैठक में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका था. कयास लगाए जा रहे हैं कि आज से शुरू हो रही इस बैठक में दोनों देश किसी नतीजे पर पहुंचेंगे.
क्या है सिंधु जल समझौता
भारत, पाकिस्तान और पुननिर्माण एवं विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंक या विश्व बैंक के बीच 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल समझौता पर हस्ताक्षर हुआ था. इस पर हस्ताक्षर करने वालों में नेहरु के अलावा पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान और विश्व बैंक के डब्ल्यू ए बी इलिफ शामिल थे. वर्तमान में सिंधु नदी का जल दोनों ही देशों के जरूरी है. इससे पाकिस्तान और भारत में काफी प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं.
संधि की 6 नदियों के पानी का हुआ बंटवारा
बता दें कि सिंधु जल संधि के तहत भारत-पाकिस्तान के बीच 6 नदियों के पानी का बंटवारा हुआ है. 3 पूर्वी नदियां-रावी, व्यास और सतुलज के पानी पर भारत को पूर्ण हक दिया गया है. वहीं पश्चिमी नदियों- झेलम, चिनाब, सिंधु के पानी पर पाकिस्तान का हक तय है. हालांकि संधि में इस बात को भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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