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अटल जी की अंतिम यात्रा में पीएम सहित सभी क्यों चल रहे थे पैदल, कहीं ये वजह तो नहीं?

नई दिल्ली: अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में जन सैलाब उमड़ा और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के सभी प्रमुख नेता उनकी अंतिम यात्रा में पैदल ही चल रहे थे. वरिष्ठ पत्रकार और लखनऊ में अटल बिहारी के साथ लंबे समय तक रहने वाले अखिलेश बाजपेई ने बताया कि अटल जी भी अंतिम यात्रा में पैदल ही शामिल होते थे. उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को पैदल चलता देख, उनकी आंखें नम हो गईं, क्योंकि खुद अटल जी भी ऐसा ही करते थे.

अखिलेश वाजपेयी ने बताया कि लखनऊ कैंट से बीजेपी के विधायक रहे सतीश भाटिया की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी भी आए थे. उन्होंने बताया, 'अटल जी शवयात्रा के साथ शमशान घाट तक पैदल ही गए. इस दौरान लोगों ने उनसे बहुत अनुरोध किया कि वो गाड़ी से आएं. इस पर अटल जी ने कहा कि 'शवयात्रा में कोई गाड़ी से नहीं चलता है'. इसके साथ ही वो घाट पर सारे कर्मकांड पूरे होने तक बैठे रहे. ऐसे थे हमारे अटल जी.'

गरीबी का समारोह नहीं होना चाहिए
उन्होंने बताया, '2004 में जब लखनऊ में साड़ी कांड हुआ, उस समय अटल जी दक्षिण भारत में कहीं प्रचार कर रहे थे. दोपहर करीब 3 बजे ये दुर्घटना हुई होगी और रात आठ बजे अटल जी लखनऊ में थे. ऐसा था उनका लखनऊ से रिश्ता.' बीजेपी नेता लालजी टंडन के जन्मदिन पर चन्द्रशेखर आजाद पार्क में साड़ी वितरण समारोह के दौरान हुए हादसे में 22 महिलाओं की मृत्यु हो गई थी.

आज लखनऊ रो रहा है
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोशल मीडिया सलाहकार राजीव बाजपेई ने बताया कि अटल जी लखनऊ के थे और लखनऊ अटल जी का था. उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि मृत्यु अटल है, और अटल जी अमर हैं, फिर भी आज पूरा लखनऊ रो रहा है.' ये कहते हुए उनका गला रुंध गया और वो रो पड़े.

उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा, 'लखनऊ में वो महान राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी नहीं थे. वो तो यहां किसी के भईया, किसी के चाचा थे. कोई उनकी दीदी थीं, तो कोई भउजाई.' अटल बिहारी को जब लखनऊ किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया जाता तो वो खिंचाई करते हुए कहते थे कि लगता है कि लखनऊ वालों का प्यार कुछ कम हो रहा है. वो कहते थे, 'अपने ही घर में कोई अतिथि होता है क्या.' कई बात तो वो अंतिम समय में किसी और को मुख्य अतिथि बना देते थे और खुद मेजबान बन जाते थे.

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