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त्रासदी क्या होती है, राष्ट्रीय आपदा घोषित होने पर क्या-क्या मिलती हैं सहूलियतें

नई दिल्‍ली: केरल बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है. राज्‍य के 12 जिले इससे प्रभावित हैं. करीब ढाई लाख लोग बेघर हो गए हैं. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है. राज्‍य को कुल 8 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है. इस बीच, कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी से मांग की है कि केरल की इस बाढ़ को राष्‍ट्रीय आपदा घोषित किया जाए. आइए जानते हैं कि कब सरकार किसी विभीषिका को राष्‍ट्रीय आपदा घोषित करती है और इससे कितनी सहूलियतें बढ़ जाती हैं.

इससे पहले भी कई राज्‍य बाढ़ की त्रास्‍दी झेल चुके हैं. तब भी ऐसी ही मांग उठी थी. 1999 में जब ओडिशा में चक्रवात से भारी तबाही हुई थी तब तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 250 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की थी. इस सहायता राशि की मदद से राज्‍य आपदा से हुए नुकसान से निपट पाया. लेकिन इसे राष्‍ट्रीय आपदा नहीं घोषित किया गया. इसके बाद 2013 में केदारनाथ और 2014 में जम्‍मू-कश्‍मीर में बाढ़ से तबाही को राष्‍ट्रीय आपदा का दर्जा दिया गया.

क्‍या होती है राष्‍ट्रीय आपदा
पहले की आपदाओं को आखिर क्‍यों राष्‍ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया गया. इसके पीछे तर्क सिर्फ इतना है क्‍योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के मुताबिक किसी भी आपदा को राष्‍ट्रीय आपदा घोषित करने का कोई स्‍पष्‍ट प्रावधान नहीं है. हां, कानून में यह जरूर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार किसी आपदा को राष्‍ट्रीय आपदा घोषित करती है तो उसे राहत और बचाव कार्य के लिए 100% ग्रांट देनी पड़ेगी. द वीकने गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि केरल की बाढ़ को राष्‍ट्रीय आपदा घोषित करने से कोई खास लाभ नहीं होगा. राज्‍य को वित्‍तीय सहायता पहले ही दी जा रही है. केंद्र सरकार को भविष्‍य में भी राज्‍य को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए वित्‍तीय मदद देना जारी रखना चाहिए.

अधिकारी ने कहा कि आपदा को राष्‍ट्रीय आपदा तभी घोषित किया जाता है जब राज्‍य का आपदा प्रबंधन कोष कम पड़ जाए. इसके बाद केंद्र सरकार की जिम्‍मेदारी होती है कि वह आपदा से निपटने के लिए 100% ग्रांट उपलब्‍ध कराए. केरल के मामले में केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ को पहले ही लगा दिया है. साथ ही केंद्र सरकार की अन्‍य एजेंसियां भी राज्‍य में आपदा राहत कार्यों में मदद कर रही हैं. एक अधिकारी ने कहा कि मौजूदा कानून में लोकल या नेशनल डिजास्‍टर में फर्क नहीं समझाया गया है. इसमें कहा गया है कि देश में आई कोई भी आपदा से राष्‍ट्रीय आपदा की तरह निपटना है.

अमेरिका में राष्‍ट्रपति घोषित करता है राष्‍ट्रीय आपदा
अमेरिका में अगर किसी तूफान या चक्रवात से नुकसान होता है तो वहां के राष्‍ट्रपति ही उसे राष्‍ट्रीय आपदा घोषित करते हैं. इसके बाद फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी राहत कार्य की जिम्‍मेदारी ले लेती है. राष्‍ट्रपति की घोषणा के बाद ही केंद्रीय एजेंसियां राज्‍यों की मदद के लिए आगे आती हैं. हालांकि भारत में ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार सेना या एनडीआरएफ को आपदा राहत कार्य में मदद देने के लिए कहे. जब भी कोई राज्‍य इस विभीषिका में पड़ता है तो वह केंद्र सरकार से मदद मांगता है. इसके साथ ही केंद्र उसे मदद मुहैया करा देता है. इसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और एनडीआरएफ के लोग राज्‍य में पहुंच कर फंसे हुए लोगों को बचाते हैं और उन्‍हें सुरक्षित स्‍थान पर ले जाते हैं. इस मामले में भारत में अमेरिका से ज्‍यादा अच्‍छी व्‍यवस्‍था है.

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