नई दिल्ली: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है. जाहिर है इसके लिए जमीन अधिग्रहण करना एक बहुत बड़ा काम है. सरकार ने 508 किलोमीटर लंबे इस रूट पर पड़ने वाले तमाम गांवों के लिए एक विशेष पहल की है. सरकार इस रूट पर ट्रेन के कोच को एक क्लिनिक के रूप में बदलकर रूट से जुड़े गांव के लोगों को मेडिकल सुविधा प्रदान करेगी. इस रूट में कई गांव तो ऐसे हैं जहां मेडिकल सुविधा नहीं है.
सितंबर में होगी क्लिनिक की शुरुआत
इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि रेलवे की इस पहल के पीछे एक और उद्देश्य यह भी है कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण में आसानी पैदा हो सके. गांव वालों की यह मांग भी थी कि हमें इलाज की सुविधा दी जाए. माना जा रहा है कि इस तरह के पहले क्लिनिक की शुरुआत सितंबर के पहले सप्ताह में हो जाएगी.
इस तरह के क्लिनिक शुरू करने का फैसला तब किया गया जब, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने पाया कि इन गांव में रहने वाले लोग जिनके पास इस रूट के लिए देने को जमीन हैं, ने स्वास्थ्य, शिक्षा से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग की है. उन्होंने पीने के पानी की भी मांग की है. इस रूट पर जमीन अधिग्रहण का काम फिलहाल चल रहा है. रेलवे इस पहल से यह मानकर चल रहा है कि इससे लोगों में विश्वास पैदा होगा और जमीन अधिग्रहण में तेजी आएगी.
रूट में कुल 1400 हेक्टेयर जमीन
एनएचएसआरसीएल के मुताबिक बुलेट ट्रेन के इस रूट में कुल 1400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है, लेकिन अब तक महज 0.9 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो सका है. महाराष्ट्र सीमा में गांव वालों को इन जमीन की कीमत बाजार मूल्य से पांच गुणा अधिक मिलेगी और गुजरात में वर्ष 2016 के कानून के मुताबिक 25 प्रतिशत प्रीमियम के साथ कीमत मिलेगी.
एनएचएसआरसीएल के प्रबंध निदेशक अचल खरे कहते हैं कि हमें कई तरह के निवेदन प्राप्त हुए हैं. इन सुविधाओं को गांववालों तक पहुंचाने के लिए हम स्थानीय जिला प्रशासन से समन्वय कर रहे हैं. हम इन गांवों में डॉक्टर और नर्स उपलब्ध कराएंगे जहां इनका पहुंचना बहुत कठिन है. उन्होंने बताया कि कुछ रेल कंटेनर खरीदे जा चुके हैं और कुछ कंटेनर आकार में रेल कोच बाद में खरीदे जाएंगे. कुल चार कोच होंगे जिसमें दो कोच क्लिनिक के रूप में लगाएं जाएंगे. कोच की अन्दर की बनावट में जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे.
सितंबर में होगी क्लिनिक की शुरुआत
इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि रेलवे की इस पहल के पीछे एक और उद्देश्य यह भी है कि बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण में आसानी पैदा हो सके. गांव वालों की यह मांग भी थी कि हमें इलाज की सुविधा दी जाए. माना जा रहा है कि इस तरह के पहले क्लिनिक की शुरुआत सितंबर के पहले सप्ताह में हो जाएगी.
इस तरह के क्लिनिक शुरू करने का फैसला तब किया गया जब, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने पाया कि इन गांव में रहने वाले लोग जिनके पास इस रूट के लिए देने को जमीन हैं, ने स्वास्थ्य, शिक्षा से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग की है. उन्होंने पीने के पानी की भी मांग की है. इस रूट पर जमीन अधिग्रहण का काम फिलहाल चल रहा है. रेलवे इस पहल से यह मानकर चल रहा है कि इससे लोगों में विश्वास पैदा होगा और जमीन अधिग्रहण में तेजी आएगी.
रूट में कुल 1400 हेक्टेयर जमीन
एनएचएसआरसीएल के मुताबिक बुलेट ट्रेन के इस रूट में कुल 1400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है, लेकिन अब तक महज 0.9 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो सका है. महाराष्ट्र सीमा में गांव वालों को इन जमीन की कीमत बाजार मूल्य से पांच गुणा अधिक मिलेगी और गुजरात में वर्ष 2016 के कानून के मुताबिक 25 प्रतिशत प्रीमियम के साथ कीमत मिलेगी.
एनएचएसआरसीएल के प्रबंध निदेशक अचल खरे कहते हैं कि हमें कई तरह के निवेदन प्राप्त हुए हैं. इन सुविधाओं को गांववालों तक पहुंचाने के लिए हम स्थानीय जिला प्रशासन से समन्वय कर रहे हैं. हम इन गांवों में डॉक्टर और नर्स उपलब्ध कराएंगे जहां इनका पहुंचना बहुत कठिन है. उन्होंने बताया कि कुछ रेल कंटेनर खरीदे जा चुके हैं और कुछ कंटेनर आकार में रेल कोच बाद में खरीदे जाएंगे. कुल चार कोच होंगे जिसमें दो कोच क्लिनिक के रूप में लगाएं जाएंगे. कोच की अन्दर की बनावट में जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जाएंगे.
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