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स्मोकिंग करने वाले के पास भी रहना है खतरनाक, बच्चों पर पड़ता है सबसे बुरा असर

वॉशिंगटन: धूम्रपान करने वालों के निकट एक घंटा रहना भी किशोरों के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है. उन्हें सांस लेने और व्यायाम करने में दिक्कत हो सकती है. एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है. अध्ययन में 2014-15 के एक सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें अमेरिका में 12 साल या उससे अधिक आयु के लोगों में तंबाकू के इस्तेमाल और उससे जुड़ी संबंधित समस्याओं को शामिल किया गया है. इस अध्ययन में धूम्रपान नहीं करने वाले 7,389 ऐसे किशोरों को शामिल किया गया है, जिन्हें अस्थमा की शिकायत नहीं है.

अमेरिका के सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि तंबाकू धूम्रपान करने वालों के संपर्क में रहने वाले किशोरों में श्वसन संबंधी समस्याएं विकसित होने का खतरा अधिक होता है. इस अनुसंधान का प्रकाशन ‘पीडीऐट्रिक्स’ जर्नल में किया गया है.

स्मोकिंग को लेकर हुआ चौकाने वाला खुलासा, जानना है जरूरी
भारत में स्मोकिंग करने वाले प्रत्येक 10 में से सात लोग स्मोकिंग को सेहत के लिए खतरनाक समझते हैं, इनमें से 53 फीसदी लोग स्मोकिंग छोड़ने की कोशिशों में नाकाम रहे हैं . गैर सरकारी संस्था फाउन्डेशन फॉर स्मोक फ्री वल्र्ड द्वारा जारी आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि देश में स्मोकिंग करने वाले प्रत्येक 10 में से सात लोग स्मोकिंग को सेहत के लिए खतरा मानते हैं और 53 फीसदी लोग स्मोकिंग छोड़ने की कोशिशों में नाकाम साबित हुए हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मोकिंग करने वालों को ऐसे विकल्प और तरीके उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे लम्बा और सेहतमंद जीवन जी सकें.

फाउन्डेशन फॉर ए स्मोक फ्री वल्र्ड के अध्यक्ष डेरेक याच ने कहा, "आंकड़ों में वही तथ्य सामने आए हैं जो दशकों से हम सभी जानते हैं- कि स्मोकिंग करने वाले लोग स्मोकिंग छोड़ना चाहते हैं लेकिन इसमें नाकाम रहते हैं . " उन्होंने रिपोर्ट में सामने आए कुछ परिणामों के बारे में कहा, "स्मोकिंग करने वाले 68 फीसदी लोगों ने बताया कि स्मोकिंग के बुरे प्रभावों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं.

51 फीसदी लोगों ने बताया कि वे स्मोकिंग छोड़ने की योजना बना रहे हैं
स्मोकिंग करने वाले 51 फीसदी लोगों ने बताया कि वे स्मोकिंग छोड़ने की योजना बना रहे हैं. स्मोकिंग करने वाले 41 फीसदी लोग, जो इसे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनका कहना है कि उन्हें इसके लिए किसी की मदद की जरूरत है. स्मोकिंग करने वाले 25 फीसदी लोग स्मोकिंग छोड़ने के लिए ई-सिगरेट या वेपिंग डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं. " इस अध्ययन के तहत 13 देशों के 17,000 प्रतिभागियों पर सर्वेक्षण किया गया, सर्वेक्षण में पता चला है कि दुनिया भर में स्मोकिंग पर रोक लगाना एक बड़ी चुनौती है.

भारत में 10.4 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू के सेवन से अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं 
साफ है कि स्मोकिंग करने वाले लोग स्मोकिंग के लिए अपनी सेहत और आर्थिक कल्याण को भी दांव पर लगा रहे हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर लोग स्मोकिंग छोड़ना चाहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले भारत में 10.4 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू के सेवन से अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं .

बीड़ी इन लोगों के लिए सस्ता विकल्प है. देश में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू के रूप में बीड़ी का सेवन करते हैं. पारंपरिक सिगरेट की तुलना में बीड़ी पर कर में छूट के चलते यह सस्ती भी पड़ती है.  ऐसे में साफ है कि भारत में अगर हम स्मोकिंग पर रोक लगाना चाहते हैं, तो हमें अन्य देशों की तुलना विशेष उपाय अपनाने होंगे.

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