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आशुतोष का AAP पर पहला बड़ा हमला, कहा- 'चुनाव में पार्टी ने मुझे मेरा सरनेम जोड़ने के लिए मजबूर किया'

नई दिल्‍ली : आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद आशुतोष ने पहली बार अरविंद केजरीवाल के नेतृत्‍व वाली इस पार्टी पर खुलेआम हमला बोला है. उन्‍होंने कहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जब उन्‍हें चांदनी चौक से बतौर प्रत्‍याशी मैदान में उतारा था, तब उन पर अपने नाम के आगे 'सरनेम' लगाने का दवाब बनाया गया था, जबकि उन्‍होंने अपने 23 साल के पत्रकारिता करियर में ऐसा कभी नहीं किया. उन्‍होंने इसे पार्टी की वोटबैंक और कास्‍ट की पॉलिटिक्‍स बताया. आशुतोष ने ट्वीट कर 'आप' पर निशाना साधा.

53 वर्षीय पूर्व आप नेता ने बुधवार सुबह ट्वीट कर कहा, 'मेरे पत्रकारिता के 23 सालों के करियर में किसी ने मेरी जाति और सरनेम नहीं पूछा. सभी मुझे मेरे नाम से जानते हैं. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में जब मुझे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलवाया गया तो मेरे विरोध के बावजूद मेरे सरनेम का उल्‍लेख किया गया था. बाद में मुझे कहा गया कि सर आप जीतोगे कैसे, आपकी जाति के यहां काफी वोट हैं'.








ashutosh @ashutosh83B







In 23 years of my journalism, no one asked my caste, surname. Was known by my name. But as I was introduced to party workers as LOKSABHA candidate in 2014 my surname was promptly mentioned despite my protest. Later I was told - सर आप जीतोगे कैसे, आपकी जाति के यहाँ काफी वोट हैं ।







बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने आशुतोष को चांदनी चौक लोकसभा सीट से बतौर प्रत्‍याशी मैदान में उतारा था. यहां उनके सामने भाजपा के डॉ. हर्षवर्धन मैदान में थे, जिनसे उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा था.




उल्‍लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता आशुतोष ने बीते 15 अगस्‍त को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफे की वजह निजी कारण को बताया. आशुतोष ने ट्वीट कर इस्तीफे का ऐलान किया.

उन्होंने ट्वीट में पत्रकारों से कहा कि वे इस मसले पर किसी सवाल का जवाब नहीं देंगे. आशुतोष ने कहा कि हर यात्रा का एक अंत होता है. आपके साथ यात्रा बेहद क्रांतिकारी और खूबसूरत रहा. मैं इस्तीफा देते हुए पार्टी की कार्यकारिणी परिषद से आग्रह करता हूं कि वे इसे स्वीकार करें मैंने विशुद्ध निजी कारणों से यह फैसला लिया है. इस यात्रा के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी कार्यकर्ता के प्रति आभार प्रकट करता हूं. इसके साथ ही आशुतोष ने मीडिया की कि कृपया मेरी निजता का सम्मान करें, क्योंकि मैं इस संदर्भ में किसी भी प्रकार को कोई और बयान नहीं दूंगा.

दरअसल, इस साल की शुरुआत में दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में पार्टी की तरफ से उनको प्रबल दावेदारों की सूची में गिना जाता था, लेकिन अंत में उन्हें जगह नहीं मिली. सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से ही वह पार्टी में हाशिए पर माने जा रहे थे. राज्यसभा चुनावों के मसले पर ही उसके बाद कुमार विश्वास ने बगावत कर दी थी. अब आशुतोष के इस्तीफे को उसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है.

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