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निर्दोष थे शहीद भगत सिंह, पाकिस्‍तान केे लाहौर हाईकोर्ट में 5 सितंबर को होगी सुनवाई

नई दिल्‍ली/लाहौर : ब्रिटिश सरकार द्वारा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी देने में इस्‍तेमाल गैर संवैधानिक हथकंडे और उन पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के मामले में पाकिस्‍तान के लाहौर हाईकोर्ट में आगामी 5 सितंबर को सुनवाई होगी. दरअसल, पाकिस्‍तान की भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन सरहद पार देश के इन तीन शहीदों को निर्दोष साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है. फाउंडेशन के प्रधान वकील इम्तियाज रशीद कुरैशी उच्‍च न्‍यायालय में इस मामले में पैरवी कर रहे हैं.

पाकिस्‍तान में लंबे समय से लड़ी जा रही है यह कानूनी लड़ाई
इम्तियाज रशीद कुरैशी पाकिस्‍तान में यह कानूनी लड़ाई लंबे समय से लड़ रहे हैं कि ब्रितानी सरकार द्वारा ज्‍यूडिशियल सिस्‍टम की आड़ लेकर गैर संवैधानिक तरीके से शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई.

भगत सिंह की न्यायिक हत्या की गई थी- इम्तियाज
उल्‍लेखनीय है कि इम्तियाज कुरैशी का कहना है कि भगत सिंह की न्यायिक हत्या की गई थी और वो बेगुनाह थे. शहीद-ए-आजम भगत सिंह को देश का सर्वोच्च वीरता पदक ‘निशान ए हैदर’ दिया जाना चाहिए. इम्तियाज का इस मामले में कहना है कि जिस केस में भगत सिंह को फांसी दी गई, उस प्राथमिकी में उनका नाम तक नहीं था और ना ही इस मामले में किसी की गवाही ली गई. उन्‍होंने अदालत से यह भी कहा कि खुद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी थी. उनका यह भी कहना है कि भगत सिंह हमारे लिए भी हीरो हैं. भगत सिंह की फांसी के करीब 83 साल बाद लाहौर हाईकोर्ट में इम्तियाज ने याचिका दायर की थी. 24 मई 2013 को इस मुकदमे में पहली सुनवाई हुई थी.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायक भगत सिंह को ब्रिटिश पुलिस अफसर सांडर्स की हत्या के मामले 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी. उनका जन्म 28 सितंबर 1907 में पाकिस्तान में हुआ था.

संगठन ने कहा, भगत सिंह हमारे नायक हैं
भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार को ताजा याचिका देकर यह भी कहा था कि भगत सिंह ने उपमहाद्वीप की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया था. इसने अपने आवदेन में कहा, ‘‘पाकिस्तान के संस्थापक कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने स्वतंत्रता सेनानी को यह कहते हुए श्रद्धांजलि दी थी कि उपमहाद्वीप में उनके जैसा कोई वीर व्यक्ति नहीं हुआ है.’’ संगठन ने कहा, ‘‘भगत सिंह हमारे नायक हैं और वह मेजर अजीज भट्टी की तरह ही सर्वोच्च वीरता पुरस्कार (निशान ए हैदर) पाने के हकदार हैं जिन्होंने भगत सिंह की वीरता पर लिखा था और उन्हें हमारा नायक तथा आदर्श घोषित किया था.’’

वहीं, दूसरी तरफ भारतीय वकील मोमिन मलिक ने भी इस बाबत सारे तथ्‍यों को एकत्र किया है और उसे किताब की शक्‍ल दी है, जिसे जल्‍द ही सार्वजनिक किया जाएगा. मोमिन का कहना है कि उक्‍त घटनाक्रम पर वह दो किताबें लिख चुके हैं, जिनमें पहली है ज्‍यूडिशियल मर्डर ऑफ भगत सिंह और दूसरी भगत सिह के गुनहगार कौन...

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