नई दिल्ली/हापुड़: मॉब लिन्चिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को कानून बनाने को कहा है. कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 4 सप्ताह के भीतर मॉब लिन्चिंग पर दिशा निर्देश जारी करे. कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा, 'कोई भी नागरिक अपने आप में कानून नहीं बन सकता है. लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती.' कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है. केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हापुड़ में मॉब लिन्चिंग के शिकार हुए कासिम के भाई सलीम ने कहा कि उन्हें कोर्ट से न्याय मिलेगा. उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है. सलीम ने कहा कि गाय की स्मगलिंग के आरोप में किसी की हत्या नहीं की जा सकती है. बता दें 18 जून को हापुड़ के पिलखुआ में गोकशी के आरोप में कासिम की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब 14 जुलाई को कर्नाटक में बच्चा चोरी के शक में भीड़ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पीट-पीट कर हत्या कर दी. 2017 से लेकर अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब बच्चा चोरी की अफवाह के कारण भीड़ ने किसी शख्स को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया हो. आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से लेकर अब तक देश में मॉब लिन्चिंग की वजह से 100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
क्या कहता है सर्वे
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2010 से लेकर 2017 के बीच मॉब लिन्चिंग की 63 घटनाएं हुई, जिसमें 28 लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. आपको जानकर हैरत होगी कि ऐसी घटनाओं में से 52 फीसदी अफवाहों पर आधारित थीं. एक सर्वे के मुताबिक, मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से कुल घटनाओं में से 97 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. मॉब लिन्चिंग की 63 घटनाओं में से 32 घटनाएं गायों से संबंधित थी, और अधिकतर मामलों में राज्य के अंदर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हापुड़ में मॉब लिन्चिंग के शिकार हुए कासिम के भाई सलीम ने कहा कि उन्हें कोर्ट से न्याय मिलेगा. उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा विश्वास है. सलीम ने कहा कि गाय की स्मगलिंग के आरोप में किसी की हत्या नहीं की जा सकती है. बता दें 18 जून को हापुड़ के पिलखुआ में गोकशी के आरोप में कासिम की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब 14 जुलाई को कर्नाटक में बच्चा चोरी के शक में भीड़ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पीट-पीट कर हत्या कर दी. 2017 से लेकर अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जब बच्चा चोरी की अफवाह के कारण भीड़ ने किसी शख्स को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया हो. आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से लेकर अब तक देश में मॉब लिन्चिंग की वजह से 100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
क्या कहता है सर्वे
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2010 से लेकर 2017 के बीच मॉब लिन्चिंग की 63 घटनाएं हुई, जिसमें 28 लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. आपको जानकर हैरत होगी कि ऐसी घटनाओं में से 52 फीसदी अफवाहों पर आधारित थीं. एक सर्वे के मुताबिक, मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से कुल घटनाओं में से 97 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. मॉब लिन्चिंग की 63 घटनाओं में से 32 घटनाएं गायों से संबंधित थी, और अधिकतर मामलों में राज्य के अंदर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में थी.
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