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चाय बेचने से लेकर स्वयंभू बाबा तक, जानें दाती महाराज का सफर

नई दिल्ली : पहले आसाराम बापू, फिर बाबा राम रहीम और अब दाती महाराज. धर्म के ठेकेदार बने स्वयंभू बाबाओं की पोल एक के बाद एक खुल रही है. धर्म की आड़ में ये तथाकथित साधु-बाबा अपना खुद का साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं. आकूत दौलत के स्वामी इन बाबाओं के असली चेहरे आए दिन जनता के सामने आ रहे हैं. दाती महाराज भी उन बाबाओं में से एक हैं. कभी चाय की दुकान पर काम करने वाला मामूली सा मदन लाल कुछ ही सालों में पूरे देश में प्रसिद्ध शनिधाम आश्रम का मालिक बन बैठा. अब उस पर उसी की एक शिष्या ने जब बलात्कार का आरोप लगाया तो दूसरों के कष्टों को पलों में दूर करने वाला दाती महाराज पुलिस से बचने के लिए छिपा हुआ है.

दाती महाराज पर लगे रेप का मामला अब दिल्ली की क्राइम ब्रांच देख रही है. क्राइम ब्रांच ने बीते दो दिनों में दाती महाराज के दिल्ली और राजस्थान के ठिकानों पर छापे मारे. पुलिस की टीम ने पीड़िता के साथ उन स्थानों की भी जांच की जहां पीड़िता ने रेप होने का आरोप लगाया है.

निजी सेवादार ने लगाए गंभीर आरोप
दाती महाराज की सेवा में पिछले 15 वर्षों से लगे उनके एक सेवादार अचानक उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं. गुरुग्राम के सोहना में रहने वाला सचिन जैन पिछले 15 सालों से दाती महाराज की सेवा में था. अब सचिन जैन खुलकर दाती महाराज पर आरोप लगा रहा है.  उन्होंने बताया कि दाती महाराज के कई बड़े नेताओं से भी गहरे संबंध रहे हैं. दाती महाराज शनिधाम में आने वाले अपने शिष्यों से कहा करते थे कि आश्रम पैसों से चलता है, पानी से नहीं. इस तरह दाती महाराज ने करोड़ों-अरबों की अकूत संपत्ति अर्जित की.

शनिधाम के संस्थापक दाती महाराज मुश्किल में, महिला ने लगाया रेप का आरोप, FIR दर्ज

केवल महिलाएं ही करती हैं सेवा
सचिन ने एक निजी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि दाती महाराज अपने आसपास केवल महिला सेवादारों को रखता था. पुरुष सेवादार आश्रम में साफ-सफाई के काम करने और उनका सामान उठाने का काम करते हैं. निजी काम केवल महिला सेवादार ही करती हैं. उन्होंने कहा कि सारी सच्चाई तो शनिधाम के अंदर ही दफन है. सचिन ने बताया कि दाती महाराज ने उसे आत्महत्या करने तक के लिए उकसाया और वह डिप्रेशन में चला गया. उसने बताया कि जब वह स्वस्थ्य हुआ तो उसने दाती महाराज से उसके साथ ऐसा क्यों करने का सवाल किया. इस पर दाती महाराज उल्टा सचिन पर उल्टे-सीधे आरोप लगाने लगा.

राजस्थान के अलावास गांव में हुआ जन्म
दाती महाराज का असली नाम मदन लाल है और वह राजस्थान के पाली जिले के अलावास गांव का रहने वाला है और वह मेघवाल समुदाय से संबंध रखता है. मेघवाल समुदाय ढोल बजाकर अपना परिवार चलाता है. मदन लाल के पिता देवाराम  भी ढोल बजाया करते थे. जानकार बताते हैं कि जब मदन चार महीने का था तब उसकी मां का देहांत हो गया. मां के बाद पिता देवाराम ने ही बच्चों की देखभाल की, लेकिन कुछ समय बाद देवाराम की भी मृत्यु हो गई.

मदनलाल पंडित चायवाला
बहुत छोटी उम्र में ही मदन गांव के ही एक शख्स के साथ दिल्ली आ गया और पेट भरने के लिए चाय की दुकान पर काम करने लगा. यहां काम सीखकर मदन लाल ने फतेहपुर बेरी में अपनी चाय की दुकान खोल ली और नाम रखा मदनलाल पंडित चायवाला. चाय की दुकान करते-करते वह किसी कैटरिंग वाले के साथ जुड़ गया. वहां कैटरिंग का काम सीखने के बाद उसने खुद अपना कैटरिंग का काम शुरू कर दिया और उसका कैटरिंग का काम भी अच्छा चल निकला.

ज्योतिषी से संपर्क
जानकार बताते हैं कि 1996 में मदन लाल राजस्थान के एक ज्योतिषी के संपर्क में आया और ज्योतिषी से उसने जन्मपत्री बनाने तथा उसे समझने का काम सीख लिया. मदन को ज्योतिषी की इतना चसका लगा कि उसने कैलाश कॉलोनी में खुद का अपना एक ज्योतिषी केंद्र ही खोल लिया और फिर लोगों के भविष्य बांचने लगा. और खुद को दाती मदन राजस्थानी कहलवाने लगा. बताते हैं कि दाती महाराज बने मदन लाल ने एक बार एक नेता की चुनाव जीतने की भविष्यवाणी की और वह नेता चुनाव भी जीत गया. इस पर नेताजी ने खुश होकर फतेहपुर बेरी में स्थित अपना पुश्तैनी मंदिर दाती महाराज को दान में दे दिया. इस तरह दाती महाराज की किस्मत की गाड़ी दौड़ने लगी.

महामंडलेश्वर की उपाधि
दाती महाराज ने आसपास की जमीन पर भी कब्जे कर वहां 7 एकड़ जमीन में शनिधाम नाम से एक आश्रम की स्थापना कर डाली. इस दौरान उसने टीवी चैनलों पर भी अपने कार्यक्रम देने शुरू कर दिए. इस तरह राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकाला मदन लाल शनिधाम का स्वंयभू बाबा दाती महाराज बन कर पूरे देश में चमकने लगा और शनिधाम पर नोटों की बरसात होने लगी.  दाती महाराज को 2010 में हरिद्वार में हुए कुंभ मेले में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई. महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने के बाद उसने अपना नाम श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती जी महाराज रख लिया. इससे उनकी प्रसिद्धी और तेजी से फैल गई.

पैतृक गांव में भी आश्रम
इस तरह दाती महाराज ने अपने पैतृक गांव अलावास में भी शनिदेव का एक बड़ा आश्रम बना डाला. यहां उसने बच्चों के लिए एक स्कूल भी खोला हुआ है और एक बड़ी गौशाला बनाई हुई है. स्कूल में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं. अब दाती महाराज एक मेडिकल कॉलेज भी खेलने जा रहे थे. इसके लिए उन्होंने जमीन लेकर काम भी शुरू करवा दिया है.

प्रसिद्धि के लिए मीडिया का सहारा
दाती महाराज ने खुद को चमकाने लिए मीडिया का खूब सहारा लिया. बताते हैं कि 'शनि शत्रु नहीं मित्र है' नामक कार्यक्रम वह पहले पैसे देकर टीवी चैनलों पर चलवाया करता था. प्रसिद्धि मिलने के बाद कई चैनलों पर उसके कार्यक्रम आने लगे. शनि अमावस्या पर वह बड़ा कार्यक्रम आयोजित करवाता है, जिसमें उसे देश-विदेश से करोड़ों रुपये चंदा मिलता है. शनिधाम डॉट कॉम से उसकी एक वेबसाइट भी है. और 60 से अधिक पत्रिकाओं का प्रकाशन हो होता है.

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