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जम्‍मू-कश्‍मीर: राज्‍य में 6 साल तक रहा है लगातार गवर्नर शासन

जम्‍मू-कश्‍मीर में पिछले चार दशकों में आठवीं बार राज्‍यपाल शासन लगा है.


जम्‍मू-कश्‍मीर में पीडीपी-बीजेपी सरकार गिरने के बाद एक बार फिर राज्‍यपाल शासन लगा दिया गया है. जम्‍मू-कश्‍मीर में राज्‍यपाल शासन लगने का पुराना इतिहास रहा है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि पिछले चार दशकों में आठवीं बार राज्‍यपाल शासन लगा है. इस कड़ी में आइए जानते हैं कि कब-कब और कितने समय के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर में राज्‍यपाल शासन लगा है:

1. 26 मार्च, 1977 (105 दिन)
1975 में इंदिरा गांधी से समझौते के तहत कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच गठबंधन हुआ. 26 मार्च, 1977 को शेख अब्‍दुल्‍ला की सरकार से कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया. नतीजतन चुनाव हुआ और उसके बाद शेख अब्‍दुल्‍ला फिर से जीतकर सत्‍ता में आए.

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2. 6 मार्च, 1986
नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्‍दुल्‍ला की सरकार के खिलाफ 1984 में पार्टी के नेता गुलाम मोहम्‍मद डार ने बगावत कर दी. कांग्रेस ने डार को समर्थन दे दिया. लेकिन छह मार्च, 1986 को समर्थन वापस ले लिया. उसके बाद 246 दिनों तक गवर्नर शासन लगा रहा. इस शासन का खात्‍मा तभी हुआ जब फारूक अब्‍दुल्‍ला और राजीव गांधी के बीच समझौता हुआ.

3. 19 जनवरी, 1990 (6 साल, 264 दिन)
अब तक सबसे लंबी अवधि के लिए गवर्नर शासन लगा. इसकी शुरुआत तब हुई जब उग्रवाद बढ़ने पर जगमोहन को राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया. इसके विरोध में फारूक अब्‍दुल्‍ला ने इस्‍तीफा दे दिया. नतीजतन छह साल से भी अधिक समय तक गवर्नर शासन रहा. उसके बाद तकरीबन साढ़े नौ साल के अंतर के बाद 1996 में जम्‍मू-कश्‍मीर में चुनाव हुए. नेशनल कांफ्रेंस फिर सत्‍ता में आई.

4. 18 अक्‍टूबर, 2002 (15 दिन)
2002 के चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति उभरी. मुख्‍यमंत्री फारूक अब्‍दुल्‍ला ने केयरटेकर सीएम बनने से इनकार कर दिया. नतीजतन 15 दिनों के लिए गवर्नर शासन लगाया गया. दो नवंबर, 2002 को कांग्रेस, पीडीपी और निर्दलीयों ने मिलकर सरकार बनाई.

5. 11 जुलाई, 2008 (178 दिन)
अमरनाथ भूमि विवाद के चलते पीडीपी ने गुलाम नबी आजाद के नेतृत्‍व में कांग्रेस सरकार से समर्थन खींच लिया. नतीजतन उसके बाद 178 दिनों तक गवर्नर शासन रहा. उसके बाद हुए चुनावों में 5 जनवरी, 2009 को नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्‍दुल्‍ला जम्‍मू-कश्‍मीर के मुख्‍यमंत्री बने.

6. 9 जनवरी, 2015 (51 दिन)
दिसंबर, 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति एक बार फिर उभरी. उमर अब्‍दुल्‍ला ने इस्‍तीफा दे दिया. नतीजतन 51 दिनों तक गवर्नर शासन लगाया गया. इस दौरान पीडीपी और बीजेपी के बीच चुनाव बाद गठबंधन हुआ और एक मार्च, 2015 को मुफ्ती मोहम्‍मद सईद मुख्‍यमंत्री बने.

7. 8 जनवरी, 2016
मुफ्ती मोहम्‍मद सईद के निधन के बाद पीडीपी-बीजेपी गठबंधन में असमंजस की स्थिति बनी रही. उसके बाद चार अप्रैल, 2016 को महबूबा मुफ्ती ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली.

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