मुखपत्र सामना में कहा है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्णबहुमत नहीं मिलने पर बीजेपी प्रधानमंत्री के पद के लिए प्रणब मुखर्जी का नाम आगे कर सकती है.
मुंबई: शिवसेना ने नया शिगूफ़ा छेड़ा है. मुखपत्र सामना में कहा है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्णबहुमत नहीं मिलने पर बीजेपी प्रधानमंत्री के पद के लिए प्रणब मुखर्जी का नाम आगे कर सकती है. ऐसे हालात बनने पर विपक्षी पार्टियां खासकर कांग्रेस के सामने ऊहापोह वाले हालात बन सकते हैं. 'सामना' में शिवसेना ने कहा है कि आरएसएस तुष्टीकरण की राह पर है. आरोप लगाया है कि इन्होंने कभी भी शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को संघ मुख्यालय में नहीं बुलाया, लेकिन मुस्लिमों के लिए इफ्तार आयोजित कर रहा है.
शिवसेना ने कहा है कि आरएसएस ने कांग्रेस के खांटी नेता को अपने मुख्यालय में बुलाकर संदेश दे दिया है कि 2019 के आम चुनाव को लेकर बीजेपी की रणनीति क्या है. अगर त्रिशंकु लोकसभा के हालात बनते हैं तो प्रणब मुखर्जी के चेहरे को आगे कर दिया जाएगा, जो सर्वमान्य नेता साबित हो सकते हैं.
यहां गौर करने वाली बात यह है भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि जब किसी पूर्व राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई हो. हालांकि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं. प्रधानमंत्री बनने के लिए लोकसभा या राज्यसभा की सदस्यता अनिवार्य होती है.
उद्धव ने अमित शाह पर साधा निशाना
मालूम हो कि नाराज सहयोगी पार्टी शिवसेना को मनाने के प्रयास के तहत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के उद्धव ठाकरे से मुलाकात करने के एक दिन बाद शिवसेना प्रमुख ने कहा कि अभी जो कुछ भी हो रहा है, वह ‘सब ड्रामा’ है.
मुंबई के पास पालघर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा, ‘अब जो कुछ भी हो रहा है वह सब ड्रामा है.’ उल्लेखनीय है कि पालघर लोकसभा सीट के लिए हाल में हुए उपचुनाव में शिवसेना उम्मीदवार बीजेपी उम्मीदवार से हार गया था. ठाकरे ने दावा किया कि हार का सामना करने वाले शिवसेना उम्मीदवार श्रीनिवास वानगा ने बीजेपी को डरा दिया.
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