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नेपाल को पेट्रोल-डीजल निर्यात करेगा भारत, जल्द पूरा होगा इंटरनेशनल पाइपलाइन प्रोजेक्ट

भारत-नेपाल के बीच 69 किमी लंबे तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट के जल्दी पूरी होने की संभावना है क्योंकि इससे संबंधित ज्यादातर कार्य पूरे हो चुके हैं.


वडोदरा: भारत-नेपाल के बीच 69 किमी लंबे तेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट के जल्दी पूरी होने की संभावना है क्योंकि इससे संबंधित ज्यादातर कार्य पूरे हो चुके हैं. मोतिहारी-अमेलखगंज तेल पाइपलाइन दोनों देशों की संयुक्त निवेश प्रोजेक्ट है. कुल 440 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर भारत 320 करोड़ रुपये और नेपाल शेष 120 करोड़ रुपये निवेश करेगा. यह दक्षिण एशिया की पहली अंतरराष्ट्रीय पाइपलाइन होगी. इस परियोजना के लिये समझौते पर अप्रैल, 2015 में हस्ताक्षर किए गए थे.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कुछ दिन पहले इस प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए कहा था कि भारत की ओर से प्रोजेक्ट से जुड़ा कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और हिमालयी देश नेपाल जल्दी ही पाइपलाइन के जरिये तेल प्राप्त कर सकता है.

उन्होंने कहा, "69 किलोमीटर लंबी मोतिहारी-अमेलखगंज पाइपलाइन से नेपाल को कम लागत और पर्यावरण अनुकूल तरीके से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति हो सकेगी." पेट्रोलियम मंत्री ने सितंबर माह में अमेलेखगंज पाइपलाइन का दौरा किया था. प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार कच्चे तेल के आयात में कमी लाने तथा पर्यावरण लाभ एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए समेत जैव ईंधन पर जोर के साथ कई उपाय कर रही है. इसके अलावा तेल एवं गैस के घरेलू उत्पादन बढ़ाने, वैकल्पिक ईंधन का बेहतर उपयोग समेत कई कदम उठाए जा रहे हैं. उधर, नेपाल की सरकारी कंपनी नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (एनओसी) का कहना है कि उसके क्षेत्र का 60 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. नेपाल क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट के 39 किमी तक क्षेत्र में पाइप बिछाने का काम फरवरी तक पूरा हो जाएगा. रास्ते में आने वाले बड़े पेड़ों की कटाई का काम नेपाल टिंबर कॉर्पोरेशन द्वारा किया जाएगा. नेपाल की पेट्रोलियम मंत्रालय इसके नुकसान की भरपाई करेगा.

नेपाल के आएंगे अच्छे दिन!
प्रोजेक्ट के तहत 10.75 इंच डायमीटर वाले पाइप बिछाए जाएंगे जो 200,000 लीटर तेल की आपूर्ति एक घंटे में करेंगे. ईंधन मोतिहारी की ऑयल पंपिंग यूनिट से भेजा जाएगा. पहले फेज में नेपाल कॉर्पोरेश्न डीजल की आपूर्ति करके इस प्रोजेक्ट का ट्रायल करेगी. इस प्रोजेक्ट से नेपाल की पेट्रोल-डीजल की परिवहन लागत कम हो जाएगी.

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