नई दिल्ली: केरल में बाढ़ का पानी भले ही आहिस्ते आहिस्ते नीचे उतरने लगा हो, लेकिन लोगों की जिंदगी में मुसीबतें अभी भी जस की तस बनी हुई हैं. सूबे में अभी भी ऐसे इलाकों की कमी नहीं हैं, जहां पर लोगों की हालत अपने ही घर में बंधक जैसी बनी हुई है. घर का भूतल पानी से लबालब भरा हुआ है. पहली मंजिल में खाने के लिए जो कुछ जुटाया था, थोड़ा-थोड़ा करने अब वह भी खत्म हो चुका है.
अब निगाहें ताकने लगी हैं कि कब कोई मसीहा आए और उन्हें इस मुसीबत से निकालकर किसी सुरक्षित स्थान में पहुंचा दे. वहीं, बाढ़ में फंसे लोगों के बचाव कार्य में जुटी सेना की हालत भी इनसे जुदा नहीं है. दिन भर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के बाद सेना का हर जवान इस इंतजार में रात काटता है कि कब सूरज की पहली किरण निकले और वह रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट जाए.
बीते दिन कुछ ऐसी ही हालत एयरफोर्स के विंग कमांडर पारसनाथ की भी थी. सुबह के इंतजार में उन्होंने पूरी रात अपने हेलीकॉप्टर के पास खड़े होकर काट दी थी. सुबह की पहली किरण के साथ उनका हेलीकॉप्टर आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार था. वह अपने पायलट साथी के साथ बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए निकल चुके थे.
अलप्पुझा कस्बे छत पर मासूम के साथ नजर आईं दो महिलाएं
कुछ ही देर में उनका हेलीकॉप्टर अलप्पुझा कस्बे के ऊपर मंडरा रहा था. उनकी निगाहें लगातार सामने नजर आ रही छतों पर टिकी हुई थी. काफी देर तक उड़ान भरने के बाद विंग कमांडर पारसनाथ को एक छत पर कुछ महिलाएं हाथ हिलाती हुई नजर आईं. विंग कमांडर पारस नाथ को अपना नया लक्ष्य मिल चुका था. हेलीकॉप्टर को तुरंत छत पर दिख रहीं महिलाओं की तरफ मोड़ दिया गया.
करीब जाने पर पता चला कि इन दोनों महिलाओं के साथ एक मासूब बच्चा भी मौजूद था. कहने को यह रेस्क्यू ऑपरेशन जितना सरल था, वास्तविकता में इस परिवार को हेलीकॉप्टर तक पहुंचाना उतना ही कठिन था. समस्या यह थी कि दोनों वयस्क महिलाओं को हेलीकॉप्टर तक खींचना आसान था, लेकिन बच्चे को हेलीकॉप्टर तक कैसे लाया जाए.
मां को खींचकर हेलीकॉप्टर तक पहुंचाने में हुए सफल
समस्या यह भी थी कि विंग कमांडर मदद के लिए नीचे उतरते हैं तो इनको खींचकर हेलीकॉप्टर तक कौन लेकर आएगा. चंद सेकेंड के इंतजार के बाद विंग कमांडर ने नीचे उतरने का फैसला किया. वह रस्से के सहारे नीचे गए और महिलाओं को समझाया कि किस तरह रस्से की बेल्ट को अपने शरीर में फंसाना है. अब समस्या यह थी कि बच्चे की मां अपने बच्चे के बिना हेलीकॉप्टर में नहीं जाना चाहती थी.
विंग कमांडर महिला के साथ बच्चे को भेजना नहीं चाहते थे. उन्हें डर था कि कहीं घबराहट में महिला ने बच्चे को छोड़ दिया तो बड़ा हादसा हो सकता है. लिहाजा, विंग कमांडर ने बच्चे की मां आश्वासन दिया कि वह किसी भी कीमत में बच्चे को हेलीकॉप्टर में पहुंचाएंगे. थोड़ी न नुकर के बाद बच्चे की मां मान गई. विंग कमांडर दोबारा हेलीकॉप्टर में पहुंच गए. योजना के तहत सबसे पहले बच्चे की मां को ऊपर खींचा गया.
च्चे को अपनी बाहों में लेकर हेलीकॉप्टर तक पहुंचे विंग कमांडर
विंग कमांडर दोबारा नीचे उतरे और बच्चे को अपनी गोद में लेकर वह हेलीकॉप्टर तक पहुंचे. विंग कमांडर के ऊपर पहुंचते ही मां ने अपने बच्चे को सीने से लगा लिया. अब तक जिस मां के चेहरे की हवाइयां उड़ रहीं थी, बच्चे के सीने से लगाने के बाद उस मां की खुशी का बयान शब्दों में मुश्किल है. अब तक विंग कमांडर छत पर मौजूद दूसरी महिला को भी खींचकर अपने हेलीकॉप्टर तक पहुंचा चुके थे.
इस परिवार को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद विंग कमांडर पारसनाथ का हेलीकॉप्टर सुरक्षित स्थान की तरफ चल चुका था. अब विंग कमांडर के आंखों के सामने अपनी मां की आंचल में सुकून महसूस कर रहा मासूम, बेटे की सलामती से खुश एक मां का प्रफुल्लित चेहरा और अपने परिवार को सुरक्षित देख राहत की सांस ले रही एक महिला थी. तीनों चेहरे के भाव पढ़ने के बाद विंग कमांडर को ऐसा लग रहा था, जैसे बहादुरी के हजारों मेडल किसी ने उनकी झोली में डाल दिए हों.
अब निगाहें ताकने लगी हैं कि कब कोई मसीहा आए और उन्हें इस मुसीबत से निकालकर किसी सुरक्षित स्थान में पहुंचा दे. वहीं, बाढ़ में फंसे लोगों के बचाव कार्य में जुटी सेना की हालत भी इनसे जुदा नहीं है. दिन भर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के बाद सेना का हर जवान इस इंतजार में रात काटता है कि कब सूरज की पहली किरण निकले और वह रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट जाए.
बीते दिन कुछ ऐसी ही हालत एयरफोर्स के विंग कमांडर पारसनाथ की भी थी. सुबह के इंतजार में उन्होंने पूरी रात अपने हेलीकॉप्टर के पास खड़े होकर काट दी थी. सुबह की पहली किरण के साथ उनका हेलीकॉप्टर आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार था. वह अपने पायलट साथी के साथ बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए निकल चुके थे.
अलप्पुझा कस्बे छत पर मासूम के साथ नजर आईं दो महिलाएं
कुछ ही देर में उनका हेलीकॉप्टर अलप्पुझा कस्बे के ऊपर मंडरा रहा था. उनकी निगाहें लगातार सामने नजर आ रही छतों पर टिकी हुई थी. काफी देर तक उड़ान भरने के बाद विंग कमांडर पारसनाथ को एक छत पर कुछ महिलाएं हाथ हिलाती हुई नजर आईं. विंग कमांडर पारस नाथ को अपना नया लक्ष्य मिल चुका था. हेलीकॉप्टर को तुरंत छत पर दिख रहीं महिलाओं की तरफ मोड़ दिया गया.
करीब जाने पर पता चला कि इन दोनों महिलाओं के साथ एक मासूब बच्चा भी मौजूद था. कहने को यह रेस्क्यू ऑपरेशन जितना सरल था, वास्तविकता में इस परिवार को हेलीकॉप्टर तक पहुंचाना उतना ही कठिन था. समस्या यह थी कि दोनों वयस्क महिलाओं को हेलीकॉप्टर तक खींचना आसान था, लेकिन बच्चे को हेलीकॉप्टर तक कैसे लाया जाए.
मां को खींचकर हेलीकॉप्टर तक पहुंचाने में हुए सफल
समस्या यह भी थी कि विंग कमांडर मदद के लिए नीचे उतरते हैं तो इनको खींचकर हेलीकॉप्टर तक कौन लेकर आएगा. चंद सेकेंड के इंतजार के बाद विंग कमांडर ने नीचे उतरने का फैसला किया. वह रस्से के सहारे नीचे गए और महिलाओं को समझाया कि किस तरह रस्से की बेल्ट को अपने शरीर में फंसाना है. अब समस्या यह थी कि बच्चे की मां अपने बच्चे के बिना हेलीकॉप्टर में नहीं जाना चाहती थी.
विंग कमांडर महिला के साथ बच्चे को भेजना नहीं चाहते थे. उन्हें डर था कि कहीं घबराहट में महिला ने बच्चे को छोड़ दिया तो बड़ा हादसा हो सकता है. लिहाजा, विंग कमांडर ने बच्चे की मां आश्वासन दिया कि वह किसी भी कीमत में बच्चे को हेलीकॉप्टर में पहुंचाएंगे. थोड़ी न नुकर के बाद बच्चे की मां मान गई. विंग कमांडर दोबारा हेलीकॉप्टर में पहुंच गए. योजना के तहत सबसे पहले बच्चे की मां को ऊपर खींचा गया.
च्चे को अपनी बाहों में लेकर हेलीकॉप्टर तक पहुंचे विंग कमांडर
विंग कमांडर दोबारा नीचे उतरे और बच्चे को अपनी गोद में लेकर वह हेलीकॉप्टर तक पहुंचे. विंग कमांडर के ऊपर पहुंचते ही मां ने अपने बच्चे को सीने से लगा लिया. अब तक जिस मां के चेहरे की हवाइयां उड़ रहीं थी, बच्चे के सीने से लगाने के बाद उस मां की खुशी का बयान शब्दों में मुश्किल है. अब तक विंग कमांडर छत पर मौजूद दूसरी महिला को भी खींचकर अपने हेलीकॉप्टर तक पहुंचा चुके थे.
इस परिवार को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद विंग कमांडर पारसनाथ का हेलीकॉप्टर सुरक्षित स्थान की तरफ चल चुका था. अब विंग कमांडर के आंखों के सामने अपनी मां की आंचल में सुकून महसूस कर रहा मासूम, बेटे की सलामती से खुश एक मां का प्रफुल्लित चेहरा और अपने परिवार को सुरक्षित देख राहत की सांस ले रही एक महिला थी. तीनों चेहरे के भाव पढ़ने के बाद विंग कमांडर को ऐसा लग रहा था, जैसे बहादुरी के हजारों मेडल किसी ने उनकी झोली में डाल दिए हों.
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